राफेल पर रार: फिर शुरू हुई राजनीति, 'शेरपा' ने संसद के मानसून सत्र से पहले ही करा दिया बवाल
कांग्रेस के हाथ में फिर राफेल का तीर आ गया है। आगामी मानसून सत्र में इससे वह सत्तापक्ष पर प्रहार करेगी। इसकी भूमिका बन गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में 'राफेल' को लेकर फिर से राजनीति शुरू हो गई है। जैसे ही यह खबर बाहर आई कि फ्रांस ने भारत को बेचे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की डील में भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए एक जज की नियुक्ति की है, राजनीतिक दल सक्रिय हो उठे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्वीटर पर लिखा, 'चोर की दाढ़ी'। इसके नीचे हैशटैग राफेल स्कैम लिखा था।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा, फ्रांस की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रथम दृष्टया राफेल सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। फ्रांस में भ्रष्टाचार पर जांच शुरू हुई है। पूर्व राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलां, मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो की भूमिका की भी जांच होगी। ऐसे में कांग्रेस पार्टी राफेल पर जेपीसी जांच की मांग करती है।
एनजीओ शेरपा ने की थी शिकायत
फ्रांस के एनजीओ 'शेरपा', जो वित्तीय अपराध पर नजर रखता है, ने अन्य आरोपों के बीच 'भ्रष्टाचार' और 'पद के दुरुपयोग' से जुड़ी एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद राफेल सौदे की जांच के लिए एक जज को नामित किया गया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 19 जुलाई से शुरु होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले ही शेरपा ने भारत के विपक्षी दलों के हाथों में हथियार दे दिया है।
बता दें कि शेरपा ने 2018 के दौरान भी इस सौदे की जांच की मांग की थी, लेकिन पीएनएफ ने कोई कार्रवाई नहीं की। अपनी पहली शिकायत में, एनजीओ ने इस तथ्य की निंदा की थी कि राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट ने अरबपति अनिल अंबानी की अध्यक्षता वाले रिलायंस समूह को अपने भारतीय भागीदार के रूप में चुना, जो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी हैं।
राहुल ने कई सभाओं में लगाया था आरोप
भारत में यह मामला कई बार उछल चुका है। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले विपक्षी दलों खासतौर से कांग्रेस पार्टी ने इसे चुनाव प्रचार में मुख्य मुद्दे के तौर पर उठाया था। राहुल गांधी ने अपनी सभी जनसभाओं में कहा था कि राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार हुआ है। पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के साइन वाले दस्तावेज भी सार्वजनिक किए गए। कांग्रेस पार्टी ने उस वक्त कहा था कि राफेल डील में पीएमओ द्वारा हस्तक्षेप किया गया है। ऐसी डील के लिए फाइल आगे जाने के जो नियम तय किए गए थे, उन्हें दरकिनार किया गया है।
पिछले साल बिचौलिये को 9.5 करोड़ रुपये देने का आरोप लगा था
राहुल गांधी ने गत अप्रैल में राफेल सौदे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। गांधी ने इसके लिए, फ्रांसीसी मीडिया की एक खबर को आधार बनाया था। उसमें दावा किया गया था कि इस डील में एक बिचौलिये को 11 लाख यूरो (करीब 9.5 करोड़ रुपये) का भुगतान किया गया है। राहुल ने कहा, व्यक्ति जो कर्म करता है उसका फल सामने आ जाता है। इससे कोई बच नहीं सकता।
रणदीप सुरजेवाला ने उस वक्त कहा, फ्रांस के एक समाचार पोर्टल ने अपने नए खुलासे से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के इस रुख को सही साबित किया है कि राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले में मोदी सरकार को बड़ी राहत दी थी।
सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकी सभी याचिकाएं
सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकी सभी याचिकाएं
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने राफेल मामले में दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने 14 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को वैध मानते हुए 14 दिसंबर, 2018 के अपने फैसले को बरकरार रखा था। सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी की दलीलों को खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'हमें नहीं लगता कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की कोई जरूरत है।'
अब संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे के फिर उछलने की पूरी संभावना है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि इस मामले में अब जेपीसी गठित की जाए। फ्रांसीसी मीडिया जर्नल मीडियापार्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने कहा, राहुल गांधी ने इससे पहले जो कुछ कहा था, वह सच था। राफेल की खरीद में भ्रष्टाचार हुआ है।
मोदी सरकार और 'जानेमन' डील स्पष्ट हुई
सुरजेवाला ने फ्रांस की वेबसाइट 'मीडियापार्ट' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला है। सुरजेवाला ने कहा कि रिलायंस-डसॉल्ट डील के सारे सबूत सार्वजनिक कर दिए गए हैं। मोदी सरकार और 'जानेमन' डील (राफेल डील) अब साफ हो गई है। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब संयुक्त संसदीय समिति की जांच की अनुमति देंगे।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीटर पर लिखा, 'भारतीय वायु सेना को 200 से 300 जेट की जरूरत थी, लेकिन उसने अपनी जरूरतें 126 से 36 विमान पर कैसे सिमटा दीं। भाजपा ने विमानों की संख्या क्यों घटाई।' भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने उक्त आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा, राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं।