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Punjab Assembly Election 2022: क्या करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा, पार्टियों में मची श्रेय लेने की होड़

Wed, 10 Nov 2021 02:17 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Wed, 10 Nov 2021 02:17 PM IST
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सार
कोरोना महामारी के कारण कॉरिडोर के माध्यम से पाकिस्तान जाने वाले तीर्थयात्रियों की आवाजाही मार्च 2020 से बंद है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित होने के कारण स्वतंत्रता के सालों बाद तक गुरुद्वारे को उपेक्षा का सामना करना पड़ा था।
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punjab assembly election 2022: will the demand for opening of kartarpur corridor become a big election issue, parties are competing for credit
करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media

विस्तार

कोरोना महामारी के कारण पिछले साल मार्च से बंद करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने की मांग अगले साल होने वाले पंजाब चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तरुण चुग ने जैसे ही पिछले हफ्ते दावा किया कि केंद्र सरकार जल्द ही कॉरिडोर खोल सकती है, सिख वोटरों को लुभाने के लिए सभी सियासी दलों में इस बात की होड़ लग गई है कि कॉरिडोर को खुलवाने का श्रेय उन्हें मिले। इसलिए चुनाव करीब आते ही पार्टियों में कॉरिडोर खोलने की मांग को तेज हो गई है।


एक तरफ अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री को पत्र लिखकर करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग की है। हरसिमरत कौर बादल ने कहा सिख श्रद्धालु एक बार फिर कॉरिडोर के खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कॉरिडोर को खोलने और श्री करतारपुर साहिब को भारत में मिलाने की अपील की है।


कांग्रेस ने भी की मांग
दूसरी तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने ट्वीट करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि इस महीने गुरु नानक देव जी के पवित्र प्रकाश पर्व से पहले यह कॉरिडोर फिर से खोल दिए जाएं। उन्होंने इस संदर्भ में पिछले महीने भी पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी थी।

वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू मंगलवार को गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक पहुंचे और करतारपुर कॉरिडोर खुलवाने के लिए अरदास की। फिरोजपुर से कांग्रेसी विधायक परमिंदर सिंह पिंकी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिठ्ठी लिख कर कॉरिडोर खोलने की मांग की है। इससे पहले पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने भी जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिठ्ठी लिखकर करतारपुर कॉरिडोर खोलने पर विचार करने की मांग कर चुके हैं। 
 

सिख समुदाय के मतदाता (फाइल फोटो)
सिख समुदाय के मतदाता (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
आप भी उठा सकती है मुद्दा
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी भी इस मामले पर पीछे नहीं रहना चाहती है और मुद्दा उठाने की तैयारी में है। आप के एक विधायक ने बताया कि इस संदर्भ में सिख संगठनों के साथ मुलाकात हुई है और जल्दी ही विदेश मंत्रालय के सामने यह मसला उठाने वाले हैं। 

2019 में जब कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ तो उस समय भी सभी पार्टियां इसका श्रेय लेना चाहती थीं। भाजपा, अकाली दल और कांग्रेस तीनों ने इस श्रेय पर अपना दावा ठोंक दिया था। भाजपा का कहना था कि कॉरिडोर खोलने का पहला प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था और उनकी पहल पर ही गुरुद्वारे का जीर्णोद्धार हुआ था। वहीं तब संस्कृति मंत्री रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने दावा किया था कि ये करतारपुर कॉरिडोर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ उनकी दोस्ती के कारण ही खोला गया है। इमरान खान से अपनी इसी दोस्ती के कारण सिद्धू पार्टी छोड़ चुके कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के निशाने पर हैं। 

सिख वोटरों को लुभाने की कवायद
राजनीतिक विशलेष्क बताते हैं कि राजनीतिक दलों को अचानक करतारपुर कॉरिडोर की याद इसलिए आ रही है क्योंकि चुनाव करीब है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अलावा सिख समुदाय के सदस्यों ने बार-बार नरेंद्र मोदी सरकार से कॉरिडोर खोलने की अपील की है। इसलिए उन्हें लुभाने के लिए अब सभी पार्टियां यह मांग करने लगी हैं। पंजाब में सिखों की आबादी लगभग 58 प्रतिशत है।
 

करतारपुर गुरुद्वारा साहिब
करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
चुनाव से पहले हो सकती है कॉरिडोर खोलने की घोषणा
केंद्र सरकार के सूत्रों ने भी कहा कि करतारपुर कॉरिडोर को जल्द ही तीर्थयात्रियों के लिए खोला जा सकता है। पंजाब की राजनीति को गहराई से समझने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि पंजाब में भाजपा बेहद कमजोर स्थिति में है, किसान आंदोलन से भाजपा के लिए हालात और मुश्किल हुए हैं लिहाजा चुनाव से ठीक पहले कॉरिडोर खोलकर वह चुनावी फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है, क्योंकि सिख समुदाय में करतारपुर गुरुद्वारे के लिए असीम आस्था है। लेकिन दूसरी पार्टियां भी पीछे नहीं रहेंगी। जैसे-जैसे चुनाव करीब आएगा यह मुद्दा गरमा सकता है। 

पाकिस्तान ने भी किया कॉरिडोर खोलने का आग्रह
कॉरिडोर के उद्घाटन को मंगलवार को दो साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर पाकिस्तान ने मंगलवार को भारत से यह आग्रह किया है कि वह अपनी तरफ से करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोले और सिख तीर्थयात्रियों को आगामी गुरु नानक देव के जन्मदिन समारोह के लिए पवित्र स्थल पर जाने की अनुमति दे। पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने कहा है "भारत ने अभी तक अपनी तरफ से गलियारा नहीं खोला है और तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब जाने की अनुमति नहीं दी है।"

पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने कहा है कि "हम गुरु नानक देव के जन्मदिन समारोह के लिए 17-26 नवंबर तक भारत और दुनिया भर से आने वाले आने वाले भक्तों की मेजबानी करने के लिए उत्सुक हैं।" पाकिस्तान को उम्मीद है कि भारत सहयोग की भावना से तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब जाने के लिए गलियारे से यात्रा करने की अनुमति देगा। 

 

पाक की तरफ से अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से आगे तैयार किया जा रहा करतारपुर कॉरिडोर, सफेद रंग की बिल्डिंग पैसेंजर टर्मिनल है
पाक की तरफ से अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से आगे तैयार किया जा रहा करतारपुर कॉरिडोर, सफेद रंग की बिल्डिंग पैसेंजर टर्मिनल है - फोटो : AmarUjala
कब हुआ था कॉरिडोर का उद्घाटन
नौ नवंबर, 2019 को गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के शुभ अवसर पर एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरी तरफ से पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने इसका उद्घाटन किया था। पीएम मोदी ने डेरा बाबा नानक स्थित कॉरिडोर के चेकपोस्ट से 550 श्रद्धालुओं का पहला जत्था करतारपुर रवाना किया था।

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव 16 वीं शताब्दी की शुरुआत में करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में रहते थे और अपनी जिंदगी के 18 साल उन्होंने यहीं बिताए थे। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि गुरुद्वारा दरबार साहिब ही सिख धर्म के संस्थापक की समाधि स्थल है। इसलिए सिख समुदाय में इस स्थान के लिए विशेष आस्था है। करतारपुर कॉरिडोर लगभग चार किमी का रास्ता है जो भारत-पाकिस्तान सीमा को सीमा पार गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है। एक श्रद्धालु करतारपुर कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान की जमीन पर बिना वीजा के गुरुद्वारा जा सकता है। लेकिन कॉरिडोर खुलने के कुछ ही महीनों बाद कोरोनोवायरस महामारी ने दुनिया भर को प्रभावित किया। इसी वजह से तीर्थयात्रियों के जाने पर रोक लगा दी गई है।

दिल्ली-लाहौर बस कूटनीति का हिस्सा
पाकिस्तान ने भी इस साल अप्रैल में मामलों में वृद्धि का हवाला देते हुए भारत से होने वाली सभी यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया। कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद से केवल 59,000 लोगों ने गलियारे का उपयोग किया, जबकि भारत ने पाकिस्तान से प्रतिदिन पांच हजार तीर्थयात्रियों और विशेष दिनों में 10,000 तीर्थयात्रियों को अनुमति देने का आग्रह किया था। 

करतारपुर कॉरिडोर का प्रस्ताव सबसे पहले 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ ने किया था। बताया जाता है कि यह प्रस्ताव दिल्ली-लाहौर बस कूटनीति का हिस्सा था। इससे पहले, भारत से सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर जाने के लिए लाहौर के लिए एक बस लेनी पड़ती थी जो करीब 125 किलोमीटर की लंबी यात्रा थी।

 
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