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Railway: 15 मिनट में लोडिंग-पांच मिनट में अनलोडिंग, नमक ढुलाई में रेलवे का ये फास्ट ट्रैक फॉर्मूला हुआ हिट
Tue, 10 Feb 2026 11:31 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 10 Feb 2026 11:31 PM IST
सार
भारतीय रेलवे की तरफ से नमक ढुलाई में एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया, जो काफी हिट साबित हुआ है। इस नए फास्ट ट्रैक फॉर्मूले के तहत नमक को 15 मिनट में लोड और पांच मिनट में अनलोड किया जा रहा है।
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नमक ढुलाई में रेलवे का फास्ट ट्रैक फॉर्मूला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय रेलवे के माल ढुलाई सिस्टम में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अहमदाबाद मंडल के भीमासर-गांधीधाम सेक्शन में रेलवे ने माल ढुलाई को लेकर एक नया ट्रायल किया। यहां नमक जैसे थोक सामान को ले जाने के लिए पहली बार खास कंटेनरों का सफल परीक्षण किया गया। रेलवे का दावा है कि यह नया तरीका पारंपरिक खुले वैगनों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल है। जिससे माल ढुलाई की दक्षता और परिचालन क्षमता दोनों बढ़ेंगी। वहीं, ये खास कंटेनर जंग मुक्त है। जिससे नमक की शुद्धता बनी रहेगी। इनका रखरखाव का खर्च भी कम आता है।
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रेलवे ने इस ट्रायल के तहत लोडिंग प्रक्रिया को भी आसान और तेज बनाया है। नमक की लोडिंग साइलो सिस्टम के जरिए या ऊपर से पोकलेन मशीन की मदद से की जा सकती है। हर कंटेनर के ऊपर 7×4 फीट के दो बड़े ओपनिंग दिए गए हैं, जिससे पूरी तरह मशीनी और सुरक्षित तरीके से लोडिंग संभव होती है। ट्रायल के दौरान प्रति कंटेनर लोडिंग में 15 मिनट से भी कम समय लगा। कुल 28 पोकलेन बकेट्स के जरिए हर कंटेनर में नमक भरा गया।
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रेलवे ने इस ट्रायल के तहत लोडिंग प्रक्रिया को भी आसान और तेज बनाया है। नमक की लोडिंग साइलो सिस्टम के जरिए या ऊपर से पोकलेन मशीन की मदद से की जा सकती है। हर कंटेनर के ऊपर 7×4 फीट के दो बड़े ओपनिंग दिए गए हैं, जिससे पूरी तरह मशीनी और सुरक्षित तरीके से लोडिंग संभव होती है। ट्रायल के दौरान प्रति कंटेनर लोडिंग में 15 मिनट से भी कम समय लगा। कुल 28 पोकलेन बकेट्स के जरिए हर कंटेनर में नमक भरा गया।
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नमक ढुलाई में रेलवे का फास्ट ट्रैक फॉर्मूला
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, अनलोडिंग की प्रक्रिया भी उतनी ही आसान और तेज रही। हाइड्रोलिक टिपर ट्रक की मदद से कंटेनर को करीब 45 डिग्री तक झुकाया गया और पांच मिनट से भी कम समय में पूरा नमक खाली कर दिया गया। कंटेनर के साइड में दिए गए दरवाजों से नमक अपने आप नीचे गिर जाता है, जिससे अंदर कोई अवशेष नहीं बचता। इस वजह से अतिरिक्त सफाई की जरूरत भी नहीं पड़ती।
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एक स्टेनलेस स्टील कंटेनर का खाली वजन करीब तीन टन है। इससे बड़े पैमाने पर नमक की ढुलाई समय पर और बिना रुकावट के की जा सकती है। इन कंटेनरों के इस्तेमाल से मैनुअल वैगन क्लीनिंग की जरूरत खत्म हो जाती है और किसी तरह की कोटिंग भी नहीं करनी पड़ती। लोडिंग और अनलोडिंग जल्दी होने से वैगनों का टर्नअराउंड टाइम घटता है। ऑपरेशन की क्षमता बढ़ती है। भीमासर-गांधीधाम सेक्शन में हुआ यह पहला ट्रायल भारतीय रेलवे के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल तकनीकी रूप से सफल रही और आत्मनिर्भर, सुरक्षित व कुशल माल परिवहन के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम साबित हुई है।
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