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जल्दी सामान पहुंचाने के लिए 'पाइथन' और 'एनाकॉन्डा' की मदद ले रहा रेलवे, जानिए कैसे
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:28 AM IST
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ट्रेन
- फोटो : वीडियो स्क्रीशॉट
पाइथन, एनाकॉन्डा की मदद से भारतीय रेलवे सामान को एक जगह से दूसरी जगह जल्दी पहुंचा पा रही है। अगर आप भी नाम देखकर इनको सांप समझ रहे हैं तो आपको भी धोखा हो रहा है। यहां बात हो रही है सामान को इधर-उधर लेकर जाने वाली लंबी-लंबी माल वाहक ट्रेनों की।
ये ट्रेनें काफी लंबी होती हैं और देखने में सांप की तरह लगती हैं इसलिए ही इनका ऐसा नाम रखा गया है। नॉर्थन सेंट्रल रेलवे को पाइथन, वेस्ट्रन रेलवे को एनाकॉन्डा और सेंट्रल रेलवे को मारुति के नाम से जाना जाता है।
ये भी पढ़ें: ये है राजस्थान की 'टॉय ट्रेन', शिमला की टॉय ट्रेन जैसा होता है सफर
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अधिकारियों के मुताबिक, इन ट्रेनों से ना सिर्फ माल को जल्दी पहुंचाने में मदद मिलती है बल्कि ये सुलभ, कम खर्चीली भी होती हैं। केंद्र सरकार ने साल 2017-18 में इन ट्रेनों पर प्रमुख रूप से ध्यान देने के बारे में सोचा है।
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ये ट्रेनें काफी लंबी होती हैं और देखने में सांप की तरह लगती हैं इसलिए ही इनका ऐसा नाम रखा गया है। नॉर्थन सेंट्रल रेलवे को पाइथन, वेस्ट्रन रेलवे को एनाकॉन्डा और सेंट्रल रेलवे को मारुति के नाम से जाना जाता है।
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अधिकारियों के मुताबिक, इन ट्रेनों से ना सिर्फ माल को जल्दी पहुंचाने में मदद मिलती है बल्कि ये सुलभ, कम खर्चीली भी होती हैं। केंद्र सरकार ने साल 2017-18 में इन ट्रेनों पर प्रमुख रूप से ध्यान देने के बारे में सोचा है।
किसी स्टेशन पर नहीं रुकतीं
ट्रेन
- फोटो : वीडियो स्क्रीशॉट
इस तरीके की हर ट्रेन में 59 डिब्बे और दो से तीन इंजन होते हैं। ये ट्रेन बिना किसी स्टेशन पर रुके अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, फिलहाल रोजाना 15-25 ऐसी ट्रेनें चल रही हैं। इनकी संख्या मार्च 2018 तक प्रतिदिन 50 करने का प्लान है।
इस तरीके की ट्रेनों को लंबी पटरी चाहिए होती हैं। अभी ऐसी कुल तीन लंबी लाइन मिली हैं वहीं आने वाले दिनों में 109 और लाइनें रेलवे को मिल सकती हैं।
इस तरीके की ट्रेनों को लंबी पटरी चाहिए होती हैं। अभी ऐसी कुल तीन लंबी लाइन मिली हैं वहीं आने वाले दिनों में 109 और लाइनें रेलवे को मिल सकती हैं।