देखिए कैसा है राहुल गांधी का ननिहाल
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गर्मी की छुट्टियाँ हैं और दुनिया भर के लोग घूमने निकल पड़े हैं। गर्मियों में पहाड़ों पर जाना और नाना-नानी के घर जाना दो ऐसे नियम हैं जिसे हर भारतीय मानते हैं। और अगर नानी पहाड़ों में कहीं रहती हों तो गर्मी में उनसे मिलने जाने का अपना ही सुख है।
कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी, हम-आप ही की तरह अपनी नानी से मिलने विदेश गए हैं। 'राहुल गांधी छुट्टी मनाने लंदन रवाना' राहुल गांधी के बदले हुए हैं अंदाज अच्छा लगता है जब कोई बड़ी शख्सियत कुछ अपने ही जैसा सोचते और करते हैं... फिर नानी से मिलने का मन तो सभी का करता है ! 2006 की गर्मियों में जब हम पहली बार इटली में गए थे तो हमने सोनिया गांधी के जन्मस्थान लुजीयाना जाने की ठान रखी थी। मैं शुरू से ही सोनिया गांधी की बहुत इज्जत करती हूं। और हमेशा से ही इस जगह के बारे में भी पढ़ा करती थी। नानी से राहुल की मुलाकात कहाँ होगी ये स्पष्ट नहीं, मगर उनका ननिहाल तो लुजीयाना ही है।
खूबसूरत शहर लुजीयाना-
वेनिस से कुछ ही दूर वीचेंजा नाम का एक शहर है। उसके पास ही यह खूबसूरत पहाड़ी इलाका है: लुजीआना। खैर 2006 में मैं वहाँ नहीं जा सकी लेकिन 2010 में इस छिपे हुए खूबसूरत खजाने तक पहुँचने का मौका मिला।
उस समय हमारी पहचान लुचानो जैकराइअ नाम के एक फिल्म निर्माता से थी। वो मरोस्तिका नाम के एक छोटे से शहर पर एक फिल्म बनाना चाहता था। मैं उनके साथ मरोस्तिका इसी उम्मीद में गई थी कि उससे सटा हुआ छोटा शहर लुजीआना भी है। बस्सानो देल ग्राप्पा नामक शहर से हम गाड़ी में रवाना हुए और पहाड़ों, पर्वतों से होते हुए, लगभग दो घंटे में लुजीआना पहुँच गए।
अलतो पियानो के सात बड़े शहरों में से एक, यह शहर पहले विश्व युद्ध में बहुत हानि झेल चुका था। यहाँ पर रहने वाले कई लोग आपको बताएंगे कि किस तरह उनके घर के बड़े-बूढ़े उस दौरान किसी और शहर में बसने चले गए थे। जंगलों और स्कीइंग के पहाड़ों का यह छोटा-सा शहर, युद्ध की अनेकों कहानियां खुद में बसाए हुए है। जिस रेस्तरां में हम गए, वहां का मालिक करीब साठ वर्षीय एक हंसमुख व्यक्ति था। उसे यह जानकर बहुत खुशी हुई थी कि मैं हिंदुस्तानी होने के बावजूद उनकी स्थानीय भाषा जानती थी, जो इतालवी भाषा से कुछ अलग थी। दरअसल मेरे कई मित्र वेनिस के थे और उन्होंने मुझे यहां की लोकल भाषा सिखा दी थी!
लूजीयाना में क्या है खास-
खाने में वहाँ की खास डिश "बाक्कला" मिली! यह कॉड मछली की डिश है जिसे दूध में पका कर तैयार किया जाता है। मछली प्रेमी होने के नाते मैंने उसे खूब चाव से खाया और बाकी का शहर देखने निकल पड़ी। मेरे दोस्त लूचानो को करीबी शहर मरोस्टिका जाना था तो वो मुझे छोड़ कर अकेले ही चले गए। गलियों में बेमतलब टहलने से कई बातें पता चलती हैं... उस जगह की आत्मा से सामना होता है।
लुजीआना एक आम-आसान शहर है। वेनिस की तेज रफ्तार जिन्दगी से दूर एक ऐसी जगह जहां विदेशी टूरिस्ट नहीं जाते।
सर्दियों में इटली के सैलानी यहां के पहाड़ मोन्ते कोर्नो पर गिरी बर्फ का आनंद लेने आते हैं और गर्मियों में यहां के संग्रहालय और गिरजाघर में चहल-पहल रहती है। यहां के सबसे बड़े कैथेड्रल में लकड़ी का एक ऐसा खास कांटा है जिसे स्वयं यीशू से जोड़ा जाता है! मान्यता यह है कि यह कांटा उस कांटों के ताज का हिस्सा है जिसे सर पर लिए ईश्वर के बेटे, यीशू मानवता की खातिर क्रॉस पर चढ़ गए थे। श्रद्धालु दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए आते हैं। गिरजा के भीतर की शांति मुझे आज भी याद है। वहां की अलौकिक ठंडक में मैं काफी देर तक बैठी रही और सोचती रही कि समर्पण या कुर्बानी के बिना कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। लेकिन क्या हमारा समाज दूसरों के त्याग को समझता भी है? चर्च की घंटी बजने लगी और मुझे लगा कि अब चलना चाहिए।
किताबों के शौकीन हैं वहां-
खैर, बात करते और कॉफी पीते समय निकलता रहा और लुचानो अपना काम करके वापस आ गए। उन्होंने मुझे वेनिस की ट्रेन में बैठाया और खुद बस्सानो वापस चला गया। लौटते वक्त गाड़ी में सोचती रही कितना छोटा और गुमनाम शहर था वो, लेकिन, मेरे लिए, कितना महत्वपूर्ण था।