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New Space Policy: केंद्र सरकार जल्द लाएगी नई अंतरिक्ष नीति, भारत में भी शुरू होंगे स्पेसएक्स जैसे उद्यम

Wed, 01 Jun 2022 09:56 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 01 Jun 2022 09:56 PM IST
सार

उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य देखभाल, कृषि से लेकर शहरी विकास और संपत्ति कर आकलन तक कई तरह की जरूरतों के लिए निजी क्षेत्र में उपग्रहों के निर्माण को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि हमने इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का दोहन नहीं किया है।

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principal scientific advisor ajay kumar sood says new space policy will come soon india may have venture like spacex
पीएम नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत सरकार जल्द ही नई अंतरिक्ष नीति पेश करेगी। दरअसल, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अंतरिक्ष के क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में भारत सरकार जल्दी ही अपनी नई अंतरिक्ष नीति लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में सारी बातचीत हो चुकी है। अंतरिक्ष नीति का फाइनल एडिशन जल्द ही अधिकार प्राप्त प्रौद्योगिकी समूह को भेजा जाएगा। इस नीति के आने के बाद भारत में भी स्पेसएक्स जैसी कंपनियां शुरू हो सकेंगी। 

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अंतरिक्ष नीति पर चल रहा काम
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने कहा कि अंतरिक्ष नीति पर काम चल रहा है। हम इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, लेकिन पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) के उपग्रहों की एक नयी तकनीक है। यह एक कम लागत वाला कार्य है। एलईओ में बड़ी संख्या में उपग्रह होते हैं। इससे अंतरिक्ष क्षेत्र बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य देखभाल, कृषि से लेकर शहरी विकास और संपत्ति कर आकलन तक कई तरह की जरूरतों के लिए निजी क्षेत्र में उपग्रहों के निर्माण को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि हमने इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का दोहन नहीं किया है। वर्तमान में अंतरिक्ष क्षेत्र देख रहा है कि 1990 के दशक में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने क्या अनुभव किया। 
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इस दौरान उन्होंने दावा किया कि अगले दो वर्षों में हमारे पास भी स्पेसएक्स जैसी कंपनियां होंगी। बता दें कि एलन मस्क ने 2002 में स्पेसएक्स की शुरुआत की थी। यह निजी कंपनी उन्नत रॉकेट और अंतरिक्ष यान का डिजाइन, निर्माण और प्रक्षेपण करती है।
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अजय कुमार सूद ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खुल जाने से कृषि, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, ई-कामर्स अनुप्रयोगों जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए समर्पित उपग्रह प्रक्षेपित हो सकेंगे। मार्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2040 तक वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग का विस्तार एक ट्रिलियन डालर तक हो जाएगा। गौरतलब है कि अजय कुमार सूद ने 25 अप्रैल को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला है।

अमेरिका में पूरा हुआ निसार मिशन का पेलोड एकीकरण : नासा
नासा के शीर्ष अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) मिशन का पेलोड एकीकरण अमेरिका में पूरा हो गया है। इसके सैटेलाइट के साथ एकीकरण के लिए परीक्षण के बाद लॉन्च व्हीकल के साथ भारत भेजे जाने की उम्मीद है। 


निसार पृथ्वी पर बारीक निगरानी के लिए इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के बीच एक संयुक्त मिशन है। इसके जरिये हिंद महासागर क्षेत्र और ध्रुवीय क्रायोस्फीयर समेत संपूर्ण भूमि पर वैश्विक नजर रखने का मकसद है। यह ड्यूल बैंड (एल बैंड और एस बैंड) रडार इमेजिंग मिशन है। इसमें भूमि, वनस्पति और क्रायोस्फीयर में मामूली से बदलाव को भी देखने के लिए पूर्ण पोलारिमेट्रिक और इंटरफेरोमेट्रिक मोड की क्षमता है। नासा साइंस मिशन निदेशालय के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. थॉमस जुर्बुजेन के नेतृत्व में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों की एक टीम बंगलूरू आई है और उसने इसरो के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि इस दौरे का मुख्य मकसद निसार है और यह नासा और इसरो के बीच अब तक सबसे बड़ा सहयोग है।

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