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23 साल बाद लिया बाप की मौत का बदला: नफरत ने युवक को बना दिया कातिल, क्या है पुणे मर्डर केस की इनसाइड स्टोरी?

Tue, 21 Jul 2026 12:24 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, पुणे।
पीटीआई, पुणे। Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 21 Jul 2026 12:24 AM IST
सार

पुणे पुलिस ने पुरानी कटराज टनल के पास हुई संजय कडू-देशमुख की हत्या का सनसनीखेज खुलासा किया है। 23 साल पहले संजय ने आरोपी मंथन के पिता दिनेश वैद्य को मारा था, जिसका बदला लेने के लिए अब 24 साल के हो चुके मंथन ने तीन साथियों के साथ मिलकर संजय का मर्डर कर दिया।
 

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pune cops crack tunnel murder case accused nursed grudge since victim killed his father 23 years ago
पुणे मर्डर केस - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

23 साल का लंबा इंतजार, दिल में सुलगती नफरत और पुरानी कटराज टनल के पास हुआ एक सनसनीखेज हत्या! पुणे से प्रतिशोध की एक ऐसी खौफनाक कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। जब 23 साल पहले एक बेकसूर पिता का कत्ल हुआ, तो उसका बेटा महज छह महीने का था। उसे नहीं पता था कि दुनिया क्या होती है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, दिल में सिर्फ एक ही सनक सवार थी, बाप की मौत का बदला! 11 जुलाई को जैसे ही पिता का कातिल जेल से जमानत पर बाहर आया, इस बेटे ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर उसका खेल खत्म कर दिया। 
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मृतक की पहचान 40 वर्षीय संजय बाबूराव कडू-देशमुख के रूप में हुई, जो एक अन्य आपराधिक मामले में जमानत पर बाहर घूम रहा था। पुलिस ने राजगढ़ थाने में हत्या का मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन कत्ल होने के बाद भी कातिल का कोई सुराग नहीं था।
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क्या कटराज टनल के अंधेरे में छिपा था दो दशक पुराना खूनी राज?
पुणे ग्रामीण पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) ने जब इस मर्डर मिस्ट्री की तफ्तीश शुरू की, तो मोबाइल टावर डंप डेटा और तकनीकी सबूतों के जाल में दो नाम आकर फंस गए, मंथन वैद्य (24) और सौरभ परदेशी। पुलिस ने 14 जुलाई को इन दोनों को दबोच लिया।
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थर्ड डिग्री और कड़े इम्तहान के सामने जब आरोपियों ने मुंह खोला, तो एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने पुलिस अफसरों की रीढ़ में सिहरन पैदा कर दी। यह कत्ल सिर्फ चंद दिनों की दुश्मनी का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे 23 साल लंबा खूनी इंतजार छिपा था।

इस सनसनीखेज क्राइम स्टोरी की बड़ी बातें

छह महीने की उम्र का वो जख्म: साल 2003 में संजय कडू-देशमुख ने एक मामूली विवाद में मंथन वैद्य के पिता दिनेश वैद्य की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उस वक्त कातिल मंथन महज 6 महीने का एक बेकसूर बच्चा था।

दिल में पलती रही नफरत की आग: मंथन जैसे-जैसे बड़ा हुआ, उसने अपने पिता का चेहरा तो नहीं देखा था, लेकिन उसके कातिल का नाम उसके सीने में आग की तरह दहकता रहा।

जमानत मिलते ही बुना मौत का जाल: संजय कडू-देशमुख जैसे ही एक दूसरे केस में कोर्ट से जमानत पर बाहर आया, मंथन ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर उसे ठिकाने लगाने का चक्रव्यूह रच दिया।

चार किरदारों की खूनी साजिश: पूछताछ में मंथन ने कबूला कि कटराज टनल के पास संजय को घेरकर मारने में उसके साथ सौरभ परदेशी, मीजान शेख और संदीप कोरी भी शामिल थे।

भारतीय न्याय संहिता के तहत शिकंजा: सहायक पुलिस निरीक्षक चेतन माचले के मुताबिक, पुलिस ने मंथन समेत सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।


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क्या कानून के पहरे से बड़ा साबित हुआ एक बेटे का प्रतिशोध?
मंथन वैद्य ने 23 वर्षों तक सिर्फ एक ही ख्वाब देखा था, अपने पिता की मौत का बदला। पुलिस की मानें तो वह बरसों से संजय की टोह में था। जैसे ही संजय जेल की सलाखों से बाहर कदम रखकर खुली हवा में सांस लेने आया, मंथन ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर पुरानी कटराज टनल के पास उसे मौत के घाट उतार दिया। अब पुलिस ने इस खूनी थ्रिलर के सभी किरदारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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