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हैदराबाद मुठभेड़ पर उठे कई सवाल, वारांगल में पहले भी वाहवाही लूट चुके हैं पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार

Fri, 06 Dec 2019 07:12 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 06 Dec 2019 07:12 PM IST
सार

  • उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह बोले बिल्कुल अप्रोफेशनल तरीका
  • बीपीआरएंडडी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पुलिस मैनुअल्स के खिलाफ है कार्रवाई

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Questions raised on Cyberabad Police commissioner VC sajjanar in Hyderabad Encounter case
हैदराबाद कांड के आरोपी ढेर - फोटो : PTI

विस्तार

हैदराबाद में पुलिस ने वेटनरी डॉक्टर (Veterinary Doctor) प्रियंका रेड्डी के बलात्कार के आरोपियों को कथित मुठभेड़ में मार गिराया है। देश भर में इसकी तारीफ हो रही है, लेकिन देश के जाने-माने पुलिस अधिकारी इस घटना पर सवाल उठा रहे हैं। इतिहास में देखें तो इस घटना के हीरो के रूप में पेश किए जा रहे 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार के इतिहास से यह घटना मेल खाती है। 2008 में भी उन्होंने तेजाब हमले की शिकार हुई इंजीनियरिंग की छात्रा के मामले में इसी तरह से आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराया था।
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पूरी तरह से अनप्रोफेशनल तरीका

उ.प्र. के पूर्व डीजीपी और बीएसएफ के डीजी रहे प्रकाश सिंह ने हैदराबाद की घटना पर गंभीर सवाल उठाया है। प्रकाश सिंह का कहना है कि हैदराबाद पुलिस का मुठभेड़ करने यह तरीका पूरी तरह से अनप्रोफेशनल है। प्रकाश सिंह ने कहा कि जब भी पुलिस क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए आरोपी को लेकर जाती है, तो कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।

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मसलन हर आरोपी की पूरी तरह से फिजिकल जांच-पड़ताल की जाती है कि कहीं वह अपने साथ कुछ हथियार या रसायन या कुछ ऐसी सामग्री तो नहीं लिए हुए है। क्राइम सीन रीक्रिएशन वाले स्थान को लेकर सावधानी, इससे जुड़ी सूचना को लेकर सावधानी बरती जाती है।

आरोपियों को ले जाने वाले पुलिस कर्मियों की संख्या, वाहन आदि पर भी ध्यान दिया जाता है। उन्हें हथकड़ी या पुलिस अभिरक्षा में पूरी तरह से नियंत्रण में रखने के उपायों के साथ ले जाया जाता हैं। ऐसा होने पर आरोपियों की इस तरह की स्थिति पैदा होने की संभावना न के बराबर रहती है। इस दृष्टि से देखें तो हैदराबाद की घटना पूरी तरह से अनप्रोफेशनल तरीका अपनाने की तरफ ईशारा करती है।

दिल्ली के पूर्व ज्वाइंट कमिश्नर आमोद कंठ ने भी इस पर सवाल उठाया है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि पुलिस मैनुअल्स इस तरह की कार्रवाई की इजाजत नहीं देते।

क्या हैं बड़े सवाल?

  • प्रकाश सिंह का कहना है कि हम मानकर चल रहे हैं कि गोली चलाने की स्थिति आई, क्योंकि घटना की तस्वीर अभी साफ नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल है कि गोली चलाने की नौबत क्यों आई?
  • चार आरोपियों को लेकर जाने वाले पुलिस कर्मियों की संख्या कितनी थी? क्या पुलिस ने आरोपियों पर फिजिकल कंट्रोल के लिए सभी सावधानियां बरती थी?
  • क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए कौन सा समय और क्यों चुना गया?
  • आरोपी किस परिस्थिति में और कब पुलिस पार्टी की पकड़ से छूटे, हथियार छीनने का अवसर पाए और हमला करके भागने लगे?
  • क्या पुलिस के पास उस समय केवल गोली चलाने का ही एकमात्र चारा था?  
  • आखिरी सवाल, बलात्कार की घटना रात में हुई थी। घटना वाली जगह सूनसान थी। पुलिस और अन्य को इसकी जानकारी सुबह मिल पाने की सूचना है। बलात्कार के बाद आरोपियों ने युवती को जला दिया था और उसकी मृत्यु हो चुकी थी। घटनास्थल के पास सीसीटीवी जैसा कुछ अन्य निगरानी उपकरण होने की जानकारी नहीं है। ऐसे में कैसे यकीन किया जाए कि जिन्हें पुलिस पुलिस ने बलात्कार, हत्या के आरोप में पकड़ा है, वहीं चार मुख्य या वास्तविक आरोपी थे।

बंदूक से कर देते हैं पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार इंसाफ

पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार जाने माने पुलिस अधिकारी हैं। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट माने जाते हैं। नक्सलियों से लोहा लेने में भी उनका रिकार्ड रहा है। कहा जा रहा है कि उनकी पुलिस सेवा के दौरान हुआ यह तीसरा सबसे चर्चित एनकाऊंटर है। पहला एनकाउंटर 2008 में वारांगल जिले में किया गया था। वहां इंजीनियरिंग की एक छात्रा पर आरोपियों ने तेजाब से हमला कर दिया था। आरोपी श्रीनिवासन छात्रा से एकतरफा प्यार करता था।

छात्रा के इनकार के बाद उसने दो साथियों की मदद से इस घटना को अंजाम दिया था। बताते हैं तब वारांगल में इसे लेकर काफी गुस्सा था। एसपी वीसी सज्जनार ही थे। इस मामले में भी पुलिस ने आरोपी को पकड़ा था और कुछ देर बाद तीनों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। हालांकि इस घटना के बाद भी लोगों ने वीसी सज्जनार की काफी तारीफ हुई थी।

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