सरकार और किसानों की नाकाम वार्ता पर राहुल गांधी का तंज, कहा- नीयत साफ नहीं है जिनकी...
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन पिछले एक महीने से ज्यादा समय से जारी है। इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए किसानों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन उनका कोई ठोस परिणाम अब तक नहीं निकल सका है। ऐसा ही कुछ आज की बैठक में हुआ, जिसके बाद वार्ता की अगली तारीख तय कर दी गई। इसी को लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र पर तंज कसा।
राहुल गांधी ने एक ट्वीट में केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए शायराना अंदाज में लिखा, 'नीयत साफ नहीं है जिनकी, तारीख पे तारीख देना स्ट्रैटेजी है उनकी!' बता दें कि नए कृषि कानूनों को लेकर किसान समेत विपक्षी दल भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाते आए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि नए कृषि कानूनों की आड़ में सरकार कृषि क्षेत्र को भी कॉरपोरेट के हवाले करना चाहती है और इन कानूनों के आने से छोटे किसानों के लिए संकट उत्पन्न हो जाएगा।
नीयत साफ़ नहीं है जिनकी,
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 8, 2021
तारीख़ पे तारीख़ देना स्ट्रैटेजी है उनकी!
हम बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे, किसानों के साथ हैं: प्रियंका
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का कहना है कि तीनों कृषि बिल के खिलाफ हम बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। हम किसानों के साथ हमेशा रहे हैं। पीछे नहीं हटेंगे। ये बात उन्होंने किसान आंदोलन के समर्थन में दिल्ली के जंतर मंतर में 32 दिनों से धरने पर बैठे कांग्रेस के पंजाब के सांसदों से कही। कांग्रेस सांसद उनसे मिलने पहुंचे थे। प्रियंका ने कहा, किसानों की समस्या का समाधान यही है कि सरकार कानून वापस लें और कोई समाधान नहीं है। कांग्रेस किसान विरोधी कानून के खिलाफ हर मोर्चे पर किसानों के साथ खड़ी है।
अन्नदाता को थकाने की कोशिश : कांग्रेस
सरकार और किसानों की आठवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा निकलने पर कांग्रेस का कहना है कि किसानों के साथ बैठक-बैठक खेलकर वह अन्नदाता को थकाने की कोशिश कर रही है। पार्टी महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा, मोदी सरकार भारत के इतिहास में सबसे अमानवीय और अहंकारी साबित हुई है। उसे न ठंड में रोजाना दम तोड़ते किसान नजर आ रहे हैं और न ही ठप होती अर्थव्यवस्था। किसान न थकेगा, न झुकेगा, न रुकेगा।
उल्लेखनीय है कि नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन शुक्रवार को 44वें दिन में प्रवेश कर गया। लेकिन अब तक इसे लेकर शुरू हुआ गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है। किसानों को मनाने के लिए आज हुई आठवें दौर की वार्ता भी एक बार फिर बेनतीजा रही। अब अगली बैठक 15 जनवरी को आयोजित होगी। किसान यूनियनें कृषि कानूनों को रद्द करने से कम पर राजी नहीं हैं, जबकि सरकार बार-बार इसमें संशोधन करने की बात कह रही है।
किसान पेश नहीं कर पाए कोई अन्य विकल्प: नरेंद्र सिंह तोमर
उधर, बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान नेता कोई विकल्प पेश नहीं कर पाए। तोमर ने कहा, कानूनों पर चर्चा हुई लेकिन किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। सरकार ने अनुरोध किया कि अगर किसान यूनियनें कानूनों को वापस लेने के अलावा कोई अन्य विकल्प देती हैं तो हम उस पर विचार करेंगे। लेकिन, किसान यूनियों ने कोई विकल्प पेश नहीं किया, इसलिए बैठक समाप्त कर दी गई और अगली बैठक करने का फैसला किया गया।
कानून वापसी से पहले पीछे नहीं हटेंगे किसान: राकेश टिकैत
उधर, भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बैठक के बाद कहा कि जब तक नए कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक आंदोलन जारी रहेगा और किसान पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, 'हम कहीं नहीं जा रहे हैं। सरकार संशोधनों के बारे में बात करना चाहती थी। लेकिन, हम कानूनों के हिस्सों पर चर्चा नहीं करना चाहते। हम केवल यह चाहते हैं कि नए कानून निरस्त किए जाएं।'