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Protest: RAF ने छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग की बात मानी; अफसरों-कार्मिकों को चेतावनी दी, BSF ने भी दिए आदेश

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 25 Jul 2026 02:18 PM IST
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RAF admits to using excessive force against students, issues warnings to officers-personnel; BSF also issues o
छात्रों के प्रदर्शन RAF का अनावश्यक बल प्रयोग - फोटो : ANI
दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सीआरपीएफ की विशेष इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने यह बात मानी है कि छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है। आरएएफ आईजी ने अपने अधिकारियों और कार्मिकों को चेतावनी दी है कि वे भविष्य में इस बात का ध्यान रखें कि आरएएफ का मूल सिद्धांत है 'संवेदनशील पुलिसिंग'। प्रत्येक परिस्थिति में बल का प्रयोग केवल आवश्यक सीमा तक न्यायोचित, निष्पक्ष, संयमित और संवदेनशील तरीके से किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो दिखाई पड़ रहे हैं, जिनमें आरएएफ जवानों द्वारा भीड़ से अलग खड़े छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया है।
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बता दें कि दिल्ली पुलिस और आरएएफ पर छात्रों एवं राजनीतिक पार्टियों द्वारा प्रदर्शन के दौरान कठोर कार्रवाई के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरएएफ द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल करना, ये मुद्दा भी गर्मा गया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इससे इनकार किया है। सीआरपीएफ की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो बताए जा रहे हैं, जिनमें छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया है। इससे कई छात्र घायल हुए हैं। शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पैलेट गन को लेकर सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने एक प्रदर्शनकारी को मीडिया के सामने पेश किया, जिसे पैलेट गन के छर्रे लगे हुए थे। 
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जानबूझकर व्यक्तियों को गिराया गया
आरएएफ आईजी की तरफ से जारी निर्देशों में कहा गया है कि इस बल को अपना मूल सिद्धांत है 'संवेदनशील पुलिसिंग' नहीं भूलना चाहिए। चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, बल का प्रयोग आवश्यक सीमा तक ही और न्यायोचित तरीके से किया जाए। बल प्रयोग के दौरान कार्मिकों का संयमित और संवदेनशील तरीका हो, इसका कड़ाई से पालन हो। आईजी के निर्देशों में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो दिखाई पड़ रहे हैं, जिनमें आरएएफ जवानों द्वारा भीड़ से अलग खड़े छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया है। इसमें जानबूझकर व्यक्तियों को गिराना, बैरिकेड से बाहर जा रहे लोगों पर प्रहार करना आदि शामिल है। ये घटनाएं आरएएफ की स्थापित कार्य संस्कृति एवं छवि के खिलाफ हैं।
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निर्धारित मानकों व ट्रेनिंग के अनुरूप नहीं कार्रवाई
आरएएफ आईजी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, इस तरह की कार्रवाई को न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। भविष्य में प्रत्येक कार्मिक को बताया जाए कि आरएएफ की पहचान अनुशासित, निष्पक्ष, संयमित और संवेदनशील पुलिसिंग है। इन बातों का पालन सुनिश्चित किया जाए। आईजी ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि 20 जुलाई को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान आरएएफ का तरीका निर्धारित मानकों एवं ट्रेनिंग के अनुरूप नहीं था। प्रत्येक अधिकारी और कार्मिक, भीड़ की प्रकृति एवं परिस्थितियों का अच्छे से आंकलन करते हुए यह निर्धारित करें कि उन्हें बल प्रयोग का कौन सा तरीका अपनाना है। 

'अधिकारी-कार्मिक मीडिया को बाइट न दें'
बल प्रयोग से पहले चेतावनी, उसके बाद परिस्थितियों को देखकर दूसरे साधन जैसे लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य स्वीकृत भीड़ नियंत्रण उपायों का ही उपयोग किया जाए। अनावश्यक अथवा असंगत बल प्रयोग न करें। आईजी ने कहा, आरएएफ का कोई भी अधिकारी/कार्मिक मीडिया को बाइट न दे। कोई टिप्पणी न करे। वॉट्सऐप समूहों से दूर रहें। संदेशों का आदान प्रदान न किया जाए। इस तरह के मामले को अनुशासनहीनता माना जाएगा। सभी कमांडेंट को निर्देशित एवं चेताया गया गया है कि वे अपने अधीनस्थ समस्त अधिकारियों एवं कार्मिकों को उक्त निर्देशों से अवगत कराएं। सोशल मीडिया पर जानकारी साझा न करें। 

बीएसएफ ने भी जारी की हिदायतें
मुख्यालय की तरफ से कहा गया है कि सीजेपी के साथ छात्रों द्वारा जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। कई दूसरे राज्यों में भी छात्रों द्वारा धरना प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में बल के समस्त समवाय एवं सीमा चौकी प्रभारी को निर्देश दिया जाता है कि उनके कार्यक्षेत्र में यदि उपरोक्त धरना प्रदर्शन के संबंध में स्थानीय पुलिस/अन्य सहयोगी एजेंसियों द्वारा कानून व्यवस्था की ड्यूटी के लिए बल की मांग की जाती है, तो वाहिनी कमांडेंट की पूर्व अनुमति के बिना जवानों की किसी भी प्रकार की तैनाती नहीं की जाएगी। सशस्त्र सीमा बल की एक उप-निरीक्षक द्वारा सीजेपी के संदर्भ में सोशल मीडिया पर टिप्पणी की गई कि 'मैं जंतर मंतर पर नहीं आ सकती हूँ, परन्तु मेरा सीजेपी तथा छात्रों के मूवमेंट को समर्थन है', इस तरह की टिप्पणियों से बचें। इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे केस में निलंबन हो सकता है। सभी अधिकारी अपने कार्मिकों को निर्देशित करें कि वे सोशल मीडिया पर सीजेपी के समर्थन या विरोध में किसी भी प्रकार की टिप्पणी/पोस्ट/शेयर न करें। सेवा नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


दिल्ली में तैनात हैं केंद्रीय बलों की 45 कंपनियां
कॉकरोच जनता पार्टी और विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर दिल्ली पुलिस की मांग पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों की 45 कंपनियों को दिल्ली में तैनात करने की मंजूरी दी थी। ये सभी 45 कंपनियां 27 जुलाई तक दिल्ली में तैनात रहेंगी। सीएपीएफ की इन कंपनियों से कहा गया है कि वे सभी प्रकार के अत्याधुनिक दंगा रोधी उपकरणों, ओपी स्केल आर्म्स व गोला बारूद से लैस रहें। सीआरपीएफ 24, आरएएफ 15, बीएसएफ तीन, आईटीबीपी एक और एसएसबी की दो कंपनियां दिल्ली में तैनात हैं। केंद्रीय बलों में सीआरपीएफ और आरएएफ की सबसे ज्यादा तैनाती की गई है। इनकी 39 कंपनियों को तैनात किया गया है। 
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