Election Analysis: राहुल के खाते में 99वीं हार, कांग्रेस की राजनीति के केंद्र, जनता लगातार नकार रही नेतृत्व
करीब दो दशकों से राहुल गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को चुनावों में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टी को हार मिली। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
करीब दो दशकों से राहुल गांधी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता के तौर पर लगातार सक्रिय रहे हैं। मार्च 2004 में राजनीति में प्रवेश के बाद से उन्होंने कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी के अभियान की कमान संभाली, लेकिन चुनावी नतीजों को लेकर उनके नेतृत्व पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्हें देशभर में 99 बार हार का सामना करना पड़ा है। जनता लगातार उनके नेतृत्व को नकारती रही है।
लोकसभा चुनावों में हार
2014, 2019 और 2024 में कांग्रेस को मिली हार।
विधानसभा चुनाव
जम्मू-कश्मीर
- 2014
पंजाब
- 2007
- 2012
- 2022
हरियाणा
- 2014
- 2019
- 2024
दिल्ली
- 2013
- 2015
- 2020
- 2025
गुजरात
- 2007
- 2012
- 2017
- 2022
राजस्थान
- 2013
- 2023
महाराष्ट्र
- 2014
- 2019
- 2024
गोवा
- 2012
- 2017
- 2022
कर्नाटक
- 2004
- 2008
- 2018
केरल
- 2006
- 2016
- 2021
मध्य प्रदेश
- 2008
- 2013
- 2018
- 2023
तेलंगाना
- 2014
- 2018
आंध्र प्रदेश
- 2014
- 2019
- 2024
पुडुचेरी
- 2011
- 2021
- 2026
तमिलनाडु
- 2011
- 2016
- 2026
हिमाचल प्रदेश
- 2007
- 2017
उत्तराखंड
- 2007
- 2017
- 2022
सिक्किम
- 2004
- 2009
- 2014
- 2019
- 2024
उत्तर प्रदेश
- 2007
- 2012
- 2017
- 2022
बिहार
- 2005
- 2010
- 2020
- 2025
पश्चिम बंगाल
- 2006
- 2016
- 2021
- 2026
अरुणाचल प्रदेश
- 2019
- 2024
असम
- 2016
- 2021
- 2026
नगालैंड
- 2008
- 2013
- 2018
- 2023
मणिपुर
- 2017
- 2022
मिजोरम
- 2018
- 2023
त्रिपुरा
- 2008
- 2013
- 2018
- 2023
मेघालय
- 2018
- 2023
झारखंड
- 2005
- 2009
- 2014
ओडिशा
- 2004
- 2009
- 2014
- 2019
- 2024
छत्तीसगढ़
- 2008
- 2013
- 2023
2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति
केरल, पुदुचेरी, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव में केरल को छोड़कर बाकी राज्यों में कांग्रेस के हाथ निराशा लगी। कांग्रेस को केरल में 63, पश्चिम बंगाल में केवल दो, असम में 19, पुदुचेरी में एक सीटें और तमिलनाडु में पांच सीटें मिली।
क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ?
राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई के अनुसार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम कांग्रेस के लिए किसी बड़े राजनीतिक सदमे से कम नहीं हैं। केरल को छोड़कर, जहां वाम मोर्चे के खिलाफ दस साल की एंटी-इनकंबेंसी के चलते कांग्रेसनीत यूडीएफ की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी, शेष चार राज्यों के नतीजों ने पार्टी की सांगठनिक कमजोरियों की पोल खोलकर रख दी है। इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस न तो अपनी पुरानी गलतियों से सबक ले रही है और न ही जोखिम उठाकर नई रणनीति बनाने का साहस दिखा पा रही है। यह न केवल कांग्रेस, बल्कि पूरे इंडिया ब्लॉक के लिए करारा झटका है, जिससे उबरना उसके लिए काफी मुश्किल होगा।
किदवई ने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में कांग्रेस ने जैसा प्रदर्शन किया, वह काफी हद तक अपेक्षित भी था, लेकिन तमिलनाडु के नतीजों ने कांग्रेस नेतृत्व की भारी रणनीतिक खामियों को उजागर कर दिया है। अचरज तो इस बात को लेकर है कि पार्टी नेतृत्व राज्य में द्रमुक के खिलाफ पनप रहे सत्ता विरोधी रुझान को भांपने में हर स्तर पर विफल रहा। कांग्रेस के आंतरिक सर्वे भी राज्य में अभिनेता विजय की नई पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) के एक मजबूत ताकत के रूप में उभरने के संकेत दे रहे थे। कांग्रेस के पास टीवीके के साथ गठबंधन करने का तब एक सुनहरा अवसर भी था, जब खुद विजय के पिता एसए चंद्रशेखर ने साल की शुरुआत में स्वयं गठबंधन करने का प्रस्ताव दिया था।