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काशी के मांझियों को संजीवनी दे गए पीएम मोदी
अजीत कुमार सिंह/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 02 May 2016 03:41 AM IST
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वाराणसी में ई-बोट पर पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पीएम नरेंद्र मोदी काशी के मांझियों को संजीवनी दे गए। पहली बार ऐसा हुआ जब कोई प्रधानमंत्री मांझियों के बीच पहुंचे। अस्सी घाट पर ई बोट वितरण कार्यक्रम से मांझी बेहद उत्साहित हैं।
अरसे से उपेक्षित यहां के मल्लाहों की 40 हजार की आबादी में एक नई आस जगी है। उनका कहना है कि अच्छी बात है कि सरकार उनके बारे में सोच रही है। नौका संचालन से जुड़े सभी मल्लाहों को ई बोट उपलब्ध हो जाए तो इससे न सिर्फ उनकी आजीविका का आधार मजबूत होगा बल्कि वह समाज की मुख्य धारा से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर पाएंगे। ई बोट से गंगा में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। काशी में करीब पांच हजार नाविक हैं।
वाराणसी जिले में सूजाबाद और डोमरी में मांझियों की सबसे बड़ी बस्ती है। इसके अलावा राजघाट, सरायमोहाना, गायघाट, मणिकर्णिका घाट और जैन घाट पर भी माझियों की छोटी-छोटी बस्तियां हैं। ये सभी परिवार जीवन यापन के लिए गंगा पर आश्रित हैं। इनमें करीब पांच हजार से अधिक परिवारों की आजीविका का आधार नौका संचालन है।
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करीब एक हजार से ज्यादा लोग विभिन्न घाटों पर टूरिस्ट गाइड की तरह सैलानियों को घूमाने या फिर मसाज आदि के काम में लगे हैं। सबसे अधिक करीब 20 हजार लोग मछली पालन के धंधे में लगे हैं। 40 हजार की आबादी में से करीब 80 प्रतिशत मांझी समुदाय के आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
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अरसे से उपेक्षित यहां के मल्लाहों की 40 हजार की आबादी में एक नई आस जगी है। उनका कहना है कि अच्छी बात है कि सरकार उनके बारे में सोच रही है। नौका संचालन से जुड़े सभी मल्लाहों को ई बोट उपलब्ध हो जाए तो इससे न सिर्फ उनकी आजीविका का आधार मजबूत होगा बल्कि वह समाज की मुख्य धारा से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर पाएंगे। ई बोट से गंगा में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। काशी में करीब पांच हजार नाविक हैं।
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वाराणसी जिले में सूजाबाद और डोमरी में मांझियों की सबसे बड़ी बस्ती है। इसके अलावा राजघाट, सरायमोहाना, गायघाट, मणिकर्णिका घाट और जैन घाट पर भी माझियों की छोटी-छोटी बस्तियां हैं। ये सभी परिवार जीवन यापन के लिए गंगा पर आश्रित हैं। इनमें करीब पांच हजार से अधिक परिवारों की आजीविका का आधार नौका संचालन है।
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करीब एक हजार से ज्यादा लोग विभिन्न घाटों पर टूरिस्ट गाइड की तरह सैलानियों को घूमाने या फिर मसाज आदि के काम में लगे हैं। सबसे अधिक करीब 20 हजार लोग मछली पालन के धंधे में लगे हैं। 40 हजार की आबादी में से करीब 80 प्रतिशत मांझी समुदाय के आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
अरसे से उपेक्षित 40 हजार की आबादी में जगी नई आस
अस्सी घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
बाढ़ के मौसम में जब प्रशासन नाव संचालन बंद करा देता हैं तब करीब दो महीने गुजारा कर पाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। कर्ज लेकर किसी तरह परिवार चलाते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को अस्सी घाट पर 11 नाविकों को ई बोट का वितरण किया।
ई बोट का वितरण कार्यक्रम कराने वाली संस्था ने नाविकों को बताया कि जल्द ही मझले आकार की नावों की जगह ई बोट का संचालन किया जाएगा। इससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा। वहीं पीएम मोदी ने नाविकों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।
मां गंगा निषाद राज सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद का कहना है कि मांझियों की लगातार उपेक्षा होती रही है। न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने उनके लिए कुछ किया। हमेशा उनका उत्पीड़न ही किया जाता रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी से उन्हें काफी उम्मीद है। गंगा में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही जरूरी है कि मांझियों के उत्थान के लिए भी समुचित योजनाएं बनाई जाएं।
वीरभद्र निषाद थे मोदी के प्रस्तावक
नरेंद्र मोदी ने वाराणसी संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव जीते हैं। नामांकन करते समय वीरभद्र निषाद, गिरधर मालवीय, पं. छन्नूलाल, बुनकर अशोक समेत चार लोग उनके प्रस्तावक थे। पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी का मांझी समाज के बीच यह पहला कार्यक्रम था।
ई बोट का वितरण कार्यक्रम कराने वाली संस्था ने नाविकों को बताया कि जल्द ही मझले आकार की नावों की जगह ई बोट का संचालन किया जाएगा। इससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा। वहीं पीएम मोदी ने नाविकों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।
मां गंगा निषाद राज सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद का कहना है कि मांझियों की लगातार उपेक्षा होती रही है। न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने उनके लिए कुछ किया। हमेशा उनका उत्पीड़न ही किया जाता रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी से उन्हें काफी उम्मीद है। गंगा में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही जरूरी है कि मांझियों के उत्थान के लिए भी समुचित योजनाएं बनाई जाएं।
वीरभद्र निषाद थे मोदी के प्रस्तावक
नरेंद्र मोदी ने वाराणसी संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव जीते हैं। नामांकन करते समय वीरभद्र निषाद, गिरधर मालवीय, पं. छन्नूलाल, बुनकर अशोक समेत चार लोग उनके प्रस्तावक थे। पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी का मांझी समाज के बीच यह पहला कार्यक्रम था।