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Qatar Espionage: सात माह बाद भी स्वदेश नहीं लौटा 8वां पूर्व नेवी अफसर, बहन ने लगाई गुहार, MEA ने बताई ये वजह

Mon, 16 Sep 2024 07:47 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Mon, 16 Sep 2024 07:47 PM IST
सार

26 अक्तूबर 2023 को कतर की अदालत ने जासूसी का आरोप में आठ रिटायर्ड नेवी के अफसरों को फांसी की सजा सुनाई थी। उन्हें अगस्त 2022 में हिरासत में लिया गया था। जिसके बाद भारत सरकार के हस्तक्षेप किया और सभी को रिहा किया गया। कतर के अमीर ने 12 फरवरी को उन्हें माफी देते हुए और उनकी सजा को घटाकर जेल की सजा में तब्दील कर दिया था।

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Qatar Espionage Case Indian Navy Veteran still not returned PM Narendra Modi MEA urged by family news and upda
कतर से अब तक नहीं लौटा नौसेना का ये पूर्व अफसर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत सरकार को इस साल की शुरुआत में कतर की जेलों में सजा काट रहे अपने 8 नेवी के पूर्व अधिकारियों को रिहा कराने में बड़ी कामयाबी हासिल हुई थी। उनमें से 12 फरवरी, 2024 तक 7 अधिकारी भारत लौट आए थे, जबकि आठवें अधिकारी रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। उनकी बहन मीतू भार्गव ने अपने भाई को जल्द भारत वापस भेजने की मांग की है और इस मामले में विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है। 
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26 अक्तूबर 2023 को कतर की अदालत ने जासूसी का आरोप में आठ रिटायर्ड नेवी के अफसरों को फांसी की सजा सुनाई थी। उन्हें अगस्त 2022 में हिरासत में लिया गया था। जिसके बाद भारत सरकार के हस्तक्षेप किया और सभी को रिहा किया गया। कतर के अमीर ने 12 फरवरी को उन्हें माफी देते हुए और उनकी सजा को घटाकर जेल की सजा में तब्दील कर दिया था। जिसके बाद 18 महीने जेल में रहने के बाद उनमें से सात अधिकारी उसी दिन भारत लौट आए थे। लेकिन आठवें अधिकारी रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी स्वदेश नहीं लौट पाए थे।  
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बहन ने लगाई गुहार
रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की बहन डॉक्टर मीतू भार्गव का कहना है कि सात महीने बीत जाने के बाद भी उनके भाई कमांडर पूर्णेंदु तिवारी अभी तक भारत नहीं लौटे हैं, जबकि 7 अन्य नौसेना के पूर्व अधिकारी 12 फरवरी को ही भारत लौट आए थे, जबकि मेरे भाई सहित सभी आठों को कतर के अमीर ने माफ कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय यह कहता है कि मेरे भाई को भारत लौटने से पहले कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, लेकिन अन्य सातों अधिकारियों को भारत वापस लौटे सात महीने हो चुके हैं। 
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मध्यप्रदेश के ग्वालियर की रहने वालीं मीतू भार्गव कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की मौसेरी बहन हैं। उन्होंने फिर से हाथ जोड़कर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माननीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से विनम्र अनुरोध किया है कि वे अपने पूर्व नौसेना कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को तुरंत भारत वापस लाने में मदद करें। उनका कहना है कि हालांकि हालांकि उन्हें रिहा कर दिया गया है, लेकिन वे अभी भी 7 महीनों से दोहा में हैं। उनकी यात्रा पर प्रतिबंधों के चलते वे अभी तक लौट नहीं पाए हैं। 

विदेश मंत्रालय ने दिया ये जवाब
वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमर उजाला को बताया कि नौसेना के पूर्व कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को अभी भी दोहा में "कुछ कागजी कार्रवाइयां पूरी करनी हैं", जिसके बाद ही उनकी भारत वापसी हो पाएगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार का विदेश मंत्रालय लगातार उनके संपर्क में है। जब भी उनकी वापसी होगी सूचित किया जाएगा। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब भारतीय विदेश मंत्रालय ने उनकी वापसी पर रटारटाया बयान दिया हो। इससे पहले भी फरवरी और मई में भी पूर्णेंदु तिवारी की वापसी को लेकर विदेश मंत्रालय ने यही जवाब दिया था। 

कंपनी की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जानी बाकी
वहीं विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दोहा में अपने अर्पाटमेंट में रह रहे कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की कंपनियां हैं, जिनकी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जानी बाकी हैं। इसमें वक्त लगता है। जब तक वे औपचारिकताएं पूरी नहीं होंगी, उनकी वापसी नहीं हो पाएगी। कमांडर तिवारी को जिस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देना है, ओमान की कंपनी दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ उनके क्या संबंध थे। इस कंपनी ने पिछले साल अपने ऑपरेशंस बंद कर दिए थे। इसी वजह से उनकी यात्रा पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जैसे ही उनके ऊपर से यात्रा प्रतिबंधों हटेंगे, वह देश के लिए उड़ान भर लेंगे। 

कमांडर पूर्णेंदु तिवारी का परिवार उनकी वापसी को लेकर रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और नौसेना प्रमुख से भी मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उनकी स्वदेश वापसी को लेकर व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील कर चुके हैं। 

बता दें कि कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, अमित नागपाल, एसके गुप्ता, बीके वर्मा और सुगुणाकर पकाला, कैप्टन नवतेज गिल और सौरभ वशिष्ठ और नाविक रागेश को अगस्त 2022 में कतर ने 'जासूसी' के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन्हें 12 फरवरी को नई दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद रिहा कर दिया गया था। 


2019 में मिला था प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार 
नौसेना की एग्जीक्यूटिव ब्रांच में नेविगेशन स्पेशलिस्ट के तौर पर काम कर चुके कमांडर तिवारी ने आईएनएस मगर की कमान संभाली थी और नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लीट नेविगेशन अफसर के पद पर थे। उन्होंने राजपूत क्लास के डेस्ट्रॉयर जहाजों पर भी काम किया। रिटायर होने के बाद, उन्होंने कतर जाने से पहले सिंगापुर के नौसैनिकों को ट्रेनिंग भी दी थी। वहीं वे प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार पाने वाले पहले आर्म्ड फोर्स वेटेरन थे। उन्हें 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया था। पिछले साल अपनी गिरफ्तारी से पहले, वे कतरी नौसेना के कर्मियों को ट्रेनिंग दे रहे थे।
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