राहुल गांधी की परीक्षा: गणित के पेपर में पास हुए तो 'भाजपा' और 'पार्टी' के भीतर से मिल रही 'चुनौती' का दे सकेंगे जवाब
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए यह समय परीक्षा का है। एक तरफ भाजपा 'कांग्रेस मुक्त भारत' अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने में लगी है तो दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के भीतर से राहुल गांधी के लिए चुनौती खड़ी करने वाली आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं। ऐसे वक्त में राहुल, बहुत संभलकर बोल रहे हैं। प्रेस वार्ता हो या पार्टी के भीतर संबोधन, वे गणित के आंकड़ों का इस्तेमाल खूब करने लगे हैं।
विस्तार
पहले राहुल गांधी जब केवल आलोचनात्मक बयानबाजी कर, भाजपा पर हमला बोलते थे तो उन्हें कई ओर से जवाब मिलता था। सत्ता पक्ष के लोग उनके सामने 'आंकड़ेबाजी' पेश कर उन्हें घेर लेते थे। अब राहुल ने गणित के आंकड़ों की बात पकड़ ली है। वे अपने हर बयान में अब आंकड़ों का सहारा लेते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोग राहुल की बात सुनते हैं। जब वे आंकड़ों के साथ लोगों के बीच जाते हैं तो सत्ता पक्ष की नीतियों की पोल खुल जाती है। उम्मीद है राहुल गांधी 'गणित' की इस परीक्षा में पास होकर न केवल भाजपा, बल्कि पार्टी के भीतर से आ रही नकारात्मक आवाजों को शांत कराने में सफल होंगे।
बता दें कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के लिए यह चुनौतियों से भरा दौर है। पार्टी के भीतर खींचतान चल रही है। कुछ दिन बाद कोई न कोई वरिष्ठ नेता ऐसी बात कह देता है, जो पार्टी के लिए चुभन की स्थिति पैदा कर देती है। भाजपा को चटकारे लेकर बयान देने का मौका मिल जाता है। छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान, इन तीनों राज्यों में कांग्रेस पार्टी की सरकार है, मगर यहां आए दिन कुछ न कुछ उल्टा पुल्टा होता रहता है। तीनों ही राज्यों में सत्ता परिवर्तन के लिए पार्टी के भीतर से ही आवाज उठ रही हैं। पांच राज्यों के चुनावों में भी कांग्रेस पार्टी अच्छा नहीं कर सकी थी।
2022 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी के 'जूनियर और सीनियर', दोनों आयु वर्ग के नेताओं पर, खासतौर से भाजपा डोरे डाल रही है। इन सभी बातों ने राहुल गांधी के लिए सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वे चाहते हैं कि विपक्ष, कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट हो जाए। यह अलग बात है कि दूसरे दलों के कई नेता और मुख्यमंत्री एकजुट तो होना चाहते हैं, मगर राहुल की अगुवाई में वे आगे कदम बढ़ाने को लेकर अनिश्चितता की स्थिति महसूस करने लगते हैं। इन्हीं सब बातों के चलते राहुल गांधी अब पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह आंकड़ों की मदद से सटीक तथ्य लोगों के सामने रखते हैं।
गुरुवार को केरल के कन्नूर में जिला कांग्रेस समिति (डीसीसी) कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए राहुल गांधी ने कहा, मोदी सरकार के दौरान जहां 2014 के बाद से कच्चे तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आई है, वहीं पिछले सात वर्षों में गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में भी भारी वृद्धि हो गई है। सात वर्षों में इनके दाम बढ़ाकर सरकार ने 23 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं। राहुल गांधी ने सवाल किया कि वह पैसा कहां गया है। देश ने पिछले 70 वर्षों में जो कुछ बनाया है, वह प्रधानमंत्री मोदी के कुछ चुनिंदा दोस्तों को दिया जा रहा है।
पार्टी के भीतर से उन पर निशाना साधने वाले नेताओं को अप्रत्यक्ष तौर से राहुल ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में केरल कांग्रेस ने सामूहिक नेतृत्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित किया है। यह सामूहिक भावना, कांग्रेस पार्टी के सच्चे लोकाचार को दर्शाती है। आज हमारा देश एक महत्वपूर्ण चौराहे पर है। प्रमुख विपक्षी दल के रूप में, कांग्रेस पार्टी का नैतिक कर्तव्य है कि वह इन ताकतों से लड़े, जो भारत के विचार को ही खतरे में डालती हैं।
बुधवार की प्रेस वार्ता में भी दिखाए थे आंकड़े
इससे पहले बुधवार को हुई प्रेस वार्ता में भी कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने आंकड़ों के साथ ही बातचीत की थी। उन्होंने कहा था, जब डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं, एक तो डायरेक्ट चोट लगती है और एक इनडायरेक्ट चोट लगती है। जो व्यक्ति गाडी में, स्कूटर में, ट्रक में डीजल-पेट्रोल डालता है, उसकी जेब पर डायरेक्ट चोट लगती है। जब डीजल व पेट्रोल का दाम बढ़ता है, तो ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ती है। जब ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ती है, तो सब चीजों के दाम बढ़ते हैं, उससे लोगों को इनडायरेक्ट चोट लगती है।
2014 में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि डीजल, पेट्रोल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। उस वर्ष 410 रुपए प्रति सिलेंडर की कीमत थी। जब हमने, यानी यूपीए ने ऑफिस छोड़ा तब से लेकर आज सिलेंडर का रेट 885 रुपए हो गया है। इसके दाम में 116 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2014 में पेट्रोल के दाम 71.51 रुपये थे, आज 101.34 रुपये हो गए हैं। सीधे तौर पर इसमें 42 फीसदी का इजाफा हुआ। 57.28 रुपए प्रति लीटर डीजल, आज 88.77 रुपए प्रति लीटर हो गया है। इसमें भी 55 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है।
जब राहुल गांधी से यह सवाल किया गया कि आप संसद में मुद्दा उठाते हैं, यहां भी प्रेस वार्ता कर रहे हैं, क्या आपको लगता है कि जनता जो प्रभावित है, वह आपके साथ है, उन्होंने कहा, देखिए, गुस्सा पनप रहा है, वो तो साफ है। मगर दूसरी तरफ उस आवाज को व्यवस्थित तरीके से दबाया जा रहा है। अभी कोरोना महामारी का समय है। हम भी नहीं चाहते कि लाखों लोग सड़क पर निकलें। हम जानते हैं कि उसके दूसरे नतीजे हो सकते हैं। बतौर राहुल, थोड़ा रिस्ट्रेन शो कर रहे हैं, मगर जनता में जबरदस्त गुस्सा है।
उन्होंने कहा कि संस्थानों पर सरकार का भारी दबाव है। संसद में हमें बात करने नहीं देते हैं। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि ये गुस्सा बढ़ता जाएगा और फिर जबरदस्त प्रतिक्रिया आएगी। जब यूपीए की सरकार थी तो 105 डॉलर कच्चे तेल का दाम था। आज वह 71 डॉल पर है। राहुल गांधी ने कहा कि गैस के अंतरराष्ट्रीय दाम देखिए, हमारे समय में 880 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था, आज 653 डॉलर है, यानि 26 फीसदी कम हो गया है। इन सबके बावजूद लोगों को कितने रुपये देने पड़ रहे हैं, उससे आप वाकिफ हैं।