कानों देखी: राहुल गांधी के 90 मिनट, 20 मुद्दे और खड़े होने को मजबूर हो गई सरकार, अब आगे क्या?
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बेहद करीबी एक नेता बहुत उत्साहित हैं। हर रोज फोन पर बताते हैं कि लोकसभा में कैसे राहुल गांधी और अखिलेश की जोड़ी तालमेल से काम कर रही है। सूत्र का कहना है कि यूपी में होने वाले उपचुनाव में भी तालमेल देखने को मिलेगा।
विस्तार
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के लिए बड़ा मुश्किल क्षण था। राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से 90 मिनट में 20 मुद्दे पर क्या बोले कि सदन में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री, कानून मंत्री, संसदीय मामलों के मंत्री समेत पूरी सरकार खड़ी हो गई। गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि वह राहुल को ज्यादा सहूलियत दे रहे हैं तो राहुल ने आरोप लगा दिया कि पीएम के आगे लोकसभा अध्यक्ष झुक जाते हैं। आज तो मुश्किल तब खड़ी हो गई, जब प्रधानमंत्री बीच में उठे, दो-तीन वाक्य में टोंके और राहुल अपनी रौ में लगे रहे। सचिवालय के सूत्र बताते हैं कि सदन की कार्यवाही के बाद पारा हाई था। लोकसभा अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ा संकट है कि आगे वह कैसे संतुलन बनाएंगे? सत्ता पक्ष भी नेता विपक्ष को मैनेज करने उपाय में व्यस्त है। हालांकि, भाजपा के ही कुछ नेता दबी जुबान से कहते हैं कि यह तो होना ही था।
तालमेल बनाकर चल रही है यूपी के दो लडक़ों की जोड़ी
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बेहद करीबी एक नेता बहुत उत्साहित हैं। हर रोज फोन पर बताते हैं कि लोकसभा में कैसे राहुल गांधी और अखिलेश की जोड़ी तालमेल से काम कर रही है। सूत्र का कहना है कि यूपी में होने वाले उपचुनाव में भी तालमेल देखने को मिलेगा। कांग्रेस के नेता भी इन दिनों राहुल गांधी के साथ-साथ अखिलेश यादव की तारीफ के पुल बांध रहे हैं। खबर है कि प्रियंका गांधी वाड्रा और डिंपल यादव की केमिस्ट्री थोड़ी गहरी हो रही है। यूपी से कांग्रेस के टिकट पर चुनकर आए एक सांसद का कहना है कि यह तालमेल चलता रहा तो 2027 तक भाजपा को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। राहुल गांधी का तेवर और अखिलेश का पीडीए पूरी पिक्चर बदलकर रख देगा।
रणदीप जी, शैलजा जी सुन लो, हमें हरियाणा में एक कांग्रेस चाहिए?
कु. शैलजा पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। वह अभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने आई थी। उन्हें थोड़ा झटका लगा है। 10, जनपथ से साफ संदेश मिला है कि गुटबाजी बंद होनी चाहिए। शैलजा के साथ-साथ संदेश राहुल गांधी के प्रिय रणदीप सुरजेवाला के पास भी पहुंच गया है। किरण चौधरी को पहले ही पता चल गया था कि इस बार दाल नहीं गलने वाली है। लिहाजा उन्होंने बेटी श्रुति के साथ भाजपा का पटका पहन लिया है। किरण के जाने के बाद से कांग्रेस भिवानी, महेन्द्रगढ़ जैसे किरण के प्रभाव वाले क्षेत्रों में नुकसान कम करने में जुट गई है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को 90 में से 55-60 सीटें जीत लेने का भरोसा दे रहे हैं। हुड्डा के भरोसे पर प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी को भी भरोसा है। हुड्डा के पास इसे बताने का आधार भी है।
वह कहते हैं कि इस बार जाट, दलित, मुस्लिम तो कहीं नहीं जाने वाला। किसानों के बीच में भाजपा की हालत पतली है। तीसरे हरियाणा में एक नया वर्ग है। इसने केवल भाजपा को हराने की कसम खाई है। बस मांग एक है। पार्टी में हुड्डा की कांग्रेस, इनकी कांग्रेस(गुट), उनकी कांग्रेस(गुट) न चले। बताते हैं राहुल गांधी ने भी गंभीरता से लेते हुए सख्त लहजे में कह दिया है कि पार्टी में इस बार गुटबाजी की कोई जगह नहीं।
महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा समेत राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। अक्तूबर महीने तक प्रस्तावित हैं। भाजपा के अंदरूनी सर्वे के रुझान में नतीजे मनमाफिक नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखकर पार्टी के चाणक्य ने कमान हाथ में ले ली है, लेकिन मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। महाराष्ट्र में एनसीपी (अजीत पवार) लायबिलिटी बन रही है, जबकि शिवसेना(एकनाथ शिंदे) लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद से इतरा रहे हैं। साझेदारी में 60-80 सीटों तक का सपना देख रहे हैं। भाजपा की अंदरुनी समस्या भी बढ़ी है। लोकसभा चुनाव के बाद गुटबाजी भी बढ़ी है। हालांकि, महाराष्ट्र में बजट से पहले भाजपा ने राज्य के खजाने का मुंह खोल दिया है। युवा, महिला, बेरोजगार, किसान सबको लुभाने में जुट गई है। दूसरे झारखंड में हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद उनकी पार्टी का जमीनी ग्राफ बढ़ रहा है। हरियाणा से नतीजे महाराष्ट्र से भी खराब आ रहे हैं।
मायावती को सब छोड़ गए, लेकिन भतीजा आनंद है उनके पास
2019 में बसपा के 10 सांसद लोकसभा में थे। 2024 में कोई नहीं है। उ.प्र. विधानसभा चुनाव 2022 में केवल एक विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचा था। राज्यसभा में इकलौते सदस्य रामजी गौतम बचे हैं। यहां तक कि पासी, कोईरी, कुर्मी, पटेल, मुसहर, नोनिया, धोनिया, काछी, कहार समेत तमाम जातियां भी धीरे-धीरे खिसक गई हैं। सबसे बड़ा खतरा तो पार्टी के राष्ट्रीय बने रहने पर मंडरा रहा है। बसपा के बचे खुचे नेता बोलते नहीं, लेकिन दबी जुबान से मायावती को ही जिम्मेदार भी ठहराते हैं। बिजनौर 2024 के प्रत्याशी चौधरी विजेन्द्र सिंह ने तो हाल ही बसपा छोड़ दी। बसपा के एक और नेता हैं। कहते हैं कि बसपा में बचा ही क्या? बस मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद। आकाश भी मासूम हैं। जब चाहती हैं बहन जी उन्हें अपरिपक्व बना देती हैं और जब चाहती हैं परिपक्व बनाकर ताजपोशी कर देती हैं।
राहुल गांधी के जोश का राज क्या है?
राहुल गांधी का सचिवालय इन दिनों काफी उत्साह में है। नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से राहुल गांधी के भी तेवर देखने के लायक हैं। सुनील कानूगोलू भी काफी प्रसन्न हैं। राहुल गांधी के सोशल मीडिया को देखने वाली टीम लगातार मिल रहे नतीजे से उत्साहित है। यही हाल कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा की टीम का भी है। फिलहाल प्रियंका की टीम केरल के वायनाड़ में जड़े जमा रही है। दोनों नेताओं को उनकी टीम हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और यदि चुनाव हुए तो जम्मू-कश्मीर में इंडिया गठबंधन की सरकार बनने का भरोसा दे रही है। शिवसेना के नेता संजय राऊत भी कहते हैं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ऐसा ही होने वाला है। राहुल गांधी की टीम में काम कर रहे सूत्र की माने तो जोश के लिए आखिर क्या चाहिए? वह कहते हैं कि हमेशा दिन एक जैसा नहीं रहता है। यह तो समय का पहिया है, घूमता रहता है।