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भाजपा को भरोसा: पंजाब चुनाव में तालिबान के कारण खूब चलेगा राष्ट्रवाद का मुद्दा, अनुसूचित जाति से होगा सीएम का चेहरा

Thu, 02 Sep 2021 09:24 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 02 Sep 2021 09:24 PM IST
सार

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले किसान सम्मान निधि की एक और किस्त जारी की जाएगी। भाजपा को उम्मीद है कि यह सीमांत किसानों के लिए मददगार साबित होगी।
 

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Punjab elections: BJP is confident - the issue of nationalism will run a lot in the border areas due to taliban
BJP FLAG - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब चुनाव में भाजपा अब तक शिरोमणि अकाली दल के साथ मैदान में उतरती रही है। उसके हिस्से में केवल 23 सीटें आती थीं। लिहाजा पंजाब में उसकी बड़ी साख दांव पर नहीं है। फिर भी पार्टी अपनी पूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतरेगी। भाजपा को उम्मीद है कि पंजाब के बॉर्डर के इलाकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के कारण राष्ट्रवाद का मुद्दा अन्य मुद्दों पर भारी रहेगा और उसे यहां अच्छी सफलता मिल सकती है। वह अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री का चेहरा सामने रखकर शिरोमणि अकाली दल और बसपा के गठजोड़ की काट खोजना चाहती है तो गरीब किसानों को साथ लेकर किसान आंदोलन की नाराजगी कमजोर करना चाहती है।

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मनोवैज्ञानिक कारणों से बढ़ेगा जनाधार
भाजपा का अनुमान है कि अफगानिस्तान में तालिबानी कट्टरता के कारण लोगों की आतंकवाद के प्रति नाराजगी बढ़ेगी। अफगानिस्तान-पाकिस्तान में जिस प्रकार की परिस्थितियां बनी हैं, उसके कारण लोगों में आतंकवाद के एक नए दौर की वापसी का अंदेशा सता रहा है। पंजाब देश के उन चंद राज्यों में से एक है, जिसने आतंकवाद का सबसे ज्यादा सामना किया है। पंजाब के लोग यह कभी नहीं चाहेंगे कि पड़ोसी देश में किसी भी आतंकी गुट को मजबूती मिले, जिसका उन्हें या उनके बच्चों को भविष्य में नुकसान उठाना पड़े। बीजेपी को अनुमान है कि इन मनोवैज्ञानिक कारणों से पंजाब में उसे एक अच्छा जनाधार हासिल हो सकता है।

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सिखों को वापस लाकर बनाई साख

अफगानिस्तान से सिख धर्म को मानने वाले लोगों को सफलतापूर्वक स्वदेश वापस लाकर भी केंद्र सरकार ने पंजाब के लोगों के बीच अपनी साख बनाई है। करतारपुर कॉरिडोर बनाने, अफगानिस्तान से पवित्र सिख ग्रंथों को पूरी पवित्रता के साथ वापस लाने और जलियांवाला बाग को एक नई छवि देकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिखों का दिल जीतने का प्रयास किया है। वे पहले भी समय-समय पर गुरुद्वारों में जाकर माथा टेकते रहे हैं। पार्टी को अनुमान है कि प्रधानमंत्री की इस छवि का उसे लाभ मिल सकता है।

छोटे किसानों का साथ मिलने की आस

भाजपा के एक शीर्ष नेता के अनुसार, अब तक किसान आंदोलन के नौ महीने बीत चुके हैं। इन नौ महीनों में पंजाब के लोगों को यह समझ आ चुका है कि यह आंदोलन केवल बड़े किसानों और कुछ बिचौलियों के हितों की लड़ाई थी। जबकि केंद्र सरकार की नीति में बड़े किसानों की बजाय देश के वे 86 प्रतिशत किसान हैं जो एक हेक्टेयर से भी कम भूमि की जोत रखते हैं।

नेता के मुताबिक, बड़े किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 6000 रूपये भले ही महत्वपूर्ण नहीं हों, लेकिन छोटे किसानों और ठेके पर खेत लेकर किसानी करने वाले किसानों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए भाजपा को उम्मीद है कि पंजाब के छोटे किसानों और ठेके पर खेती कराने वाले श्रमिक किसानों का साथ उसे मिल सकता है। पंजाब चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले किसान सम्मान निधि की एक और किस्त सीधे किसानों के खाते में जाएगी। भाजपा को उम्मीद है कि इससे छोटे किसानों के मन में भाजपा के लिए बेहतर छवि बनेगी।

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अनुसूचित जाति के चेहरे का मिलेगा साथ

पंजाब भाजपा के महासचिव सुभाष शर्मा कह चुके हैं कि वे राज्य में अनुसूचित जाति के चेहरे के साथ चुनाव में उतरेंगे। केंद्र सरकार भी अनुसूचित जाति के लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है। भाजपा को उम्मीद है कि उसका अनुसूचित जाति के चेहरे को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने का दांव शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के गठजोड़ को कमजोर कर सकता है। पार्टी इसके लिए अनुसूचित जाति के किसी बड़े चेहरे की तलाश में है।

हिंदू आबादी का भी साथ मिलने की उम्मीद
पंजाब में लगभग 40 फीसदी आबादी हिंदू समुदाय की है। भाजपा को उम्मीद है कि हिंदू बहुल सीटों पर उसे सफलता मिल सकती है। इन इलाकों में मजबूत हिंदू चेहरों की तलाश का काम शुरू भी किया जा चुका है जो पार्टी को अपने इलाकों में सफलता दिला सकें। यह काम आरएसएस के भरोसे सौंपा गया हैे जो हर विधानसभा का बारीकी से सर्वेक्षण कर जिताऊ उम्मीदवारों का नाम पार्टी को भेजेगी।

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