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Cancer: नहीं बिक सकेंगी कैंसर की नकली दवाएं, क्यूआर कोड होगा अनिवार्य; जानें घटिया दवाओं पर कैसे लगेगी लगाम
Fri, 26 Jun 2026 03:24 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 26 Jun 2026 03:24 AM IST
सार
केंद्र सरकार ने दवाओं की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने और नकली उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग प्रणाली का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियमों के तहत टीके, रोगाणुरोधी, कैंसररोधी तथा मन:प्रभावी दवाओं पर क्यूआर कोड अनिवार्य होगा। इससे उपभोक्ता और नियामक एजेंसियां दवा की पहचान, निर्माता, बैच, निर्माण और समाप्ति तिथि जैसी जानकारी आसानी से सत्यापित कर सकेंगी।
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कैंसर की दवाएं
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
केंद्र सरकार ने नकली और घटिया दवाओं पर अंकुश लगाने के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रणाली का दायरा बढ़ा दिया है। बदले प्रावधानों के तहत सूक्ष्मजीवरोधी, टीके, कैंसररोधी और मन:प्रभावी दवाइयों में क्विक रिस्पॉन्स (क्यूआर) कोड अनिवार्य होगा। दवाओं की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड होने से प्रामाणिकता की जांच और सत्यापन आसान होगा। इससे लोग यह जान सकेंगे कि जिस दवा का सेवन कर रहे हैं, वह घटिया या नकली तो नहीं है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियमावली, 1945 में बदलावों को अधिसूचित किया है। इसके तहत दवाइयों की इन श्रेणियों को अनुसूची एच2 में शामिल किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित प्रावधानों के तहत, विनिर्माताओं को दवा के प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर, या अगर जगह की कमी हो, तो द्वितीयक पैकेजिंग पर, बारकोड या क्यूआर कोड छापना या लगाना होगा। द्वितीयक पैकेजिंग या सहायक पैकेजिंग उत्पाद की पैकेजिंग की वह बाहरी परत होती है जो प्राथमिक पैकेजिंग को सुरक्षित रखती है और इसके तहत कई समान उत्पादों को एक साथ रखा जाता है। यह कोड आपूर्ति शृंखला में सॉफ्टवेयर ऐप के जरिए दवाइयों के प्रमाणन और सत्यापन को संभव बनाएगा।
अगले साल से लागू होंगे नए नियम
उत्पादों का उन्नत पहचान ढांचा दवाओं के प्रमाणीकरण को सुगम बनाएगा और दवा उत्पादों की बेहतर ट्रैकिंग और सत्यापन को सक्षम करेगा। इससे नियामक निगरानी मजबूत करने और बाजार में नकली दवाओं के वितरण को रोकने में मदद मिलेगी। उद्योगों और हितधारकों को कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त समय देने को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने अनुपालन के लिए चरणबद्ध समयसीमा निर्धारित की है। टीकों, मादक और मनोरोग दवाओं तथा कैंसररोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई, 2027, जबकि रोगाणुरोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई, 2028 से प्रभावी होंगे।
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अभी तक सिर्फ 300 दवा उत्पादों पर लागू था यह प्रावधान
मंत्रालय ने कहा, क्यूआर कोड में उत्पाद का पहचान कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, कंपनी का नाम-पता, बैच नंबर, विनिर्माण और उपयोग में लाने की समय सीमा, विनिर्माण लाइसेंस नंबर जैसी सभी जरूरी जानकारी दर्ज होगी। यह नियम पहले शीर्ष 300 फार्मास्युटिकल ब्रांड पर ही लागू था। इसका दायरा बढ़ाते हुए अब इसमें सभी टीके, सूक्ष्मजीवरोधी, कैंसररोधी दवाइयां तथा स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत विनियमित दवाइयां भी शामिल हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियमावली, 1945 में बदलावों को अधिसूचित किया है। इसके तहत दवाइयों की इन श्रेणियों को अनुसूची एच2 में शामिल किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित प्रावधानों के तहत, विनिर्माताओं को दवा के प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर, या अगर जगह की कमी हो, तो द्वितीयक पैकेजिंग पर, बारकोड या क्यूआर कोड छापना या लगाना होगा। द्वितीयक पैकेजिंग या सहायक पैकेजिंग उत्पाद की पैकेजिंग की वह बाहरी परत होती है जो प्राथमिक पैकेजिंग को सुरक्षित रखती है और इसके तहत कई समान उत्पादों को एक साथ रखा जाता है। यह कोड आपूर्ति शृंखला में सॉफ्टवेयर ऐप के जरिए दवाइयों के प्रमाणन और सत्यापन को संभव बनाएगा।
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अगले साल से लागू होंगे नए नियम
उत्पादों का उन्नत पहचान ढांचा दवाओं के प्रमाणीकरण को सुगम बनाएगा और दवा उत्पादों की बेहतर ट्रैकिंग और सत्यापन को सक्षम करेगा। इससे नियामक निगरानी मजबूत करने और बाजार में नकली दवाओं के वितरण को रोकने में मदद मिलेगी। उद्योगों और हितधारकों को कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त समय देने को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने अनुपालन के लिए चरणबद्ध समयसीमा निर्धारित की है। टीकों, मादक और मनोरोग दवाओं तथा कैंसररोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई, 2027, जबकि रोगाणुरोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई, 2028 से प्रभावी होंगे।
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अभी तक सिर्फ 300 दवा उत्पादों पर लागू था यह प्रावधान
मंत्रालय ने कहा, क्यूआर कोड में उत्पाद का पहचान कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, कंपनी का नाम-पता, बैच नंबर, विनिर्माण और उपयोग में लाने की समय सीमा, विनिर्माण लाइसेंस नंबर जैसी सभी जरूरी जानकारी दर्ज होगी। यह नियम पहले शीर्ष 300 फार्मास्युटिकल ब्रांड पर ही लागू था। इसका दायरा बढ़ाते हुए अब इसमें सभी टीके, सूक्ष्मजीवरोधी, कैंसररोधी दवाइयां तथा स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत विनियमित दवाइयां भी शामिल हैं।