आसान शब्दों में जानें क्या है 'नेट न्यूट्रैलिटी' और दुनिया में इसकी स्थिति
नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब नेट इस्तेमाल करने की असल ताकत उपभोक्ता के हाथ में होना है। आमतौर पर इसे नेट तटस्थता भी कहा जाता है। 2003 में इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल कोलंबिया विश्वविद्यालय के मीडिया लॉ के प्रोफेसर टिम वू ने किया था।
इसके तहत इंटरनेट की सेवा देने वाली कंपनी हर तरह के डेटा को यूजर के सामने निष्पक्ष और एक सामान तरीके से परोसती है यानी अलग-अलग डेटा के लिए कंपनियां अलग-अलग दाम नहीं ले सकती। कंपनियां यूजर के इंटरनेट सेवा को न तो बाधित कर सकती है और न ही स्पीड को कम कर सकती है।
कंपनियां ढूंढ रही कमाई का जरिया
वॉट्सएप कॉल जैसी सेवाओं ने ऑपरेटर्स की आमदनी पर असर डाला है। ऐसे में कंपनियां कमाई का नया जरिया खोज रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक नेट न्यूट्रैलिटी लागू नहीं होने की स्थिति में कंपनियां इंटरनेट कॉलिंग सर्विस के लिए डेटा कीमतों के अलावा भी ज्यादा कीमत वसूल सकती है। इसके अलावा नेट कॉलिंग सेवाओं को महंगा और धीमा करने का खतरा भी बरकरार रहेगा। ऐसा हुआ तो कंपनियां चाहेंगी की उपभोक्ता अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग पैसे चुकाए।
नेट न्यूट्रैलिटी के फायदे
इसका सबसे बड़ा फायदा यह मिलेगा की उपभोक्ताओं को हर वेबसाइट पर एक सामान स्पीड मिलेगी। नेट न्यूट्रैलिटी लागू होने के बाद कंपनियां वेबसाइट या ऑनलाइन मौजूद किसी भी कंटेंट को ब्लॉक या स्लो नहीं कर पाएंगी। आसान शब्दों में कहें तो न ही कंपनियां किसी वेबसाइट को मुफ्त कर पाएंगी और न ही किसी सेवा के लिए अतिरिक्त चार्ज कर पाएंगी।
यह ठीक वैसा ही है जैसे बिजली कंपनी घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के आधार पर दरें तय नहीं करती। चाहे आप टीवी ज्यादा इस्तेमाल करें या फ्रिज बिल कुछ खपत के अनुसार ही होता है। जहां एक और दुनिया में इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है वहीं भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) नेट न्यूट्रैलिटी के पक्ष में खड़ा है।
2010 में चिली ने अधिनियम पारित करके पूरे देश में नेट न्यूट्रैलिटी लागू की। चार साल पहले ही कंपनियों की चुनिंदा साइट्स तक मुफ्त एक्सेस यानी जीरो रेटिंग सेवा पर भी रोक लगा दी गई थी।
ऐसे समझें क्या है नेट न्यूट्रैलिटी
मान लीजिए कि अभी आपको आपको 200 रुपए के रिचार्ज पर प्रतिदिन 28 दिनों 1 जीबी इंटरनेट डेटा प्रतिदिन मिलता है। इस डेटा का इस्तेमाल आप यू-ट्यूब, वॉट्सएप, फेसबुक या किसी भी सेवा या वेबसाइट के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर नेट न्यूट्रैलिटी लागू नहीं होती तो डेटा अलावा आपको फेसबुक या वॉट्सएप के लिए अलग से पैक लेना पड़ सकता है या कोई कंपनी चाहे तो किसी खास सेवा की स्पीड बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पैसा ले सकती है।
दुनिया में नेट न्यूट्रैलिटी की स्थिति
ब्राजील
ब्राजील ने 2014 में नेट न्यूट्रैलिटी को कानूनी को लागू किया। इस कानून के जरिए उपभोक्ताओं को एक सामान इंटरनेट स्पीड देने के लिए कंपनियों द्वारा अलग बैंडविड्थ अपनाने पर भी रोक गई।
अमेरिका
2015 में अमेरिका ने नेट न्यूट्रैलिटी को अनिवार्य कर दिया था। ओबामा सरकार ने फरवरी में मसौदा तैयार करके मार्च में इसे पारित किया। विश्व बैंक की रिपोर्ट ने खुलासा किया कि उच्च गति के इंटरनेट कनेक्शन में हर 10 फीसदी की वृद्धि से 1.3% अधिक आर्थिक विकास होता है।
नीदरलैंड्स
2012 में नीदरलैंड्स उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाने वाला पहला यूरोपियन देश बना। इस कानून के तहत टेलीकॉम कंपनियों के उपभोक्ताओं से विशेष सेवा का अतिरिक्त शुल्क लेने और किसी सेवा को ब्लॉक करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
भारत में भी 46 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट उपभोक्ता हैं।