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सवाल: उपभोक्ता संरक्षण कानून में शिक्षा, सेवा है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने किया परीक्षण करने का फैसला

Wed, 03 Nov 2021 10:47 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 03 Nov 2021 10:47 PM IST
सार

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने कहा था, शिक्षा सेवा के दायरे में नहीं आती है। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यह केस स्कूल के स्विमिंग पूल में छात्र की मौत से जुड़ा है। 
 

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Question: Is education, service or not in consumer protection law? Supreme Court decided to test
supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत शिक्षा, एक सेवा है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट इसका परीक्षण करने को सहमत हो गई है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्न की पीठ ने पाया कि इसी तरह का एक कानूनी मुद्दा पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके बाद पीठ ने इस मामले को उसी के साथ जोड़ दिया।

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शीर्ष अदालत लखनऊ निवासी राजेंद्र कुमार गुप्ता की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें शिक्षण संस्थान के उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में बाहर रखने के राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश को चुनौती दी गई थी। आयोग ने कहा था कि शिक्षा, जिसमें तैराकी जैसे सह-पाठ्यक्रम संबंधी गतिविधियां शामिल हैं, लेकिन वह सेवा के दायरे में नहीं आतीं। 
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स्कूल के स्विमिंग पूल में डूबने से हुई थी मौत
दरअसल याचिकाकर्ता का बेटा एक स्कूल में पढ़ रहा था। स्कूल ने 2007 में तैराकी सहित विभिन्न 'समर कैंप' की गतिविधियों की पेशकश की और इसके लिए विद्यार्थियों को 1000 रुपये भुगतान करने को कहा था। 28 मई, 2007 को सुबह 9:30 बजे उन्हें स्कूल से फोन कर तुरंत बुलाया गया। स्कूल पहुंचने पर उस व्यक्ति को बताया गया कि उनके बेटे को अस्पताल ले जाया गया है, क्योंकि वह स्कूल के स्विमिंग पूल में डूब गया था। जब वह अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है।
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इसके बाद याचिकाकर्ता ने राज्य उपभोक्ता आयोग में स्कूल पर लापरवाही और सेवा में कोताही की शिकायत की। उन्होंने अपने बेटे की मौत के लिए 22 लाख रुपये के मुआवजे का दावा ठोक दिया। मुकदमे के खर्च के लिए 55 हजार रुपये का अतिरिक्त दावा किया। राज्य उपभोक्ता आयोग ने शिकायत को खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता नहीं है। इस आदेश को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी गई थी। आयोग ने शिक्षा को सेवा नहीं माना था।

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