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India: 55 देशों के लिए यह है अगले 80 दिनों की रणनीति! 30 नवंबर तक तय हो जाएगा कि कैसे टूटेगा चीन का वर्चस्व

Sun, 10 Sep 2023 06:57 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 10 Sep 2023 06:57 PM IST
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सार
भारत के पास जी20 की अध्यक्षता के अब 80 दिन बचे हैं। आधिकारिक तौर पर 1 दिसंबर से ब्राजील के पास जी-20 की अध्यक्षता की जिम्मेदारी आ जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी अगले 80 दिनों में इस बैठक के डिक्लेयरेशन पर मजबूती से काम करने की रणनीति बना रहे हैं। इसी दौरान चीन को बेअसर करने के लिए अफ्रीकन यूनियन में सबसे बड़ा कूटनीतिक और विकास का खाका तैयार होगा।  
 
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Prime Minister Modi is making a strategy to work strongly against China on G20 Declaration in the next 80 days
जी 20 में शामिल हुआ अफ्रीकन यूनियन - फोटो : Social Media

विस्तार

भारत की जिस पहल पर 55 देशों के समूह अफ्रीकी यूनियन को जी20 में शामिल किया गया है वहां के विकास का खाका अगले हफ्ते से ही खींचा जाना शुरू हो जाएगा। इसके लिए बाकायदा विदेश मंत्रालय से लेकर अन्य संबंधित मंत्रालय और जी20 के शेरपा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि जी20 देश में शामिल विकसित देशों की ओर से दिया जाने वाला फंड अभी अफ्रीकन यूनियन के देशों में सही तरीके से वितरित नहीं हो पा रहा है। भारत की सलाह पर जी-20 समूह में शामिल यह सभी विकसित देश अफ्रीकन यूनियन के सभी 55 देश में बेहतर तालमेल के साथ फंड का वितरण करेंगे। इसके साथ ही चीन के एक तरफ अपने फायदे के लिए इन देशों में किए जाने वाले निवेश और दिए जाने वाले लोन को भी भारत सधी हुई रणनीति के साथ बेअसर करेगा। 


 
G20 देश के समूह की बैठक के अहम फैसलों में अफ्रीकन यूनियन के 55 देश को शामिल किया जाना सबसे महत्वपूर्ण रहा है। भारत के पूर्व विदेश सचिव रहे अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि जिस तरीके से भारत ने अफ्रीकन यूनियन को जी20 समूह का हिस्सा बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, अब उसकी उतनी ही बड़ी भूमिका उन देशों के विकास  की भी होने वाली है। कठुआ कहते हैं कि इस तरह की बैठकों में होने वाले डिक्लेयरेशन के महत्वपूर्ण बिंदुओं को जल्द से जल्द अमल में लाना उस देश की अध्यक्षता की सफलता कहलाती है जिस देश में ऐसी बैठक हुई हो। इसलिए भारत की यह पूरी कोशिश होगी कि जल्द से जल्द कम से कम जी20 में शामिल किए गए अफ्रीकन यूनियन के देशों में विकास की शुरुआत की जा सके। जानकारी के मुताबिक अब इस पूरे मामले में जल्द से जल्द पूरी रूपरेखा तय करके अफ्रीकन यूनियन के देशों में सबसे पहले विकास का पूरा खाका खींचा जाना शुरू कर दिया जाएगा। 

 
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अब जो कोशिश होगी उसमें महत्वपूर्ण भूमिका चीन को अफ्रीका के देशों में किए जाने वाले निवेश को न सिर्फ बेअसर करने की होगी बल्कि भारत की भूमिका को बेहतर तरीके से उभारने की भी होगी। विदेशी मामलों के जानकार अरुण सिन्हा कहते हैं कि वैसे तो चीन भी अफ्रीकन यूनियन के देशों को अपने आश्वासन और भरोसे का हवाला देगा कि उसकी सहमति से यहां के 55 देश का समूह जी20 में शामिल हुआ है। ऐसे में भारत की अब महत्वपूर्ण भूमिका सामने आनी तय है। सिन्हा कहते हैं कि आधिकारिक तौर पर 30 नवंबर तक भारत जी20 की अध्यक्षता वाला देश माना जाएगा। 
 
इस दौरान जब ब्राजील के हिस्से में 1 दिसंबर से जी20 की अध्यक्षता जाएगी उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से जी20 समूह के देशों से वर्चुअल रूप में मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं। भारतीय विदेश सेवा से जुड़े रहे अधिकारी अरुण सिन्हा का मानना है कि 80 दिनों की बची अध्यक्षता वाले अपने कार्यकाल में भारत उन सभी डिक्लेयरेशन के बिंदुओं को अमली जामा पहनाना शुरू कर देगा जिसकी विकास के लिहाज से सबसे ज्यादा आवश्यकता है। वह कहते हैं कि जब जी20 समूह के देशों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की वर्चुअल बैठक होगी तो उसमें बैठक में पास किए गए मुद्दों पर किए गए कामों की एक बार समीक्षा हो सकेगी। इसमें अफ्रीका के देशों में किए जाने वाले विकास का पूरा रोड मैप भी शामिल होगा।
 
ऐसे किया जाएगा चीन को बेअसर
भारत के पूर्व विदेश सचिव अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि चीन को बेअसर करने के लिए भारत उन विकसित देशों से मदद करने के लिए कहेगा जिनके पास विकासशील देशों के लिए फंड होता है। वह कहते हैं कि अमूमन इन विकसित देशों की ओर से जारी किए जाने वाला फंड उतना सुव्यवस्थित नहीं होता है जितना की होने की जरूरत है। ऐसे में अफ्रीकन यूनियन के देशों में विकास का पूरा खाका खींचकर उसको नई राह पर ले चलने के लिए भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी। 
 
पूर्व विदेश सचिव कहते हैं कि अब एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि जी20 के देशों में तो चीन भी शामिल है और चीन लगातार उनकी मदद भी कर रहा है, तो ऐसे में उसको बेअसर कैसे किया जाए। वह कहते हैं इसके लिए सबसे बेहतरीन तरीका यही होगा कि भारत न सिर्फ विकसित देशों से अफ्रीकन यूनियन के देशों में ज्यादा मदद करने के लिए कहे जहां चीन ने अपना बड़ा निवेश किया है बल्कि रूटीन में अफ्रीकन यूनियन के सभी 55 देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा रोड मैप तैयार करके अपने संसाधनों के जरिये मदद  शुरू करें। इसमें वित्तीय मदद के तौर पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विकसित देशों को शामिल किया जा सकेगा।
 
विदेशी और आर्थिक मामलों के जानकार और सेंटर फॉर इकोनामिक फोरम इन अफ्रीकन कॉन्टिनेंट के सदस्य अनूप तिहारा का कहना है कि चीन ने अफ्रीका के तकरीबन 40 से ज्यादा देशों में बीते कुछ सालों में 220 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। इसमें से ज्यादातर निवेश चीन ने अफ्रीका के गरीब मुल्कों में ऋण के तौर पर किया है। चीन ने अपने हितों को साधते हुए अफ्रीकन यूनियन के देशों में गरीब देश को और बदहाल स्थिति में पहुंचने के लिए आर्थिक घुसपैठ की है। अनूप कहते हैं कि चीन की इस स्थिति को अफ्रीकन यूनियन के देशों में बेअसर करने के लिए भारत को सधी हुई रणनीति के मुताबिक न सिर्फ विकसित देशों से मदद दिलानी होगी बल्कि जमीन पर उसको उतारने के लिए बड़ी योजना भी बनानी होगी। हालांकि आर्थिक मामलों के जानकार कहते हैं कि जब भारत के पास विश्व के एक बड़े हिस्से में अपनी छाप छोड़ने के लिए बड़ा मौका सामने आ रहा है तो वह न सिर्फ कूटनीतिक स्तर पर खुद को आगे भी रखेगा बल्कि साबित भी करेगा।

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