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INS Vikrant: आईएनएस विक्रांत के लिए राफेल-मरीन का उड़ान परीक्षण, जानिए इसके बारे में सबकुछ
Wed, 02 Feb 2022 07:49 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 02 Feb 2022 07:49 PM IST
सार
भारतीय नौसेना द्वारा 44,000 टन के आईएनएस विक्रांत पर तैनाती के लिए संभावित खरीद के लिए इन दोनों का मूल्यांकन किया जा रहा है। आईएनएस विक्रांत का अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में परीक्षण चल रहा है और यह अगस्त से सेवा में आ सकता है।
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INS VIKRANT
- फोटो : ANI
विस्तार
फ्रांस निर्मित लड़ाकू विमान राफेल के समुद्री संस्करण बुधवार को सफल परीक्षण किया गया। गोवा में हुए सफल उड़ान परीक्षण की जानकारी देते हुए एक शीर्ष राजनयिक ने बताया कि इसके लिए परिस्थितियां ठीक वैसी ही बनाई गई थीं, जैसी देश में विकसित विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर होती हैं।
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दरअसल, राफेल-एम की प्रतिस्पर्धा अमेरिका निर्मित सुपर हॉर्नेट से है। भारतीय नौसेना द्वारा 44,000 टन के आईएनएस विक्रांत पर तैनाती के लिए संभावित खरीद के लिए इन दोनों का मूल्यांकन किया जा रहा है। आईएनएस विक्रांत का अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में परीक्षण चल रहा है और यह अगस्त से सेवा में आ सकता है।
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भारत में फ्रांस के राजदूत एमैनुअल लेनैं ने मंगलवार शाम को कहा था कि राफेल मरीन की भारत के विमान वाहक पोत से उड़ान भरने की क्षमता देखने के लिए परीक्षण किए गए और ये अच्छे रहे। भारत के नए विमान वाहक पोत को ‘स्की-जंप’ लांच शिप की तरह डिजाइन किया गया है जिससे कोई विमान इसकी गति की मदद से उड़ान भर सकता है और यह अन्य विमान वाहक पोतों से अलग है जो विमान के उड़ान भरने के लिए कैटापुल्ट लांच नामक उपकरण या तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।
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लेनैं ने कहा कि राफेल-एम विमान का पिछले महीने 12 दिन तक गोवा के आईएनएस हंसा केंद्र से परीक्षण किया गया और इसके लिए 283 मीटर की कृत्रिम स्की-जंप सुविधा का इस्तेमाल किया गया। बोइंग के सुपर हॉर्नेट या एफ/ए-18 विमानों को भी भारत को बेचने के लिए पेशकश की जा रही है और अगले महीने इनका भी आईएनएस हंसा पर इस तरह का परीक्षण हो सकता है।