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कर्नाटक चुनावः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के घेरे में उलझे प्रधानमंत्री मोदी

Fri, 11 May 2018 12:29 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Fri, 11 May 2018 12:29 AM IST
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Prime Minister Modi enthralled around Congress president Rahul Gandhi

कांग्रेस पार्टी ने सधे तरीके से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने घेरे में उलझा लिया है। पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा 2019 में बहुमत मिलने के बाद प्रधानमंत्री का पदसंभालने की इच्छा जाहिर होने के बाद इस पर काफी प्रतिक्रिया आई है। 

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पार्टी के रणनीतिकारों के अनुसार यह कोई नई बात नहीं है और यह तो होना ही था। एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी की इस स्वीकारोक्ति ने नई बहस को छेड़ दिया है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के रणीनीतिकार इसे अपनी बड़ी सफलता मान रहे हैं।
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कोई नई बात नहीं

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष द्वारा खुद को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार प्रस्तुत करना कोई नई बात नहीं है। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी राहुल गांधी ने कहा था कि वह कोई भी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं। 
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने भी राहुल गांधी के बयान पर कहा है कि 2019 में कांग्रेस पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार राहुल गांधी ही होंगे। हालांकि पटेल ने इसके साथ जोड़ा कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा यह लोकसभा चुनाव के नतीजे पर ही निर्भर करेगा। पार्टी के रणनीतिकारों के मुताबिक राहुल गांधी ने 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव से करीब एक साल पहले खुलकर अपनी दावेदारी को स्वीकार किया है। यही इसका सही समय भी था।

राहुल ने क्यों कहा बनेंगे प्रधानमंत्री

Prime Minister Modi enthralled around Congress president Rahul Gandhi

कांग्रेस पार्टी को 2019 के आम चुनाव के लिए तैयार की जा रही पृष्ठभूमि में उन्हें कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसे सवाल का अंदाजा था।

सूत्र बताते हैं कि राहुल से पहले कई बार इस तरह के और दूसरी जिम्मेदारियों से जुड़े सवाल पूछने पर टालते रहे हैं, लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान से वह कोई संकोच नहीं कर रहे हैं। दरअसल राहुल पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच में नेतृत्व को लेकर पैदा हो रहे हर संशय को समाप्त करने के बाद राजनीतिक दलों के बीच में पनप रहे भ्रम को भी खत्म कर देना चाहते हैं। 

कांग्रेस अध्यक्ष राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी महासचिव अशोक गहलोत पर काफी भरोसा करते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की सलाह भी काफी मायने रखती है। 

पार्टी के करीब-करीब सभी वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अब नेतृत्व को लेकर किसी तरह का रंच मात्र संशय नहीं रहना चाहिए। यह स्थिति जहां पार्टी के भीतर की गुटबाजी को कम करेगी वहीं विरोधी दलों से मुकाबले की स्थिति साफ होगी।

अहम यह है कि राहुल ने यह घोषणा यूपीए चेयपर्सन सोनिया गांधी की कर्नाटक में जनसभा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों पर हमला बोले जाने के बाद की है। इसके पीछे एक बड़ी वजह कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मजबूत जनाधार बनाती दिखाई दे रही कांग्रेस की स्थिति है। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद जब कहते हैं कि राहुल के यह स्वीकार लेने में क्या बुराई है? हरिप्रसाद जैसे नेता ऐसे ही नहीं कह रहे हैं। दरअसल राहुल गांधी ने एक सोची समझी रणनीति के तहत खुद को प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया है।

भाजपा को उलझा लेना है मकसद

Prime Minister Modi enthralled around Congress president Rahul Gandhi

चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन है। नामांकन पत्र दाखिल होने के बाद जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कर्नाटक में चुनाव प्रचार शुरू किया है, भाजपा को इसका जबरदस्त फायदा मिला है। प्रधानमंत्री बार-बार कांग्रेस पर हमला बोलकर उसे अपने राजनीतिक गोल पोस्ट में घसीटना चाह रहे थे। 

कांग्रेस आईटी सेल के सूत्रों के अनुसार इस बार की रणनीति इसी से बचने की थी। इसके उलट कांग्रेस के नेता अपने राजनीति के मैदान पर प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं को लाकर घेरना चाहते थे। ताकि कांग्रेस अपने जनाधार को मजबूत बनाते हुए भाजपा को अधिक अवसर न दे। बताते हैं इसी रणनीति के तहत कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव प्रचार खत्म होने के तीन दिन पहले ही संवाददाता की तरफ से आए सवाल का सधा जवाब दे दिया।

इसके सामानांतर भाजपा के कर्नाटक प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर की टीम के सदस्यों का मानना है कि मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच में है। दोनों दलों के बीच में छिड़े राजनीतिक घमासान के बीच में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जद(एस) कुछ खास नहीं करती नजर आ रही है। 

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक भाजपा से जद(एस) की नजदीकी,  कुमार स्वामी की भाजपा नेताओं से भेंट, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देवगौड़ा की तारीफ ने जद(एस) के प्रभाव पर आसर डाला है। कांग्रेस के रणनीतिकार इसे दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय जैसी कहावत से जोड़ रहे हैं। बताते हैं इसलिए चुनाव प्रचार में जनता के बीच में कांग्रेस अपना वर्चस्व बनाए रखने की रणनीति पर चल रही है। 

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