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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Raguram's teacher imparting education to tribals

रघुराम राजन के गुरु आलोक दे रहे आदिवासियों को शिक्षा 

Tue, 13 Sep 2016 08:21 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 13 Sep 2016 08:21 PM IST
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Raguram's teacher imparting education to tribals
आलोक सागर

वो चाहते तो ऐश की जिंदगी बसर कर सकते थे, लेकिन उन्होंने गांव में रहकर ही आदिवासियों को शिक्षा देने की ठानी। जी हां! हम बात कर रहे हैं रघुराम राम के गुरु आलोक सागर की।

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आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई पूरी कर फिर वहीं प्रोफेसर के तौर पर काम कर चुके नई दिल्ली निवासी आलोक सागर ने आदिवासियों का जीवन संवारने का प्रण लिया और होशंगाबाद में आदिवासियों के गांव कोचामू के होकर रह गए।
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आलोक ने आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया, फिर 1973 में यहीं से मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद वह पीएचडी करने के लिए टेक्सास की ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी चले गए। 
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भारत लौटने से पहले उन्होंने दो साल तक यूएस में जॉब भी की, फिर 1980-81 में वापस भारत आकर दिल्ली आईआईटी में एक साल पढ़ाया। 

रघ्‍ाुराम रहे हैं उनके छात्र

Raguram's teacher imparting education to tribals
raghuram rajan

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर के तौर पर काम कर चुके आलोक ने अनेकों छात्रों को पढ़ाया, पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन भी उनमें से एक हैं। वहां से इस्तीफा देने के बाद आलोक ने मध्य प्रदेश के बेतूल और होशंगाबाद जिले में रहने वाले आदिवासियों के लिए काम करना शुरू किया।

पिछले 26 सालों से आलोक आदिवासी बहुल गांव कोचामू में रह रहे हैं।

करीब 750 की आबादी वाले इस गांव में बस एक प्राइमरी स्कूल है, इसके अलावा यहां ना तो बिजली है और ना ही सड़कें। आदिवासी बच्चों को पढ़ाना और पौधों की देखरेख करना उनकी दिनचर्या में शामिल है।
 

सिर्फ 3 जोड़ी कुर्ते और एक साइकिल है जमापूंजी

Raguram's teacher imparting education to tribals
आलोक
पैरों में रबड़ की चप्पलें, हाथ में झोला, उलझे हुए बाल, कोई कह ही नहीं सकता कि ये वही व्यक्ति है जिसे अंग्रेजी सहित कई विदेशी भाषाएं आतीं हैं। कभी देश के लिए आईआईटियन तैयार करने वाले आलोक के पास आज जमापूंजी के नाम पर 3 जोड़ी कुर्ते और एक साइकिल है।

वो जिस घर में रह रहे हैं, उसमें दरवाजे तक नहीं हैं। आलोक ने इस इलाके में 50 हजार से ज्यादा पौधे लगाए। उनका मानना है कि देश की सेवा करने के लिए हमें जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।

आलोक ने कहा कि भारत में लोग कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, मगर हर कोई डिग्री दिखाकर अपनी योग्यता साबित करने में लगा है, ना कि लोगों की सेवा करने में। उनके बारे में लोगों को तब जानकारी हुई, जब बेतूल में हुए उपचुनाव के दौरान पुलिस ने उन्हें वैरीफिकेशन के नाम पर थाने बुलवा लिया। मगर उनकी क्वालिफिकेशन देखकर सभी हैरान रह गए। 
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