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राहुल का मोदी सरकार पर करारा हमला, कहा- केंद्रीय सेवाओं में संघ की पसंद के अफसरों के भर्ती की योजना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 22 May 2018 04:41 PM IST
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राहुल गांधी
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। राहुल ने सरकार पर केंद्रीय सेवाओं में आरएसएस की पसंद के अधिकारियों की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की संरचना के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने छात्र समुदाय से उठ खड़े होने की अपील की है क्योंकि उनका भविष्य 'खतरे' में है।
राहुल गांधी ने ट्विटर पर सरकार का एक पत्र भी साझा किया जिसके मुताबिक एक जांच की योजना है। सरकार के पत्र में लिखा है, "सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर चुने गए प्रोबेशनरों को सेवा आवंटन/कैडर आवंटन फाउंडेशन कोर्स के बाद किया जाना चाहिए"।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा, "छात्रों उठ खड़े हो, आपका भविष्य खतरे में है। आरएसएस वह चाहता है, जो आपका अधिकार है। नीचे दिया गया पत्र परीक्षा रैंकिंग के बजाय व्यक्तिपरक मानदंडों का उपयोग करके योग्यता सूची में हेरफेर कर केंद्रीय सेवाओं में आरएसएस की पसंद के अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए प्रधान मंत्री की योजना का खुलासा करता है।"
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राहुल गांधी ने ट्वीट के साथ हैशटैग के रूप में #ByeByeUPSC भी लिखा है। राहुल गांधी का यह ट्वीट प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से 17 मई को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) को लिखे एक पत्र के बाद आया है। इस पत्र में पीएमओ ने यूपीएससी को फाउंडेशन कोर्स के नंबरों के आधार पर चयनित आवेदकों को कैडर देने का सुझाव दिया है।
अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री मोदी चाहते हैं कि आरएसएस अपनी पसंद के अधिकारियों का चयन करे। हालांकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के साझा किए गए आधिकारिक दस्तावेज में आरएसएस का कोई उल्लेख नहीं था।
आधिकारिक बयान के मुताबिक पीएमओ ने संबंधित विभाग से यह जांचने के लिए कहा था कि फाउंडेशन कोर्स के पूरा होने के बाद सेवाओं को आवंटित किया जा सकता है या नहीं।
लगभग सभी सेवाओं के अधिकारियों के लिए फाउंडेशन कोर्स की अवधि तीन महीने है।
अभी तक यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर चुने गए उम्मीदवारों को विभिन्न सेवाओं का आवंटन फाउंडेशन कोर्स शुरू होने से पहले किया जाता है।
सफल उम्मीदवारों को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस जैसे कैडर आवंटित होने के बाद उनका लाल बहादुर शास्त्री अकादमी में उनका फाउंडेशन कोर्स होता है।
कार्मिक मंत्रालय द्वारा विभिन्न कैडर-नियंत्रण प्राधिकरणों को भेजी गई सूचना के मुताबिक, अब पीएमओ चाहता है कि इसकी जांच की जाए कि क्या परीक्षा के आधार पर चुने गए प्रोबेशनरों को सेवा आवंटन/कैडर आवंटन फाउंडेशन कोर्स को फाउंडेशन कोर्स के बाद किया जा सकता है।
यूपीएससी विभिन्न केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों को चुनने के लिए तीन चरणों प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार में सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने छात्र समुदाय से उठ खड़े होने की अपील की है क्योंकि उनका भविष्य 'खतरे' में है।
राहुल गांधी ने ट्विटर पर सरकार का एक पत्र भी साझा किया जिसके मुताबिक एक जांच की योजना है। सरकार के पत्र में लिखा है, "सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर चुने गए प्रोबेशनरों को सेवा आवंटन/कैडर आवंटन फाउंडेशन कोर्स के बाद किया जाना चाहिए"।
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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा, "छात्रों उठ खड़े हो, आपका भविष्य खतरे में है। आरएसएस वह चाहता है, जो आपका अधिकार है। नीचे दिया गया पत्र परीक्षा रैंकिंग के बजाय व्यक्तिपरक मानदंडों का उपयोग करके योग्यता सूची में हेरफेर कर केंद्रीय सेवाओं में आरएसएस की पसंद के अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए प्रधान मंत्री की योजना का खुलासा करता है।"
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Rise up students, your future is at risk! RSS wants what’s rightfully yours. The letter below reveals the PM’s plan to appoint officers of RSS’s choice into the Central Services, by manipulating the merit list using subjective criteria, instead of exam rankings. #ByeByeUPSC pic.twitter.com/VSElwErKqe
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) 22 May 2018
राहुल गांधी ने ट्वीट के साथ हैशटैग के रूप में #ByeByeUPSC भी लिखा है। राहुल गांधी का यह ट्वीट प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से 17 मई को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) को लिखे एक पत्र के बाद आया है। इस पत्र में पीएमओ ने यूपीएससी को फाउंडेशन कोर्स के नंबरों के आधार पर चयनित आवेदकों को कैडर देने का सुझाव दिया है।
अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री मोदी चाहते हैं कि आरएसएस अपनी पसंद के अधिकारियों का चयन करे। हालांकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के साझा किए गए आधिकारिक दस्तावेज में आरएसएस का कोई उल्लेख नहीं था।
आधिकारिक बयान के मुताबिक पीएमओ ने संबंधित विभाग से यह जांचने के लिए कहा था कि फाउंडेशन कोर्स के पूरा होने के बाद सेवाओं को आवंटित किया जा सकता है या नहीं।
लगभग सभी सेवाओं के अधिकारियों के लिए फाउंडेशन कोर्स की अवधि तीन महीने है।
अभी तक यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर चुने गए उम्मीदवारों को विभिन्न सेवाओं का आवंटन फाउंडेशन कोर्स शुरू होने से पहले किया जाता है।
सफल उम्मीदवारों को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस जैसे कैडर आवंटित होने के बाद उनका लाल बहादुर शास्त्री अकादमी में उनका फाउंडेशन कोर्स होता है।
कार्मिक मंत्रालय द्वारा विभिन्न कैडर-नियंत्रण प्राधिकरणों को भेजी गई सूचना के मुताबिक, अब पीएमओ चाहता है कि इसकी जांच की जाए कि क्या परीक्षा के आधार पर चुने गए प्रोबेशनरों को सेवा आवंटन/कैडर आवंटन फाउंडेशन कोर्स को फाउंडेशन कोर्स के बाद किया जा सकता है।
यूपीएससी विभिन्न केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों को चुनने के लिए तीन चरणों प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार में सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है।