PDS तंत्र को भ्रष्टाचार मुक्त करने की कमान खुद संभालेंगे PM, मुख्य सचिवों की लेंगे क्लास
मोदी सरकार के चार साल पूरे होने के करीब है। मई, 2014 से लेकर अब तक पीडीएस को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए केंद्र ने कई अहम कदम उठाए। इसमें फेयर प्राइस शॉप (एफपीएस), राशन कार्ड डिजिटलाइजेशन, आधार से राशन कार्ड जोड़ना, खाद्यान्नों का ऑनलाइन आवंटन, टोल फ्री नंबर, ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था और राशन सब्सिडी सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित किया जाना शामिल है।
केंद्र ने इन व्यवस्थाओं को लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया था जिसमें कई राज्यों में पीडीएस को कंप्यूटरीकृत करने में देरी और राशन सब्सिडी सीधे खाते में मुहैया कराने की दिक्कतें बड़ी अड़चन बन रही हैं।
अप्रैल तक 21 राज्यों में पीडीएस आपूर्ति श्रृंखला कंप्यूटरीकृत हो पाई जबकि पूरे देश में दिसंबर, 2017 तक यह काम पूरा किया जाना था। 2014 में सिर्फ 9 राज्य इस व्यवस्था को लागू कर पाई थीं। राशन सब्सिडी की पायलट परियोजना पॉन्डिचेरी, दादरा नागर हवेली और चंडीगढ़ में लागू की गई। इसके बाद क्षेत्रीय प्रशासन ने इस व्यवस्था में तमाम दिक्कतों पर केंद्र से संपर्क किया।
पीडीएस को कंप्यूटरीकृत करने में तेजी
उपभोक्ता एवं खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कई बार राज्य सरकारों से पीडीएस को कंप्यूटरीकृत करने में तेजी लाने और राशन सब्सिडी पर चर्चा की। लेकिन हल नहीं निकला और राज्यों की लापरवाही जारी रही।
इसके मद्देनजर पीएम ने खुद कमान संभालने का निर्णय लिया। सूत्रों के मुताबिक 23 मई को होने वाली बैठक में मुख्य सचिवों से पीडीएस को कंप्यूटरीकृत करने में आ रही दिक्कतों समेत अन्य सवालों का सामना करना होगा।
माना जा रहा है कि सरकार साल के अंत तक इस व्यवस्था को अंजाम देना चाहती है। जबकि गत माह अप्रैल तक देश में 312825 एफपीएस खुल चुकी हैं जो 2014 मई में 5835 थीं। इसके अलावा सौ फीसद राशनकार्डों का डिजिटलाइजेशन हो चुका है।
करीब 83 प्रतिशत आधार को राशन कार्डों से जोड़ा जा चुका है। खाद्यान्न के ऑनलाइन आवंटन का लाभ 30 राज्यों को मिलना शुरू हो गया है। जबकि 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीडीएस के लिए टोल फ्री नंबर, ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था और निपटारे की व्यवस्था हो गई है।
गौरतलब है कि देश में 12 हजार करोड़ से अधिक फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए हैं। इससे सरकार को 17 हजार करोड़ रूपये की बचत हुई है। देश की 80 करोड़ आबादी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत पीडीएस के दायरे में आती है। इससे सरकारी खजाने पर करीब डेढ़ लाख करोड़ रूपये से ज्यादा खाद्य सब्सिडी का बोझ पड़ता है।