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Vande Bharat Sleeper: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण में देरी पर रेल मंत्री ने तोड़ी चुप्पी, बताई ये वजह

Fri, 29 Nov 2024 06:58 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 29 Nov 2024 06:58 AM IST
सार

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण में देरी को लेकर रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने अपना बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण की प्रक्रिया डिजाइन मंजूरी के मुद्दों के कारण शुरू होने में देरी हो रही है। 

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Railway Minister broke his silence on the delay in the construction of Vande Bharat sleeper trains
रेल मंत्री, अश्विनी वैष्णव। - फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब

विस्तार

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण में देरी को लेकर इन दिनों डिजाइन मंजूरी के मुद्दों के साथ-साथ कई सारे दावे सामने आए हैं। इसी बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण की प्रक्रिया डिजाइन मंजूरी के मुद्दों के कारण शुरू होने में देरी हो रही है। 
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डिजाइन कभी कोई मुद्दा नहीं-वैष्णव
पत्रकारों से बातचीत के दौरान वैष्णव ने कहा कि इन ट्रेनों के निर्माण के लिए जिस रूसी फर्म को शामिल किया गया है, उसके लिए डिजाइन कभी कोई मुद्दा नहीं था। इससे पहले, रूसी कंपनी ट्रांसमाशहोल्डिंग (टीएमएच) के अधिकारियों के हवाले से मीडिया के एक वर्ग ने बताया था कि भारतीय रेलवे ने ट्रेन में शौचालय और पेंट्री कार की मांग की थी, जिसके लिए ट्रेनों के डिजाइन में बदलाव करना जरूरी था। 
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रेल मंत्री ने बताई असली वजह
वैष्णव ने कहा कि असली समस्या फर्म की सीमित निर्माण क्षमता से संबंधित थी, क्योंकि रूस में आमतौर पर छोटे कोच होते हैं। उन्होंने बताया कि फर्म को वंदे भारत के डिज़ाइन के अनुसार 16, 20 या 24 कोच वाली ट्रेन बनाने के लिए कहा गया था। चूंकि रूस में ट्रेनों में 6 से 8 कोच होते हैं, फर्म को यह सवाल था कि भारत में क्यों अधिक कोच वाली ट्रेनों की आवश्यकता है। मंत्री ने बताया कि यह मुद्दा अब सुलझा लिया गया है और निर्माण प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
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वैष्णव ने दावों को बताया निराधार 
वहीं इस मामले में जारी रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि फर्म ने डिजाइन में बदलाव को लेकर रेल मंत्रालय की चिंताओं को संबोधित किया और इसे मंजूरी के लिए मंत्रालय को भेजा, जिसने हालांकि अपनी सहमति नहीं दी। वहीं बात अनुबंधों के अनुसार, फर्म को 1,920 स्लीपर कोच बनाने हैं। हालांकि, वैष्णव ने कहा कि ये खबरें निराधार हैं क्योंकि असली मुद्दे फर्म की सीमित विनिर्माण क्षमताओं के संबंध में थे क्योंकि रूस में भारत की तुलना में ट्रेनों में कम संख्या में कोच होते हैं।
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