{"_id":"5aaa41774f1c1bc1758b5948","slug":"rahul-gandhi-meets-sharad-pawar-yesterday-evening-for-mahagathbandhan-front-against-bjp","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शरद पवार से मिले राहुल गांधी, 'महागठबंधन' को लेकर चर्चा तेज","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
शरद पवार से मिले राहुल गांधी, 'महागठबंधन' को लेकर चर्चा तेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 15 Mar 2018 03:18 PM IST
विज्ञापन
Rahul Gandhi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस पार्टी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए धीरे-धीरे महागठबंधन की ओर बढ़ती जा रही है। पिछले दिनों जहां यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भविष्य की योजना को लेकर राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को रात्रि भोज पर बुलाया वहीं राहुल गांधी भी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी( एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की है।
शरद पवार से मुलाकात को राजनीति के जानकार 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्दे नजर ही देख रहे हैं। यह मुलाकात बुधवार को बिहार और उत्तर प्रदेश के उपचुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पवार के आवास पर हुई।
सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने 2019 के आम चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकता के सूत्र में बांधने के मुद्दे पर चर्चा की। इससे एक दिन पहले इसी मकसद से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष को डिनर पर बुलाया था, जिसमें 20 पार्टियों के नुमाइंदे शामिल हुए थे।
विज्ञापन
समझा जाता है कि राहुल जल्दी ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से भी मिलने वाले हैं। बनर्जी 28 मार्च को पवार द्वारा आहूत संयुक्त विपक्षी नेताओं की बैठक में भी शामिल होने वाली हैं। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का गढ़ कहे जा रहे फूलपुर में भाजपा की करारी हार के बाद उसके खिलाफ साझा मोर्चा बनाने की मांग ने जोर पकड़ा है।
गोरखपुर और फूलपुर में सपा-बसपा के उम्मीदवार को समर्थन नहीं देने और अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए कांग्रेस की तीखी आलोचना हो रही है। इन दोनों सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है।
विज्ञापन
शरद पवार से मुलाकात को राजनीति के जानकार 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्दे नजर ही देख रहे हैं। यह मुलाकात बुधवार को बिहार और उत्तर प्रदेश के उपचुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पवार के आवास पर हुई।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने 2019 के आम चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकता के सूत्र में बांधने के मुद्दे पर चर्चा की। इससे एक दिन पहले इसी मकसद से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष को डिनर पर बुलाया था, जिसमें 20 पार्टियों के नुमाइंदे शामिल हुए थे।
विज्ञापन
समझा जाता है कि राहुल जल्दी ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से भी मिलने वाले हैं। बनर्जी 28 मार्च को पवार द्वारा आहूत संयुक्त विपक्षी नेताओं की बैठक में भी शामिल होने वाली हैं। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का गढ़ कहे जा रहे फूलपुर में भाजपा की करारी हार के बाद उसके खिलाफ साझा मोर्चा बनाने की मांग ने जोर पकड़ा है।
गोरखपुर और फूलपुर में सपा-बसपा के उम्मीदवार को समर्थन नहीं देने और अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए कांग्रेस की तीखी आलोचना हो रही है। इन दोनों सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है।
Congress President Rahul Gandhi met NCP Chief Sharad Pawar yesterday evening. (file pics) pic.twitter.com/4RovVuA72r
— ANI (@ANI) March 15, 2018
sonia gandhi
वहीं बीजेपी की बढ़ती साख से घबराए विपक्षी दलों में महागठबंधन को लेकर सुगबुगाहट तो लंबे समय से चल रही है लेकिन जैसे- जैसे 2019 करीब आ रहा है पार्टियों के अध्यक्षों का मिलना जुलना भी तेज हो रहा है। मंगलवार को 10 जनपथ पर हुई बैठक में जहां विपक्षी दलों ने अगले आम सभा चुनाव में भाजपा को पटखनी देने के लिए संयुक्त मोर्चा के गठन पर बात की।
वहीं समविचारी गठबंधनों को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी महागठबंधन की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि देश में अघोषित आपातकाल से भी बदतर स्थिति बनी हुई है।
पिछले दिनों हुई सोनिया गांधी की डिनर डिप्लोमेसी को विपक्षी दल भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। लेकिन यहां बताना महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस रात्रि भोज में तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट भी सुनाई दी थी लेकिन ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती की अनुपस्थिति ने इसे थोड़ा कमजोर कर दिया था।
वहीं समविचारी गठबंधनों को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी महागठबंधन की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि देश में अघोषित आपातकाल से भी बदतर स्थिति बनी हुई है।
पिछले दिनों हुई सोनिया गांधी की डिनर डिप्लोमेसी को विपक्षी दल भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। लेकिन यहां बताना महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस रात्रि भोज में तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट भी सुनाई दी थी लेकिन ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती की अनुपस्थिति ने इसे थोड़ा कमजोर कर दिया था।
मान्यवर कांशीराम एक महान समाज सुधारक थे। दबी हुई सामाजिक शक्तियों को राजनीति और परिवर्तन की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनके अथक संघर्षों ने भारतीय राजनीति पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उनकी जयंती पर उन्हें सादर नमन।
— Office of RG (@OfficeOfRG) March 15, 2018