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नितिन पटेल फिर नजरअंदाज: चार बार सीएम बनने से चूके, कभी कहा था- मोदीजी पीएम बनें तो हमें मुख्यमंत्री बनकर खुशी होगी

Mon, 13 Sep 2021 02:44 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र कीर्तिवर्धन मिश्र
कीर्तिवर्धन मिश्र Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 13 Sep 2021 02:44 PM IST
सार

नितिन पटेल अब तक वित्त, स्वास्थ्य, कृषि, राजस्व, सिंचाई और शहरी विकास मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 1990 में पहली बार विधायक बने नितिन पटेल कडवा पाटीदार वर्ग से आते हैं।

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Profile Gujarat BJP Leader Nitin Patel who lost chance to become Chief Minister four times in seven years
नितिन पटेल 2014 से ही सीएम पद की रेस में रहे हैं, पर नहीं बन पाए मुख्य्मंत्री। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गुजरात में दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के इस्तीफे ने हलचल मचा दी। रूपाणी का यह कदम कुछ लोगों के लिए उम्मीद बनकर भी आया। गुजरात के अगले सीएम के लिए जिस नेता की दावेदारी सबसे ज्यादा थी, उनमें पहला नाम उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का था। उनका पाटीदार समाज में भी जबरदस्त प्रभाव है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर गुजरात चुनाव के लिए अनुभवी और लोकप्रिय चेहरे का इस्तेमाल कर सकती है। साथ ही पाटीदार वोटरों को साध सकती है।
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आखिरकार भाजपा का जो फैसला आया, उसने सभी को चौंका दिया। पार्टी ने 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में जीतकर पहली बार विधायक बने भूपेंद्र पटेल को सीएम पद के लिए चुना। वैसे तो भूपेंद्र पटेल भी पाटीदार नेता हैं, लेकिन प्रभाव और अनुभव के मामले में वे नितिन पटेल जैसे नहीं हैं।
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कौन हैं नितिन पटेल?

नितिन पटेल गुजरात के मेहसाणा से विधायक हैं। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई मेहसाणा से ही पूरी की और फिर बीकॉम में दूसरे साल तक की पढ़ाई गुजरात यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले सीएन आर्ट्स और बीडी कॉलेज से की। कडवा पाटीदार वर्ग से ताल्लुक रखने वाले नितिन पटेल का राजनीतिक करियर नगरपालिका के सदस्य बनने के बाद शुरू हुआ। इसके बाद उन्हें 1990 में पहली बार विधायक के तौर पर चुना गया। यानी विधानसभा में ही 31 सालों का अनुभव रखने वाले नितिन पटेल मौजूदा सरकार में काफी सीनियर हैं।

नितिन पटेल जब दूसरी बार 1995 में विधायक बने तो उनके प्रभाव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने वित्त, स्वास्थ्य, कृषि, राजस्व, सिंचाई और शहरी विकास मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। चुनाव आयोग को दिए गए उनके एफिडेविट के मुताबिक, पटेल व्यापारी हैं और वे ऑयल और शिवानी कॉटन इंडस्ट्री के मालिक हैं। इसी एफिडेविट में बताया गया है कि उनके पास कुल 9 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति है। वहीं, पांच आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
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चार बार हाथ से निकला सीएम बनने का मौका

पहला मौका
नरेंद्र मोदी ने जब 2014 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए लड़ने का फैसला किया, तो गुजरात सीएम के पद को लेकर कई नेताओं के नाम आगे आने शुरू हो गए। इनमें एक नाम नितिन पटेल का भी था। इस बीच, लोकसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले जब अलग-अलग सर्वे में मोदी के पीएम बनने के अनुमान लगाए जाने लगे थे, तब एक सवाल के जवाब में नितिन पटेल ने कहा था कि जब मोदीजी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे, तो उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने में खुशी होगी। हालांकि, 2014 में पार्टी ने आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री बनाया और नितिन पटेल का सीएम बनने का सपना पहली बार टूटा।

दूसरा मौका
गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले नितिन पटेल को मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के बाद दूसरा सबसे ताकतवर नेता माना जाता था। हालांकि, 2015-16 के पाटीदार आंदोलन के बाद जब आनंदीबेन पटेल को सीएम पद से हटाया गया, तो माना जा रहा था कि इस समुदाय को मनाने की अगली जिम्मेदारी नितिन पटेल को सौंपी जा सकती है। लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने तब विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाकर सभी को चौंका दिया था।

तीसरा मौका
2017 के चुनाव में पाटीदारों की नाराजगी के बावजूद नितिन पटेल काफी मतदाताओं अपनी तरफ करने में सफल रहे। इसके बाद जब भाजपा को जीत मिली, तो नितिन पटेल का सीएम बनना तय माना जा रहा था, पर आलाकमान ने तब भी विजय रूपाणी को ही चुना और तीसरी बार उनके मुख्यमंत्री बनने के सपनों पर पानी फिर गया।

और अब चौथी बार...

2022 में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले भाजपा ने विजय रूपाणी को हटाकर भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया और एक बार फिर नितिन पटेल का सपना टूट गया। पार्टी आलाकमान के फैसले का नितिन पटेल पर कितना गहरा असर हुआ, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीएम के नाम का एलान होने के बाद ही जब वे मीडिया से मुखातिब हुए तो भावुक नजर आए। उन्होंने यहां तक कहा कि मैं जब 18 साल का था, तब जनसंघ से लेकर आज तक भाजपा का कार्यकर्ता हूं और रहूंगा। कोई स्थान या पद मिले या न मिले, वो बड़ी बात नहीं है। लोगों का स्नेह, सम्मान मिले। हमारे ही सब भाई-बहन हैं जिसको जो स्थान मिलता है, वो हमारे ही लोग हैं।
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