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Interview: 'पीएम अपने जैसे बुजुर्गों के स्वास्थ्य की चिंता करें', MP रंजीत रंजन ने कहा, चर्चा से भाग रही सरकार

Tue, 02 Dec 2025 08:13 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 02 Dec 2025 08:13 PM IST
सार

Ranjeet Ranjan Interview: संसद में एसआईआर, प्रदूषण, बेरोजगारी और दिल्ली धमाके पर विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा का आरोप है कि विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा। इस पर कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन से अमर उजाला ने बात की। आइए जानते हैं सांसद ने सवालों के जवाब में क्या-कुछ कहा।   

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prime minister modi worry health people like him MP Ranjit Ranjan says government running from discussion
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन - फोटो : एक्स-@Ranjeet4India

विस्तार

संसद में एसआईआर के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष सदन व्यवस्थित रूप से न चल पाने के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस बीच हमारे संवाददाता ने कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन से प्रमुख मुद्दों पर बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश- 

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प्रश्न- रंजीत रंजन जी, संसद व्यवस्थित तरीके से नहीं चल पा रही है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष सदन को नहीं चलने दे रहा है। क्या कहेंगी?  
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उत्तर- राजनीति विज्ञान की प्राथमिक कक्षा का छात्र भी यह जानता है कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष पर होती है। एसआईआर, दिल्ली बम धमाके में केंद्र सरकार की विफलता, दिल्ली सहित पूरे देश में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति और पूरे देश में बेरोजगारी की समस्या ऐसे मुद्दे हैं जिस पर पूरा देश सरकार से जवाब चाहता है। लेकिन सरकार अपनी असफलता छिपाने के लिए चर्चा नहीं कराना चाहती है। यही कारण है कि एक सोची-समझी रणनीति के अंतर्गत वह विवाद खड़े कर सदन ठप कर रही है। लेकिन लोकतंत्र में यह स्वीकार नहीं किया जा सकता।        
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प्रश्न- पीएम ने आरोप लगाया है कि विपक्ष अपनी हार से नहीं उबर पाया है, हार की हताशा में वह सदन में चर्चा नहीं, हंगामा करने का प्रयास करता है। 
उत्तर- हम चुनाव हार गए हैं तो क्या प्रधानमंत्री सवालों के जवाब नहीं देंगे? क्या हमें सवाल पूछने का अधिकार नहीं है? भाजपा चुनाव जीत रही है तो क्या वह देश की जनता के सवालों के जवाब नहीं देगी? देखिए, कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही है, लेकिन उसने कभी जनता के सवालों से दूरी नहीं बनाई। हमारे समय में संसद खूब चली और सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के हर सांसद ने सरकार से सवाल किए। लेकिन अब सरकार अपनी मनमर्जी करने पर उतारू है। वह दिखाने के लिए संसद सत्र तो आयोजित कर रही है, लेकिन वह चर्चा में भाग नहीं लेना चाहती, इसीलिए जानबूझकर हंगामा खड़ा किया जा रहा है।   


प्रश्न- प्रदूषण की स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आप लगातार इस विषय को उठा रही हैं। 
उत्तर- मैं केवल यह कहना चाहती हूं कि कुछ विषय राजनीति से परे होने चाहिए। दिल्ली में 2.5 से तीन करोड़ लोग रह रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। लोग गंभीर प्रदूषण से मर रहे हैं। उनसे सांस नहीं लिया जा रहा है। लोगों की आंखों में जलन हो रही है। बीमार, बुजुर्ग लोगों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। डॉक्टर लोगों से दिल्ली छोड़कर चले जाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन सरकार कोई उपाय करने की बजाय केवल चुनाव-चुनाव खेलती रहती है। क्या इस पर देश उनसे जवाब नहीं मांगेगा? 

मैं कहना चाहती हूं कि प्रधानमंत्री बुजुर्ग हो गए हैं। हमें उनके स्वास्थ्य की चिंता है। लेकिन वे प्रधानमंत्री आवास में महंगे एयर प्यूरीफायर लगाकर साफ हवा में सांस ले रहे हैं, लेकिन दूसरे बुजुर्ग लोगों के पास यह सुविधा नहीं है। बीमारों-बच्चों के पास महंगे-महंगे एयर प्यूरीफायर खरीदने की क्षमता नहीं है। प्रधानमंत्री को दिल्ली में रह रहे अपने जैसे लाखों बुजुर्गों के स्वास्थ्य की चिंता करनी चाहिए। यदि सिंगापुर जैसे छोटे देश अपने नागरिकों को साफ हवा दे सकते हैं तो भारत यही काम क्यों नहीं कर सकता। सरकार बार-बार हर मामले में चीन से आगे निकलने की बात करती रहती है। लेकिन वह वातावरण की शुद्धि के मामले में चीन का मुकाबला क्यों नहीं करती? यदि चीन अपने इतने बड़े देश में अपने नागरिकों को साफ हवा दे सकता है तो हम क्यों नहीं कर सकते। मैं कहना चाहती हूं कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार इस गंभीर मुद्दे पर सबसे बात करे और हल निकाले। अरे प्रधानमंत्री जी, जब लोग ही नहीं रहेंगे तो राजनीति किस पर करेंगे? इस गंभीर समस्या का इलाज खोजिए।         

प्रश्न- एसआईआर विपक्ष का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। क्या जब तक इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी, कोई सहमति नहीं बनेगी, तब तक संसद नहीं चलेगी?   
उत्तर- हमारा सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि सरकार चर्चा से भाग क्यों रही है? एसआईआर के कारण बंगाल, यूपी से लेकर असम तक बीएलओ की जान जा रही है। क्या वे हमारे देश के नागरिक नहीं हैं? क्या हमें उनकी चिंता नहीं करनी चाहिए? आखिर एसआईआर कराने की इतनी हड़बड़ी क्यों है? हम चाहते हैं कि सरकार इस पर देश की चिंताओं का जवाब दे।      

प्रश्न- प्रश्न यह भी तो है कि बिहार में एसआईआर पूरी हो गई, लेकिन एक भी बीएलओ ने अपनी जान नहीं दी। दूसरी जगहों पर ये घटनाएं क्यों हो रही हैं? 
उत्तर- आखिर इस प्रश्न का उत्तर कहां मिलेगा। संसद ही इसका सबसे उचित पटल होती है। वहीं पर इस पर चर्चा होनी चाहिए और इसके जवाब तलाशे जाने चाहिए। 

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