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पुणे हादसा: 'डॉक्टर ने ही ब्लड सैंपल बदलने का आइडिया दिया'; नाबालिग आरोपी के पिता-दादा की हिरासत 31 मई तक बढ़ी

Tue, 28 May 2024 04:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 28 May 2024 04:10 PM IST
सार

पुणे में बिल्डर के नाबालिग बेटे की कार से कुचल कर हुई दो इंजीनियरिंग पेशेवरों की मौत के मामले में नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने दावा किया है कि 'डॉक्टर ने ही आरोपी नाबालिग के पिता को ब्लड सैंपल बदलने का आइडिया दिया था। इसी बीच पुणे की स्थानीय अदालत ने आरोपी के पिता-दादा की पुलिस हिरासत बढ़ा दी है।

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Pune car accident case Updates father grandfather minor accused remanded to Police Custody Know all
पुणे कार हादसा - फोटो : ANI

विस्तार

पुणे की एक कोर्ट ने मंगलवार को पोर्श कार दुर्घटना में कथित रूप से शामिल एक किशोर के पिता को 31 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। कार्रवाई परिवार के चालक के कथित अपहरण और बंधक बनाने के मामले में की गई है। अदालत ने इसी मामले में आरोपी किशोर के दादा की पुलिस हिरासत भी 31 मई तक बढ़ा दी। दोनों आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) ए.ए. पांडे के समक्ष पेश किया गया। दोनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 365 (अपहरण) और 368 (गलत तरीके से छिपाना या बंधक बनाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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पुणे शहर के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई की सुबह कथित तौर पर नाबालिग द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार पोर्श कार की चपेट में आने से दो आईटी पेशेवरों की मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि हादसे के वक्त किशोर नशे में था। नाबालिग के पिता और रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल (50) किशोर न्याय अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पहले ही न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने आरोप लगाया है कि विशाल अग्रवाल और उनके पिता सुरेंद्र अग्रवाल (77) ने अपने चालक को पैसे का लालच और धमकी देकर दुर्घटना की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने के लिए दबाव डाला। इस सिलसिले में सुरेंद्र अग्रवाल को 25 मई को गिरफ्तार किया गया और फिर अदालत ने उन्हें 28 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था।
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समिति ने ससून अस्पताल का दौरा किया
पोर्शे कार दुर्घटना में शामिल किशोर चालक के रक्त के नमूनों में कथित हेरफेर की जांच कर रही तीन सदस्यीय समिति ने मंगलवार को यहां ससून जनरल अस्पताल का दौरा किया। पुलिस ने घटना के सिलसिले में सरकारी अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अजय तवारे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हल्नोर और स्टाफ सदस्य अतुल घाटकांबले को गिरफ्तार कर लिया है। 
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डॉक्टर ने ही आरोपी का ब्लड सैंपल बदने का विचार दिया
इस मामले में पुलिस ने मंगलवार को दावा किया कि पोर्शे दुर्घटना मामले में शामिल नाबालिग के पिता और ससून सरकारी अस्पताल के डॉ. अजय टावरे कल्याणी नगर में हुई दुर्घटना के बाद लगातार संपर्क में थे। सरकारी डॉक्टर ने ही सबसे पहले सोचा था कि आरोपी किशोर खून के नमूनों की अदला-बदली की जा सकती है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना के बाद डॉ. टावरे और विशाल अग्रवाल के बीच एक दर्जन से अधिक बार बातचीत हुई। अधिकारी के मुताबिक इस बात की जांच की जानी है कि क्या डॉ. टावरे ने उन्हें तीन लाख रुपये अपनी जेब से दिए थे या उन्होंने किसी और से पैसे लिए थे। नमूनों को बदलने का विचार उनका ही था क्योंकि किसी और के दिमाग में यह आइडिया नहीं कौंधा था।

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