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Politics: पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस-आप में शुरू हुई खटपट! क्या दिल्ली विस चुनावों में लड़ेंगे अलग-अलग?

Wed, 29 May 2024 07:35 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 29 May 2024 07:35 PM IST
सार

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने साथ में चुनाव लड़कर भाजपा को हराने की योजना बनाई थी। दोनों दलों ने साझा समितियों के माध्यम से अपने प्रत्याशियों के साथ-साथ दूसरे दल के प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार किया था। मतदान के दिन भी दोनों दलों में आपसी सहयोग बना रहा, लेकिन अब मतदान के बाद दोनों ही दलों के नेताओं को यह लगने लगा है कि गठबंधन अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं रहा है।

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Punjab elections tussle begins between Congress AAP! Will they fight separately in Delhi Assembly elections?
Arvind Kejriwal - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लोकसभा चुनावों के पहले दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन कर लिया था। दोनों दलों ने साथ में लोकसभा चुनाव लड़ते हुए भाजपा को सातों सीटों पर हराने का दावा किया था, लेकिन चुनाव परिणाम आने के पहले ही दोनों दलों में दूरी साफ दिखने लगी है। अरविंद केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन केवल लोकसभा चुनावों तक के लिए था। लेकिन आज बुधवार को दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी केजरीवाल सरकार पर जमकर हमला बोला है। दोनों दलों के प्रमुख नेताओं के बयानों को देखते हुए माना जा रहा है कि अब दोनों दलों ने एक-दूसरे से दूरी बनाने का निर्णय कर लिया है और लोकसभा चुनावों के परिणाम आने के साथ ही इसका असर दिखाई पड़ सकता है। दोनों पार्टी के नेताओं में यह तनाव पंजाब में 13 सीटों पर होने वाले मतदान से ठीक पहले दिखाई पड़ा है, जहां दोनों ही दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। इसे पंजाब में चुनावी लाभ लेने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जहां दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। 

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दरअसल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने साथ में चुनाव लड़कर भाजपा को हराने की योजना बनाई थी। दोनों दलों ने साझा समितियों के माध्यम से अपने प्रत्याशियों के साथ-साथ दूसरे दल के प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार किया था। मतदान के दिन भी दोनों दलों में आपसी सहयोग बना रहा। लेकिन अब मतदान के बाद दोनों ही दलों के नेताओं को यह लगने लगा है कि गठबंधन अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं रहा है। चार जून को इसका असर चुनाव परिणाम में भी दिखाई पड़ सकता है जब पूरे देश के साथ-साथ दिल्ली के चुनाव परिणाम भी घोषित किए जाएंगे।
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दिल्ली कांग्रेस के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि राजधानी में दोनों दलों के बीच हुआ यह गठबंधन केवल मुसलमान मतदाताओं को बंटने से रोकने में सफल रहा है, लेकिन उनका अनुमान है कि अन्य वर्गों के मतदाताओं ने अपनी-अपनी स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर ही मतदान किया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के असर को लेकर दोनों ही दलों के नेताओं में संदेह था। पार्टी के इन नेताओं का मानना था कि आम आदमी पार्टी का साथ लेना लाभ की बजाय घाटे का सौदा साबित हो सकता है। 
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लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्रीय स्तर के बड़े मुद्दों को देखते हुए इस गठबंधन में जाना ही ठीक समझा, जिसे प्रदेश के ज्यादातर नेताओं ने स्वीकार कर लिया। लेकिन अब चुनाव में भी लगभग वही बात दिखाई पड़ी है। ऐसे में चुनाव परिणाम आने के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी कि पार्टी के लिए यह सौदा कितना लाभप्रद रहा। इससे विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है।

दिल्ली अध्यक्ष ने क्या कहा?
दरअसल, इस समय दिल्ली में पानी का मुद्दा बहुत गर्म हो चुका है। राजधानी के ज्यादातर इलाकों में पानी की उपलब्धता में भारी कमी बनी हुई है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इस पर दिल्ली सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में साफ पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। इसके लिए सीधे तौर पर दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सभी एजेंसियों को मिलकर जल्द से जल्द पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। लेकिन अब तक दिल्ली सरकार की आलोचना करने से बचते रहे, कांग्रेस नेता मतदान बीतने के बाद तुरंत ही जिस तरह हमलावर हो उठे हैं, उसे विशेष संदर्भों में देखा जा रहा है।

भाजपा ने ली चुटकी
दिल्ली भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन केवल अवसरवादी गठबंधन है और इसे एक दिन टूटना ही है। उन्होंने कहा कि पहले अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के नेताओं को भ्रष्ट कहा। बाद में कांग्रेस नेताओं ने अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट बताया। लेकिन केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजय रथ रोकने के लिए और अपना अस्तित्व बचाने के लिए दोनों भ्रष्टाचारी एक साथ आ गए। उन्होंने कहा कि अब जब दोनों दलों ने यह देख लिया कि जनता ने उनका गठबंधन स्वीकार नहीं किया, दोनों दल इस गठबंधन से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में सातों सीटों के साथ-साथ भाजपा इस बार जनता के सहयोग से दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी पूर्ण बहुमत के साथ जीतेगी।

यहां भी दिखा आपसी गतिरोध
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने दिल्ली में गठबंधन किया था, लेकिन पंजाब में दोनों दल एक दूसरे के आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों दल पंजाब में एक दूसरे पर हमलावर हैं, जबकि दिल्ली में दोनों दलों ने साथ-साथ चुनाव लड़ा। भाजपा ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के इन रिश्तों पर हमला भी किया था। 


इंडिया गठबंधन में यहां भी है गतिरोध
कांग्रेस का यह अंतर्विरोध केवल आम आदमी पार्टी के साथ ही नहीं है। इंडिया गठबंधन में दूसरी महत्त्वपूर्ण सहयोगी तृणमूल कांग्रेस भी पश्चिम बंगाल में बिना गठबंधन के ही चुनाव लड़ रही है। बंगाल चुनाव के मद्देनजर ममता बनर्जी कांग्रेस पर जमकर हमला भी कर रही हैं, लेकिन राष्ट्रीय मुद्दों पर वह इंडिया गठबंधन के साथ होने की बात कहती हैं। इसी प्रकार वामपंथी दल पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ खड़े हैं, लेकिन केरल में कांग्रेस और वामदल एक दूसरे के आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल गांधी की वायनाड सीट पर भी वामपंथी उम्मीदवार उन्हें कड़ी टक्कर दे रही हैं। भाजपा इंडिया गठबंधन के दलों के इस आपसी अंतर्विरोध पर लगातार हमला करती रही है।

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