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Train Accident: रेलवे ने बताया- क्यों तेज गति में थी दोनों ट्रेनें, कैसे बची मालगाड़ी; मौत से जूझ रहा ड्राइवर
Mon, 05 Jun 2023 11:03 AM IST
शक्तिराज सिंह
अमर उजाला, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Mon, 05 Jun 2023 11:03 AM IST
सार
आयरन से भरी हुई मालगाड़ी की सेंटर ऑफ ग्रेविटी और उसके भार के चलते पूरा इंपैक्ट पैसेंजर ट्रेन पर आया। मालगाड़ी अपनी जगह से बिल्कुल भी नहीं हिली। टकराव की वजह से ट्रेन के डिब्बे इधर-उधर बिखर गए।
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ओडिशा रेल दुर्घटना
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बालासोर ट्रेन हादसे को लेकर रविवार को रेलवे बोर्ड ने कुछ अहम जानकारी साझा की। बोर्ड की सदस्य (ऑपरेशन एंड बीडी) जया वर्मा सिन्हा ने बताया कि, दुर्घटना जिस स्टेशन पर हुई, वहां चार प्लेटफार्म हैं। यहां बीच में दो मेन लाइन हैं और बगल में दो लूप लाइन हैं। जहां हम गाड़ी रोकते है उसे लूप लाइन कहते है। शुक्रवार शाम को स्टेशन से दो मेल एक्सप्रेस गाड़ियों को अलग-अलग दिशाओं से गुजरना था। इसलिए लूप लाइन पर 2 गाड़ियां को रोका गया था, ताकि बाकी लाइन पर ना रुकने वाली गाड़ी गुजर सके।
चेन्नई की तरफ से यशवंतपुर एक्सप्रेस बेंगलुरु से आ रही थी। हावड़ा की दिशा से शालीमार रेलवे स्टेशन से कोरोमंडल एक्सप्रेस चेन्नई जाने के लिए आ रही थी, जिसके लिए सिग्नल ग्रीन थे और सब कुछ सेट था। पायलट को सिग्नल ग्रीन दिख रहा था, इसलिए उसे सीधा जाना था। ग्रीन सिग्नल के मुताबिक, ड्राइवर को अपनी तय स्पीड के अनुसार बिना रुके आगे जाना है। इसलिए वह 128 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जा रहा था। यशवंत एक्सप्रेस भी 126 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही थी। इस ट्रेन को भी ग्रीन सिग्नल था।
इसलिए कोरोमंडल ट्रेन को हुआ को ज्यादा नुकसान
जय वर्मा ने बताया कि, सिग्नलिंग में कोई परेशानी नहीं पाई गई। सिर्फ एक कोरोमंडल ट्रेन की दुर्घटना हुई थी। किसी वजह से वो ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई, इंजन और कोच इसके मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गए। आयरन से भरी मालगाड़ी थी जिस पर कोरोमंडल की बोगी और इंजन चढ़े। आयरन होने की वजह से यात्री ट्रेन को ज्यादा क्षति पहुंची है। कोरोमंडल के डिब्बे डाउन लाइन पर आ गए जिस पर यशवंतपुर ट्रेन गुजर रही थी और आखिरी इसके दो डब्बे डिरेल हो गए। अभी यह दुर्घटना कैसे हुई। इसकी विस्तृत रिपोर्ट का हम इंतजार कर रहे है। फिलहाल यह कहना गलत होगा कि ट्रेनों के बीच टक्कर हुई है। सिर्फ कोरोमंडल एक्सप्रेस का एक्सीडेंट हुआ है। किस वजह से यह हुआ है, हम उसका पता लगा रहे हैं।
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इसलिए पटरी पर खड़ी रही मालगाड़ी
वर्मा कहती है कि, एक्सप्रेस ट्रेन बेहद सुरक्षित है और आमतौर पर यह पलटती नहीं है। इस केस में ऐसा हुआ है कि इस स्पीड में जब टकराव का पूरा इंपैक्ट्स ट्रेन पर आया तो दुनिया में ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नहीं है, जो इसके इंपैक्ट को रोक सके। आयरन से भरी हुई मालगाड़ी की सेंटर ऑफ ग्रेविटी और उसके भार के चलते पूरा इंपैक्ट पैसेंजर ट्रेन पर आया। मालगाड़ी अपनी जगह से बिल्कुल भी नहीं हिली। टकराव की वजह से ट्रेन के डिब्बे इधर-उधर बिखर गए। इसकी वजह से कुछ डिब्बे डाउन लाइन पर गुजर रही यशवंतपुर एक्सप्रेस से टकरा गए। इससे यशवंतपुर एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे डिरेल होकर दूसरी तरफ चले गए।
हादसे के बाद यह बोला कोरोमंडल का ड्राइवर..
सिन्हा ने बताया कि, कोरोमंडल ट्रेन के ड्राइवर से उनकी बात हुई है। ड्राइवर ने बताया कि सिग्नल ग्रीन मिला था इसलिए गाड़ी अपनी गति से आगे बढ़ रही थी। ड्राइवर की हालत गंभीर है और उसका इलाज चल रहा है। जबकि यशवंतपुर ट्रेन के टीटी ने कहा कि मैंने पीछे की ओर बहुत जोर की आवाज़ सुनी थी। वहीं मालगाड़ी का गार्ड नीचे उतरा हुआ था। इसलिए उसको कुछ नहीं हुआ। नहीं तो नहीं बचता। सिन्हा ने कहा कि, हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है इस जानकारी समझने का प्रयास कर रहे है। घटना स्थल पर सब तहस-नहस हो गया है।
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चेन्नई की तरफ से यशवंतपुर एक्सप्रेस बेंगलुरु से आ रही थी। हावड़ा की दिशा से शालीमार रेलवे स्टेशन से कोरोमंडल एक्सप्रेस चेन्नई जाने के लिए आ रही थी, जिसके लिए सिग्नल ग्रीन थे और सब कुछ सेट था। पायलट को सिग्नल ग्रीन दिख रहा था, इसलिए उसे सीधा जाना था। ग्रीन सिग्नल के मुताबिक, ड्राइवर को अपनी तय स्पीड के अनुसार बिना रुके आगे जाना है। इसलिए वह 128 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जा रहा था। यशवंत एक्सप्रेस भी 126 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही थी। इस ट्रेन को भी ग्रीन सिग्नल था।
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इसलिए कोरोमंडल ट्रेन को हुआ को ज्यादा नुकसान
जय वर्मा ने बताया कि, सिग्नलिंग में कोई परेशानी नहीं पाई गई। सिर्फ एक कोरोमंडल ट्रेन की दुर्घटना हुई थी। किसी वजह से वो ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई, इंजन और कोच इसके मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गए। आयरन से भरी मालगाड़ी थी जिस पर कोरोमंडल की बोगी और इंजन चढ़े। आयरन होने की वजह से यात्री ट्रेन को ज्यादा क्षति पहुंची है। कोरोमंडल के डिब्बे डाउन लाइन पर आ गए जिस पर यशवंतपुर ट्रेन गुजर रही थी और आखिरी इसके दो डब्बे डिरेल हो गए। अभी यह दुर्घटना कैसे हुई। इसकी विस्तृत रिपोर्ट का हम इंतजार कर रहे है। फिलहाल यह कहना गलत होगा कि ट्रेनों के बीच टक्कर हुई है। सिर्फ कोरोमंडल एक्सप्रेस का एक्सीडेंट हुआ है। किस वजह से यह हुआ है, हम उसका पता लगा रहे हैं।
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इसलिए पटरी पर खड़ी रही मालगाड़ी
वर्मा कहती है कि, एक्सप्रेस ट्रेन बेहद सुरक्षित है और आमतौर पर यह पलटती नहीं है। इस केस में ऐसा हुआ है कि इस स्पीड में जब टकराव का पूरा इंपैक्ट्स ट्रेन पर आया तो दुनिया में ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नहीं है, जो इसके इंपैक्ट को रोक सके। आयरन से भरी हुई मालगाड़ी की सेंटर ऑफ ग्रेविटी और उसके भार के चलते पूरा इंपैक्ट पैसेंजर ट्रेन पर आया। मालगाड़ी अपनी जगह से बिल्कुल भी नहीं हिली। टकराव की वजह से ट्रेन के डिब्बे इधर-उधर बिखर गए। इसकी वजह से कुछ डिब्बे डाउन लाइन पर गुजर रही यशवंतपुर एक्सप्रेस से टकरा गए। इससे यशवंतपुर एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे डिरेल होकर दूसरी तरफ चले गए।
हादसे के बाद यह बोला कोरोमंडल का ड्राइवर..
सिन्हा ने बताया कि, कोरोमंडल ट्रेन के ड्राइवर से उनकी बात हुई है। ड्राइवर ने बताया कि सिग्नल ग्रीन मिला था इसलिए गाड़ी अपनी गति से आगे बढ़ रही थी। ड्राइवर की हालत गंभीर है और उसका इलाज चल रहा है। जबकि यशवंतपुर ट्रेन के टीटी ने कहा कि मैंने पीछे की ओर बहुत जोर की आवाज़ सुनी थी। वहीं मालगाड़ी का गार्ड नीचे उतरा हुआ था। इसलिए उसको कुछ नहीं हुआ। नहीं तो नहीं बचता। सिन्हा ने कहा कि, हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है इस जानकारी समझने का प्रयास कर रहे है। घटना स्थल पर सब तहस-नहस हो गया है।