फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Railway Board urged all zonal officer granting independent approval o investigate cases under Corruption Act

Railway: 'भ्रष्टाचार जांच की मंजूरी सिर्फ विजिलेंस देगा, जोनल अधिकारी नहीं', रेलवे बोर्ड का सख्त आदेश

Fri, 05 Sep 2025 07:30 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 05 Sep 2025 07:30 PM IST
सार

रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत किसी भी जांच की मंजूरी वे स्वयं न दें। यह अधिकार केवल रेलवे बोर्ड की विजिलेंस शाखा को है। बोर्ड ने चेतावनी दी कि डीओपीटी के आदेशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
 

विज्ञापन
Railway Board urged all zonal officer granting independent approval o investigate cases under Corruption Act
नई दिल्ली स्टेशन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे भ्रष्टाचार के मामलों में स्वतंत्र रूप से जांच की मंजूरी न दें। बोर्ड ने कहा कि ऐसा करना कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के निर्देशों का उल्लंघन है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत जांच की मंजूरी केवल रेलवे बोर्ड की सतर्कता शाखा यानि विजिलेंस द्वारा दी जानी चाहिए।
विज्ञापन


रेलवे बोर्ड ने हाल ही में जारी परिपत्र में कहा कि कुछ जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयां भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 17A के तहत स्वयं ही मंजूरी दे रही थीं। बोर्ड ने चेतावनी दी कि यह नियमों के खिलाफ है और इससे जांच प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठ सकता है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- धुंध से ढक जाएगा उत्तर भारत! प्रदूषण का खतरा बढ़ा, समझें विश्व मौसम संगठन की चेतावनी के मायने
विज्ञापन
विज्ञापन


रेलवे ने दिया इन निर्देशों का हवाला
बोर्ड ने अपने आदेश में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पुराने आदेश को भी दोहराया। इसके मुताबिक, किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ उसके आधिकारिक कामकाज से जुड़े फैसलों या सिफारिशों पर जांच तभी शुरू हो सकती है जब सरकार से पहले अनुमति ली जाए। इसका उद्देश्य मनमानी कार्रवाई को रोकना और नियमों के तहत जांच प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है।

जोनल सतर्कता अधिकारियों पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, यह आदेश तब आया जब रेलवे बोर्ड के संज्ञान में आया कि कुछ जोनल मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) बिना बोर्ड की अनुमति के भ्रष्टाचार के मामलों में जांच शुरू कर रहे थे। शिकायतों पर मिली जानकारी के बाद बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसी कोई भी कार्रवाई केवल बोर्ड विजिलेंस की मंजूरी से ही हो सकती है।


ये भी पढ़ें- 'सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले...'; असम से मुस्लिमों को निकालने वाले मदनी के बयान पर भाजपा

2018 संशोधन और प्रक्रियाएं
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि डीओपीटी ने तीन सितंबर 2021 को सभी विभागों को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17A के मामलों से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी बताई थी। इसमें साफ कहा गया था कि चाहे अधिकारी गजटेड हो या नॉन-गजटेड, जांच की मंजूरी जोनल स्तर पर नहीं, बल्कि केंद्रीय स्तर पर ही दी जानी चाहिए।

रेलवे बोर्ड का यह कदम भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को पारदर्शी और नियमबद्ध बनाने की दिशा में है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि कोई जोनल अधिकारी स्वतंत्र रूप से ऐसी मंजूरी देता है, तो यह डीओपीटी के आदेशों का उल्लंघन होगा और उस पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed