{"_id":"6272a65c10058a1a5c0a239b","slug":"railways-deployes-86-persent-of-its-open-wagons-for-coal-transportation-to-tackle-power-crisis-news-in-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली संकट: रेलवे ने समस्या से निपटने के लिए उठाए कदम, कोयला परिवहन के लिए काम पर लगाईं 86 फीसदी ओपन वैगन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
बिजली संकट: रेलवे ने समस्या से निपटने के लिए उठाए कदम, कोयला परिवहन के लिए काम पर लगाईं 86 फीसदी ओपन वैगन
Wed, 04 May 2022 09:44 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 04 May 2022 09:44 PM IST
सार
यह फैसला रेलवे की ओर से कोयला और बिजली मंत्रियों के साथ चर्चा के बाद तैयार की गई योजना के हिस्से के तौर पर किया गया है।
विज्ञापन
भारतीय रेलवे
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में चल रहे बिजली संकट से निपटने के लिए भारतीय रेलवे ने अपनी 86 फीसदी ओपन वैगन को देश के विभिन्न पावर प्लांट कर कोयला पहुंचाने के लिए तैनात किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने बुधवार को सूत्रों के हवाले से यह खबर दी। सूत्रों ने कहा कि रेलवे के बेड़े में इस समय एक लाख 31 हजार 403 ओपन वैगन हैं। इनमें से एक लाख 13 हजार 880 का उपयोग कोयला परिवहन के लिए किया जा रहा है।
विज्ञापन
सूत्रों ने आगे कहा कि यह फैसला रेलवे की ओर से कोयला और बिजली मंत्रियों के साथ चर्चा के बाद तैयार की गई योजना के हिस्से के तौर पर किया गया है। आंकड़ों के अनुसार रेलवे के पास उपलब्ध कुल वैगनों में से एक लाख 31 हजार 403 ओपन हैं और दो मई तक इनमें से 3636 को रिपेयरिंग की जरूरत थी। रेलवे रोज पावर प्लांट्स की मांग को पूरा करने के लिए औसतन 28,470 वैगनों का संचालन कर रहा है।
विज्ञापन
एक कोयला ट्रेल में आम तौर पर 84 तक वैगन होती हैं। इसके साथ ही रेलवे ने झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश जैसे देशों में 122 स्थानों पर लंबी दूरी की ट्रेनों का उपयोग करने के लिए एक नया तरीका भी इस्तेमाल किया है। इसके तहत तीन से पांच ट्रेनों का संचालन एक साथ किया जा रहा है। कोयला परिवहन को लेकर तीनों मंत्रियों की शीर्ष अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक का आयोजन भी हुआ है।
विज्ञापन
कोयले के लिए क्षतिग्रस्त वैगनों का भी हो रहा इस्तेमाल
सूत्रों ने कहा कि स्थिति ऐसी है कि रेलवे को कोयला परिवहन के लिए 40-50 क्षतिग्रस्त वैगनों को भी काम पर लगाना पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार रेलने ने रेक को संचालन की दूरी को भी बढ़ाकर 2500 किलोमीटर कर दिया है। इसका मतलब है कि जिन रेक की हर 7500 किलोमीटर के सफर के बाद मरम्मत की जाती थी, उन्हें अब 10,000 किलोमीटर के बाद गैराज भेजा जा रहा है। इससे उन्हें चलने का अधिक समय मिल रहा है।
इस्पात और एल्युमिनियम के परिवहन पर पड़ रहा असर
इसके अलावा जिन ट्रेनों की लोडिंग क्षमता 71 मीट्रिक टन के आसपास थी, अब वह कम से कम एक टन अतिरिक्त कोयला ले जा रही हैं। सूत्रों ने संकेत दिया कि कोयले पर यह फोकल स्टील और एल्युमिनियम के परिवहन को प्रभावित कर रहा है।