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पंजाब: मुख्यमंत्री तो चन्नी हैं, मगर सिद्धू भी ले रहे हैं 'फीलिंग', 10 जनपथ करा रहा नूरा-कुश्ती!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 17 Dec 2021 07:16 PM IST
सार

कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दोनों नेताओं को कड़ी हिदायत दी है कि वे पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली हरकत न करें। सीएम चन्नी तो हाईकमान के मुताबिक चल रहे हैं, मगर नवजोत सिंह सिद्धू कभी कभार गलत ट्रैक पर चले जाते हैं। खासतौर पर, उनके सार्वजनिक बयान पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर देते हैं...

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Punjab Election 2022: Chief Minister Channi instructed by congress leadership that work related to the government before the implementation of the model code, discuss with navjot singh sidhu
चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से गुटबाजी चल रही है, उससे निजात पाने के लिए पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खास प्लानिंग की है। चरणजीत सिंह 'चन्नी' को मुख्यमंत्री बना दिया है, मगर कभी कभार सीएम की 'फीलिंग' नवजोत सिंह 'सिद्धू' को भी कराई जा रही है। पंजाब में कांग्रेस को बचाने के लिए '10 जनपथ' की यह 'नूरा कुश्ती' चुनावों तक जारी रहेगी। इस सियासती अखाड़े में कांग्रेस पार्टी के धुरंधर अब एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास नहीं करेंगे। कांग्रेस पार्टी के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि आलाकमान की तरफ से मुख्यमंत्री चन्नी को हिदायत दी गई है कि वे आचार संहिता लगने से पहले जो भी ट्रांसफर पोस्टिंग, घोषणाएं या सरकार से जुड़ा कोई दूसरा काम करें तो उसमें 'सिद्धू' को साथ ले लें।

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चट्टोपाध्याय को सिद्धू का समर्थन

पिछले दिनों वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस पटवालिया को सिद्धू की सिफारिश पर पंजाब का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। अब एकाएक डीजीपी इकबाल प्रीत सिंह सहोता को हटा दिया गया है। कहा जा रहा है कि वे सरकार की इच्छा के मुताबिक काम नहीं कर रहे थे। सिद्धू के साथ उनकी पटरी नहीं बैठ रही थी। अभी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को डीजीपी की कमान सौंपी गई है, उन्हें सिद्धू का समर्थन हासिल है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में ड्रग को लेकर पंजाब में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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सिद्धू की कार्यशैली को लेकर कांग्रेस सचेत

कैप्टन अमरेंद्र सिंह के कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद जब आलाकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया तो सिद्धू नाराज हो गए थे। यहां तक कि उन्होंने पार्टी छोड़ने की तैयारी कर ली थी। उस दौरान 10 जनपथ पर बैठकों के कई दौर चले। कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी को हस्तक्षेप करना पड़ा। पंजाब से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा, गुटबाज़ी के चलते इस वक्त प्रदेश कांग्रेस की ज्यादा स्थिति अच्छी नहीं है। भले ही लोगों में पार्टी के प्रति गुस्सा उतना नहीं है कि विधानसभा चुनाव में वह उसके लिए घातक साबित हो जाए। अगर पार्टी नेता एक तय लाइन पर चलते हैं, तो चुनाव में अच्छा कर सकते हैं। पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिद्धू की कार्यशैली को लेकर कांग्रेस आलाकमान बहुत सचेत है।  

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सिद्धू ने खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया

कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दोनों नेताओं को कड़ी हिदायत दी है कि वे पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली हरकत न करें। सीएम चन्नी तो हाईकमान के मुताबिक चल रहे हैं, मगर नवजोत सिंह सिद्धू कभी कभार गलत ट्रैक पर चले जाते हैं। खासतौर पर, उनके सार्वजनिक बयान पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर देते हैं। दो-तीन दिन की उनकी बयानबाजियों पर गौर करें। सिद्धू ने गुरुवार को रायकोट की चुनावी जनसभा में खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बता दिया। वे बोले, मैं पंजाब मॉडल लेकर आऊंगा। राज्य को आर्थिक संकट से उबार दूंगा। उन्होंने कहा, पंजाब के पल्ले कुछ नहीं है, वह तो कर्ज में डूबा है। चोरी की वजह से सरकारी खजाना खाली हो गया है। सरकार, किसानों को दलहन, सरसों पर एमएसपी देगी। पंजाब तो अब रेपुटेशन पर चल रहा है। केवल 12 हजार करोड़ रुपये ही बचे हैं। उनके इस तरह के पार्टी एवं सरकार विरोधी बयानों को विपक्षी दलों के नेता हाथों हाथ लेते हैं।

मुंह से निकली गाली

कांग्रेस पार्टी ने 'नूरा कुश्ती' की प्लानिंग के तहत ही नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस की चुनाव समिति की कमान सौंपी है। उसके बाद सिद्धू ने सक्रियता दिखाई है। शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में उनकी जुबान फिसल गई। उन्होंने चंडीगढ़ में मजदूरों के लिए शहरी रोजगार गारंटी स्कीम की घोषणा कर दी। इस बाबत उनसे सवाल पूछा गया कि क्या यह स्कीम केंद्र की योजना से अलग है। इस पर सिद्धू की जुबान फिसली और मुंह से गाली निकल गई। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूर्णतया राज्य की स्कीम है। केंद्र सरकार से इसका कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि चुनाव तक 'सिद्धू' कोई ऐसी हरकत न करें, जो पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो। यही वजह है कि 'सिद्धू' की अधिकांश बातें, मुख्यमंत्री चन्नी मान रहे हैं।

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