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मुसीबत : कोरोना महामारी ने 89 फीसदी ओपीडी, 80 फीसदी ऑपरेशन किए कम 

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 10 Jul 2021 08:32 AM IST

सार

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित इस अध्ययन में 6 लाख से भी अधिक मरीजों पर समीक्षा की गई। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से दूसरी बीमारियां खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन मरीजों की संख्या में कमी आई है।
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कोरोना मरीज
कोरोना मरीज - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

कोरोना महामारी का देश की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। इसलिए डेढ़ साल से जहां पूरा देश महामारी से लड़ रहा है वहीं दूसरी और गैर कोविड-19 मरीजों का उपचार भी काफी मुश्किल हो चुका है। स्थिति यह है कि कोरोना महामारी ने 89 फ़ीसदी ओपीडी और 80 फीसदी ऑपरेशन कम कर दिए हैं।
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अपोलो अस्पताल में 6 लाख से भी अधिक मामलों पर किया अध्ययन
यह खुलासा दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने किया है जिन्होंने कोरोना से पहले और बाद की स्थिति पर चिकित्सा अध्ययन पूरा किया है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित इस अध्ययन में 6 लाख से भी अधिक मरीजों पर समीक्षा की गई।


डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से दूसरी बीमारियां खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन मरीजों की संख्या में कमी आई है। अस्पतालों को लेकर लोगों में खौफ और संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या इसके मुख्य कारण हो सकते हैं। 

संक्रमण के डर से लोग नहीं पहुंचे अस्पताल 
आंकड़ों को देख शायद लोगों को लगे कि देश में बीमारियां कम हो गई हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा मामलों में मरीज डर की वजह से इलाज कराने अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। यही डर उनके लिए जानलेवा भी हो सकता है, क्योंकि इससे बीमारी की गंभीरता पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।

अस्पताल के समूह चिकित्सा निदेशक डॉ अनुपम सिब्बल ने बताया कि महामारी का इससे भी पता चलता है, बीते एक से डेढ़ वर्ष में केवल श्वसन तंत्र से जुड़ी चिकित्सा में मरीजों की संख्या 314.02 फीसदी बढ़ी है। यह सीधे तौर पर कोरोना से जुड़ी है। अन्य किसी भी विभाग में बढ़ोतरी नहीं हुई है।

प्रबंध निदेशक पी शिवकुमार ने बताया कि मोटापे से छुटकारा पाने के लिए बेरिएट्रिक सर्जरी की जाती है। ज्यादातर मरीजों के लिए यह जीवन रक्षक होती है, लेकिन महामारी में इस सर्जरी में सबसे अधिक 87.5 फ़ीसदी की कमी आई है। इसके बाद आंखों से जुड़े 65.45 फ़ीसदी ऑपरेशन कम हुए हैं, जबकि सामान्य ऑपरेशन में 32.28 फ़ीसदी की कमी आई है।

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