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Railways: चलती ट्रेन में ड्राइवर को आई नींद तो ऑटोमेटिक लगेगा ब्रेक, रेलवे ने हादसे रोकने लिए बनाई खास डिवाइस

Thu, 14 Sep 2023 05:32 PM IST
श्वेता महतो डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Thu, 14 Sep 2023 05:32 PM IST
सार

इमरजेंसी ब्रेक लगाने के लिए आरडीएएस (RDAS) को एक विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस के साथ जोड़ा जाएगा।हालांकि रेलवे का यह डिवाइस अभी विकसित हो रहा है और इसके कई सारे टेस्ट किए जा रहे हैं।

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Railway Board automatic brake Northeast Frontier Railway Artificial Intelligence
ट्रेन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए भारतीय रेलवे अपना इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में लगा हुआ हैं। पटरियों, सिग्नल और रास्तों को हाईटेक बनाने के साथ ही ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई तरह नई तकनी के डिवाइस लगाई जा रही है। 
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इसी क्रम में अब  नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक ऐसा डिवाइस बना रही है, जो ट्रेनों के लोको पायलट को नींद आने की स्थिति में उन्हें अलर्ट करेगा और अगर लोको पायलट द्वारा रिस्पॉन्स नहीं दिया जाता है, तो ये इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेनों को रोकने का भी काम कर सकता है।
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रेलवे बोर्ड ने एनआरएफ (NFR) को एक ऐसा डिवाइस बनाने के लिए कहा था, जो कि लोको पायलट की पलकों को देखकर ये पता लगाएगा कि कहीं ड्राइवर को नींद तो नहीं आ रही है। रेलवे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि, इस डिवाइस को रेलवे चालक सहायता सिस्टम (RDAS) के नाम से जाना जाएगा। ये डिवाइस न केवल लोको पायलट को अलर्ट करेगा, बल्कि एक निश्चित समय तक चालक के एक्टिव न होने की स्थिति में इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेनों को रोक भी सकेगा।
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इमरजेंसी ब्रेक लगाने के लिए आरडीएएस (RDAS) को एक विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस के साथ जोड़ा जाएगा। हालांकि रेलवे का यह डिवाइस अभी विकसित हो रहा है और इसके कई सारे टेस्ट किए जा रहे हैं। NFR की टेक्निकल टीम अभी इस पर काम कर रही है। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में ये तैयार हो जाएगा।


रेलवे बोर्ड ने दो अगस्त को NFR को पत्र लिखा और आरडीएएस के विकास में तेजी लाने के लिए कहा। इस पत्र में यह भी कहा गया कि एक बार डिवाइस के तैयार हो जाने के बाद इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 20 मालगाड़ी इंजन (WAG9) और पैसेंजर ट्रेन इंजन (WAP7) में लगाया जाएगा। रेलवे के सभी जोन से इस प्रणाली के इस्तेमाल के बाद इसकी कार्यप्रणाली पर अपनी प्रतिक्रिया भी देने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसमें और सुधार किया जा सके।
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