फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   provision becomes law for the rape of girls below age of 12

12 साल से कम की बच्चियों से रेप में फांसी का प्रावधान अब बन गया कानून, राष्ट्रपति की मुहर

Mon, 13 Aug 2018 05:03 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Aug 2018 05:03 AM IST
विज्ञापन
provision becomes law for the rape of girls below age of 12
demo pic

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम आयु की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा के प्रावधान वाले दंड विधि (संशोधन) कानून, 2018 को मंजूरी दे दी है। इसमें 16 साल से कम आयु की किशोरियों से दुष्कर्म के दोषियों को कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक, यह कानून 21 अप्रैल, 2018 से लागू माना जाएगा। 

विज्ञापन


नया कानून भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय साक्ष्य अधिनियम-1972, दंड प्रक्रिया संहिता-1973 और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम-2012 में संशोधन भी करेगा। साथ ही कठुआ और उन्नाव गैंगरेप के बाद 21 अप्रैल को लागू दंड विधि संशोधन अध्यादेश-2018 की जगह भी लेगा।

विज्ञापन


पिछले सप्ताह संसद से मंजूरी के बाद शनिवार को राष्ट्रपति ने संशोधन कानून पर मुहर लगा दी। नए कानून में 12 साल से कम की बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में कम से कम 20 साल कैद की सजा का प्रावधान है। इसके तहत दोषी को आजीवन कारावास या फांसी तक की सजा दी जा सकती है। गैंगरेप के मामले में दोषियों को मृत्यु तक कैद या फांसी का प्रावधान है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को मृत्यु तक कैद का प्रावधान

संशोधन कानून में 16 साल से कम की किशोरी से दुष्कर्म के मामले में कम से कम 20 साल कैद का प्रावधान है, जो अब तक 10 साल थी। ऐसे मामलों में आजीवन कारावास की सजा भी दी जा सकती है।

कानून में स्पष्ट किया गया है कि आजीवन कारावास का मतलब मृत्यु तक कैद है। महिलाओं से दुष्कर्म पर न्यूनतम सात साल के कठोर कारावास को बढ़ाकर 10 साल किया गया है। दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। 

दो महीने में जांच खत्म करने को बनाया अनिवार्य

संशोधन कानून में जांच और मुकदमों को निपटाने की समय सीमा भी तक की गई है। कानून कहता है कि हर तरह के दुष्कर्म के मामले की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य है। मुकदमे की सुनवाई भी दो महीने में पूरी करना अब अनिवार्य होगा। याचिका का निस्तारण भी छह महीने के भीतर करने को कहा गया है। साथ ही 16 साल से कम उम्र की किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत न देने का प्रावधान भी संशोधन कानून में है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed