CWC की बैठक में उठी राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग पर फैसला फिलहाल नहीं
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देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी की बागडोर अब जल्द ही बदलाव की ओर जाती दिख रही है, इसकी बानगी उस समय देखने को मिली जब कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी की जगह उनके पुत्र और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता की। बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी अस्वस्थता के कारण बैठक में सम्मिलित नहीं हो सकीं।
तमाम दिग्गजों के बीच राहुल ने सत्तारूढ़ केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से हो रही फायरिंग और ओआरओपी जैसे मुद्दों पर सरकार की नाकामियों को प्रमुखता से उठाया।
कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यालय में आयोजित बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी महासचिव जनार्दन मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर जैसे तमाम दिग्गज मौजूद रहे।
वहीं बैठक के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग भी उठी। वरिष्ठ नेताओं ने भी इसका समर्थन किया। हालांकि अध्यक्ष सोनिया गांधी की अनुपस्थिति के कारण इस पर अंतिम रूप से तो कोई निर्णय नहीं हो सका।
बैठक के बाद वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि इसको लेकर भावनाएं दृढ़ता और सर्वम्मति से व्यक्त हुईं। सीडब्लूसी का भी मानना है कि राहुल गांधी को अब कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी संभाल लेनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय अध्यक्षा सोनिया गांधी को लेना है। दूसरी ओर चर्चा इस बात की भी रही कि राहुल गांधी को पार्टी की जिम्मेदारी तो दी जाए लेकिन फिलहाल आगामी चुनावों को देखते हुए नेतृत्व में फेरबदल ठीक नहीं होगा।
It was the first time that this sentiment was strongly & unanimously expressed. Final decision has to be that of the President: AK Antony
— ANI (@ANI_news) November 7, 2016
It's high time that Congress must mobilise all its forces to fight against the dictatorial rule of Modi Govt: AK Anthony, Congress pic.twitter.com/A0GFzl4izp
— ANI (@ANI_news) November 7, 2016
बैठक में मौजूद रहे मनमोहन सिंह समेत तमाम बड़े नेता
इससे पूर्व कार्यसमिति को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। कहा सरकार पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर जैसे अहम मुद्दों पर निपटने में नाकाम दिख रही है।
ओआरओपी के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार की संवेदनहीनता के कारण अभी तक जवानों को ओआरओपी का लाभ नहीं मिल पा रहा है यही कारण है कि जवानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार की आलोचना करने पर न्यूज चैनलों को बैन किया जा रहा है।
विपक्ष के नेता विरोध करने सड़कों पर उतरते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। बैठक के दौरान अन्य नेताओं ने भी कार्यसमिति को संबोधित किया।