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अच्छी खबर: 300+ अस्पतालों में QR कोड आधारित OPD पंजीकरण लागू; पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन से मिलेगी निजात

Mon, 13 Feb 2023 09:24 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 13 Feb 2023 09:24 PM IST
सार

डॉ. बसंत गर्ग ने कहा, हमने एक सिस्टम शुरू किया है जिसमें हमने बड़े सरकारी अस्पतालों में ओपीडी रजिसट्रेशन प्रोसेस को आसान बनाने की कोशिश की है। अब तक 347 अस्पतालों में करीब में 4.06 लाख लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है।

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QR code based OPD registration implemented in over 300 hospitals reducing waiting time drastically
QR Code Alert - फोटो : iStock

विस्तार

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने तीन सौ से ज्यादा सरकारी अस्पतालों में क्यूआर कोड पर आधारित रैपिड ओपीडी रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। इससे प्रतीक्षा का समय पचास मिनट से घटकर चार मिनट हो गया है। 

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एनएचए के अतिरिक्त सीईओ डॉ. बसंत गर्ग ने सोमवार को अपोलो अस्पताल के वार्षिक सम्मेलन 'इंटरनेशनल हेल्थ डॉयलॉग' में यह बात कही। डॉ. गर्ग ने कहा, हमने एक सिस्टम शुरू किया है जिसमें हमने बड़े सरकारी अस्पतालों में ओपीडी रजिसट्रेशन प्रोसेस को आसान बनाने की कोशिश की है। अब तक 347 अस्पतालों में करीब में 4.06 लाख लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है। 
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डॉ. गर्ग ने कहा, दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) और चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) जैसे बड़े सार्वजनिक अस्पतालों में ओपीडी रजिस्ट्रेशन एक बड़ी समस्या है, क्योंकि मरीजों को डॉक्टर को दिखाने से पहले अपना रजिस्ट्रेशन कराने के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। 
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उन्होंने बताया कि इस क्यूआर कोड से हम औसत प्रतीक्षा समय को पचास मिनट से घटाकर चार मिनट तक करने में सक्षम हुए हैं। इससे गर्भवती महिला, बुजुर्गों और रोगियों को सुविधा मिलेगी। एक घंटे कतार में खड़े होना भी एक तकलीफ है। इसके अलावा मरीजों को रजिस्ट्रेशन वाली खिड़की खुलने से दो घंटे पहले अस्पताल में आना पड़ता है। 

यह पहल पिछले साल अक्टूबर में नई दिल्ली में लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) और श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल (एसएसकेएच) के नए ओपीडी ब्लॉक में तेज ओपीडी रजिस्ट्रेशन सर्विस के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई थी और अब इसे 347 अस्पतालों तक बढ़ा दिया गया है।

क्यूआर कोड-आधारित ओपीडी रजिस्ट्रेशन सर्विस मरीजों को अपने मोबाइल फोन (फोन कैमरा/स्कैनर/एबीएचए/आरोग्य सेतु एप्लिकेशन या किसी अन्य एबीडीएम-सक्षम ऐप का उपयोग करके) के साथ अस्पताल के क्यूआर कोड को स्कैन करने और सुविधा के साथ अपने प्रोफाइल डिटेल शेयर करने की अनुमति देती है।  

एक बार प्रोफाइल शेयर होने के बाद अस्पताल एक टोकन नंबर प्रदान करता है। टोकन को रोगी के चयनित ऐप पर एक अधिसूचना के रूप में भेजा जाता है और रोगियों की आसानी के लिए ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर रखी गई स्क्रीन पर भी प्रदर्शित किया जाता है। अपने टोकन नंबर के अनुसार मरीज पंजीकरण काउंटर पर जा सकते हैं और सीधे डॉक्टर के परामर्श के लिए अपनी बाह्य रोगी पर्ची (ओपी पर्ची) ले सकते हैं क्योंकि उनका विवरण पहले से ही पंजीकरण काउंटर पर मौजूद है।


उन्होंने कहा, हमने इसी तरह की बाधाओं की पहचान की है। जब कोई मरीज वास्तव में लेब्रोटरीज की सर्विस के लिए जाता है और उसे वहां कतार में लगना पड़ता है और भुगतान करना पड़ता है। यहां तक कि सबसे अच्छे निजी अस्पतालों में छुट्टी में भी बहुत समय लगता है। हम इन पहलुओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 22 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्य रिकॉर्ड को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खातों (एबीएचए) से डिजिटल रूप से जोड़ा गया है।

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