PHOTOS: प्रधानमंत्री मोदी से उनके घर पर मिलने पहुंचा अफगान हिंदू-सिखों का जत्था, पीएम को पहनाया अफगानी साफा
बताया गया है कि पीएम ने इस दौरान अफगान मूल के भारतीय बांसरी लाल अरेंदेह से भी मुलाकात की। अरेंदेह को पिछले साल अफगानिस्तान में ही किडनैप कर लिया गया था। समझौते के बाद उन्हें छोड़ा गया था।
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अफगानी साफा के अलावा सिख समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को तलवार भी भेंट की। अफगानिस्तान के हिंदू और सिक्खों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सीएए लाने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद कहा। 1989 में भारत आने वाले अफगानी मूल के नागरिक तरेंद्र सिंह ने कहा "हमने पीएम मोदी को काबुल के हालातों के बारे में संक्षिप्त में बताया। वहां के समीकरण हमारी मुख्य समस्या हैं। हम नागरिकता के लिए यहां-वहां भटकते रहे। इसलिए हम प्रधानमंत्री मोदी को सीएए लाने के लिए धन्यवाद देते हैं। हम चाहते हैं कि एक ही बार में हमें नागरिकता मिले।"
इस मुलाकात में पीएम मोदी को सिख समुदाय से जुड़ी धार्मिक चीजें भी भेंट की गईं, जिन्हें प्रधानमंत्री ने सहजता से स्वीकार किया। अफगानिस्तान के काबुल से पिछले साल आने वाले निदान सिंह सचदेव ने कहा "पिछले साल गुरुद्वारे से तालिबान ने मेरा अपहरण कर लिया था। वो मुझे भारतीय मूल का समझ रहे थे और मेरा धर्म परिवर्तन कराना चाहते थे। मैंने प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया अदा किया और भारत सरकार से मिली मदद से खुश हूं। हमें सिर्फ आवास और नागरिकता की जरूरत है।"
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह 7 लोक कल्याण मार्ग पर अफगानिस्तान से सिख-हिंदू प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री को सम्मानित किया और अफगानिस्तान से सिखों और हिंदुओं को सुरक्षित रूप से भारत लाने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। पीएमओ ने बताया कि पीएम ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कहा कि वे मेहमान नहीं हैं बल्कि अपने घर में हैं। भारत उनका घर है। उन्होंने अफगानिस्तान में उनके सामने आने वाली भारी कठिनाइयों और उन्हें सुरक्षित भारत लाने के लिए सरकार द्वारा प्रदान की गई मदद के बारे में बात की।
पीएमओ के मुताबिक, उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम के महत्व और समुदाय के लिए इसके लाभों के बारे में भी बात की। उन्होंने भविष्य में भी उनके सामने आने वाले सभी मुद्दों और कठिनाइयों को हल करने के लिए उन्हें निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया। पीएम ने गुरू ग्रंथ साहिब को सम्मानित करने की परंपरा के महत्व के बारे में बात की, जिसके लिए अफगानिस्तान से गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप को वापस लाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। उन्होंने वर्षों से अफगानों से मिले अपार प्यार के बारे में बात की और काबुल की अपनी यात्रा को याद किया।