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पंजाब फतह : पाकिस्तान के सीमावर्ती राज्य में 'आप' को' संभलकर रखना होगा कदम, 'उड़ता पंजाब' भी चुनौती 

Thu, 10 Mar 2022 04:50 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली  Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Thu, 10 Mar 2022 04:50 PM IST
सार

पंजाब में युवाओं की बड़ी आबादी, नशे की शिकार है। जो युवा इस लत से बचे हैं, वे विदेश जा रहे हैं। ये पंजाब है, यहां एक ही साल में सरकार को परख लिया जाता है। 
 

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Punjab Fateh: AAP  have to be careful in the border state of Pakistan, Udata Punjab is also a big challenge
bhagwant mann - फोटो : amar ujala

विस्तार

पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने क्लीन स्वीप कर दिया है। राज्य में दशकों से सत्ता सुख भोग रही कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल जैसी परंपरागत पार्टियों के अधिकांश धुरंधर हार गए हैं। पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब में आम आदमी पार्टी को संभलकर कदम रखना होगा। प्रदेश के संभावित 'ब्रेन ड्रेन और चिट्टा' जैसी कई बड़ी समस्याएं भावी मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए प्रमुख चुनौतियों में शामिल रहेंगी। 

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पंजाब में युवाओं की बड़ी आबादी, नशे की शिकार है। जो युवा इस लत से बचे हैं, वे विदेश जा रहे हैं। पंजाब की सियासत, कृषि और सामाजिक व आर्थिक संरचना के जानकार कीर्ति किसान यूनियन की राज्य कमेटी के सदस्य रमिन्द्र सिंह का कहना है, पंजाब में आज इंजीनियरिंग कॉलेज खाली पड़े हैं, जबकि आइलेट्स सेंटरों पर भीड़ है। ये पंजाब है, यहां एक ही साल में सरकार को परख लिया जाता है। 
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इन्हें परखा, अब इन्हें परख कर देख लो... 
पंजाब में दशकों से कांग्रेस और अकाली दल सत्ता में रहे हैं। रमिन्द्र सिंह कहते हैं, पंजाब के लोग इन दोनों दलों से परेशान हो चुके थे। कांग्रेस शासन से पहले अकालियों ने 10 साल तक सत्ता सुख भोगा था। उस दौरान जो कुछ हुआ, उसे प्रदेश के लोग भूले नहीं हैं। माफिया, नशा और बेअदबी, इस तरह की घटनाओं ने पंजाब के लोगों को शिरोमणि अकाली दल से दूर कर दिया। बादल परिवार पर गंभीर आरोप लगते रहे। तंग हो चुके लोगों ने इस बार तय किया था, इन्हें परखा है, अब इन्हें भी परख कर देख लो। बस, आप की जीत के पीछे यही एक थ्योरी रही है। अकाली दल, किसानों के मुद्दे पर खुल कर नहीं बोला। शुरुआत में तीन कानूनों को लेकर वे भाजपा के साथ लगे रहे। बाद में अकाली दल, मोदी सरकार से बाहर हुआ। किसान नाराज हो गए। यही वजह रही कि चुनाव में किसान और दूसरे वर्गों ने अकाली दल से दूरी बना ली। प्रदेश के लोग, इन राजनीतिक दलों से तंग आ चुके थे। 

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अगर डिलीवरी नहीं हुई तो नीचे गिराने से भी नहीं चूकेंगे लोग... 

पंजाब के चुनावी नतीजों ने साफ कर दिया है कि जो जनहित के काम (डिलीवरी) नहीं करेगा, वो कुर्सी से नीचे जाएगा। बतौर रामिंद्र सिंह, पंजाब के लोग हर सूरत में डिलीवरी चाहते हैं। मतलब जो पार्टी लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी, उसे ही मौका मिलेगा। आज आम आदमी पार्टी को पंजाब में जो भारी जीत मिली है, उसमें एक मुख्य बात ये भी है कि लोग पुराने दलों को सबक सिखाना चाहते थे। लोगों ने सार्थक बदलाव के लिए 'आप' को मौका दिया है। आप सरकार को एक साल में डिलीवरी देनी होगी। 


 

राज्य में 'चिट्टा' का बोलबाला

पंजाब में नशे की जबरदस्त समस्या है। 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग्स) का बोलबाला है। युवाओं में विदेश जाने की होड़ मची है। युवाओं का प्रयास है कि वे किसी तरह विदेश चले जाएं। भगवंत मान को इस बाबत कुछ करके दिखाना होगा। कृषि और नौकरी का मुद्दा बड़ा है। राज्य पर 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। पानी नीचे जा रहा है। खेती किसानी घाटे का सौदा साबित हो रही है। पंजाब के लोग सिख चेहरा चाहते थे। केजरीवाल ने लोगों की इस भावना को समझा। अब भगवंत मान की बारी है। रामिंद्र सिंह कहते हैं, पंजाब सीमावर्ती राज्य है। पाकिस्तान की तरफ से तोड़फोड़ के प्रयास चलते रहते हैं। आए दिन ड्रोन गिराए जा रहे हैं। सीमा पार से नशा और हथियार आ रहे हैं। मान को इन तमाम चुनौतियों के साथ खालिस्तानी गतिविधियों से भी निपटना होगा।

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