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अध्यात्म : पीएम मोदी बोले- गीता ने आजादी की लड़ाई को दी ऊर्जा, युवाओं को इससे सीखने की जरूरत
Tue, 09 Mar 2021 05:55 PM IST
योगेश साहू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 09 Mar 2021 05:55 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों पर 21 विद्वानों की टिप्पणियों वाली पांडुलिपि के 11 खंडों का विमोचन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गीता के विश्वरूप ने महाभारत से लेकर आजादी की लड़ाई तक हर कालखंड में हमारे राष्ट्र का पथप्रदर्शन किया है। भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाले आदि शंकराचार्य ने गीता को आध्यात्मिक चेतना के रूप में देखा। गीता को रामानुजाचार्य ने आध्यात्मिक ज्ञान की अभिव्यक्ति के रूप में देखा।
मोदी ने कहा कि एक किसी एक ग्रंथ के हर श्लोक पर ये अलग-अलग व्याख्याएं, इतने मनीषियों की अभिव्यक्ति, ये गीता की उस गहराई का प्रतीक है, जिस पर हजारों विद्वानों ने अपना पूरा जीवन दिया है। ये भारत की उस वैचारिक स्वतंत्रता का भी प्रतीक है, जो हर व्यक्ति को अपने विचार रखने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि आज जब देश आजादी के 75 साल मनाने जा रहा है तो हम सभी को गीता के इस पक्ष को देश के सामने रखने का प्रयास करना चाहिए। कैसे गीता ने आजादी की लड़ाई को ऊर्जा दी। कैसे गीता ने देश को एकता के आध्यात्मिक सूत्र में बांधकर रखा। इन सब पर हम शोध करें, अपनी युवा पीढ़ी को इससे परिचित कराएं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये गीता ही है जिसने दुनिया को निस्वार्थ सेवा जैसे भारत के आदर्शों से परिचित कराया। नहीं तो भारत की निस्वार्थ सेवा, विश्व बंधुत्व की हमारी भावना बहुतों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होती।
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मोदी ने कहा कि एक किसी एक ग्रंथ के हर श्लोक पर ये अलग-अलग व्याख्याएं, इतने मनीषियों की अभिव्यक्ति, ये गीता की उस गहराई का प्रतीक है, जिस पर हजारों विद्वानों ने अपना पूरा जीवन दिया है। ये भारत की उस वैचारिक स्वतंत्रता का भी प्रतीक है, जो हर व्यक्ति को अपने विचार रखने के लिए प्रेरित करती है।
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दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों पर 21 विद्वानों की टिप्पणियों वाली पांडुलिपि के 11 खंडों का विमोचन किया। pic.twitter.com/gYM961pO7K
विज्ञापन विज्ञापन— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 9, 2021
उन्होंने कहा कि आज जब देश आजादी के 75 साल मनाने जा रहा है तो हम सभी को गीता के इस पक्ष को देश के सामने रखने का प्रयास करना चाहिए। कैसे गीता ने आजादी की लड़ाई को ऊर्जा दी। कैसे गीता ने देश को एकता के आध्यात्मिक सूत्र में बांधकर रखा। इन सब पर हम शोध करें, अपनी युवा पीढ़ी को इससे परिचित कराएं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये गीता ही है जिसने दुनिया को निस्वार्थ सेवा जैसे भारत के आदर्शों से परिचित कराया। नहीं तो भारत की निस्वार्थ सेवा, विश्व बंधुत्व की हमारी भावना बहुतों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होती।