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NEET अध्यादेश लाने पर राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

Sun, 22 May 2016 08:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 22 May 2016 08:50 PM IST
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President sought clarification from the Government on the NEET ordinance
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी - फोटो : ‌file photo

नीट पर अध्यादेश लाए जाने के मामले में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कानूनी सलाह मांगने के साथ केंद्र सरकार से भी स्पष्टीकरण मांगा है। राष्ट्रपति ने केंद्र से पूछा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सहमति जताने के बाद अचानक उसने यू टर्न क्यों ले लिया। अब स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सोमवार को राष्ट्रपति से मुलाकात कर अध्यादेश लाए जाने के कारणों की जानकारी देंगे।

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इस मुलाकात से पूर्व नड्डा ने नीट पर किसी तरह के असमंजस से इनकार करते हुए विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राज्यों की कुछ आपत्तियां थी। इसके अलावा सर्वदलीय बैठक में कई विपक्षी दलों ने भी चिंता जाहिर की थी।
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गौरतलब है कि शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में नीट के जरिए सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के संबंध में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक साल तक रोक के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी गई थी।
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नीट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक साल तक रोक के लिए लाए गए अध्यादेश पर राष्ट्रपति कानूनी सलाह ले रहे हैं। इस बीच उन्होंने इस संदर्भ में केंद्र से भी अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है। नड्डा ने कहा कि वह सोमवार को राष्ट्रपति से मिलकर अध्यादेश लाए जाने के कारणों की जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि नीट को लेकर कोई असमंजस नहीं है। प्रबंधन कोटे के तहत सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश नीट के जरिए ही होगा। उन्होंने कहा कि नीट दरअसल लागू हो गया है।

राज्य सरकारों की वहां चल रही परीक्षाओं, पाठ्यक्रमों की समानता और नीट परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा में लिखने का विकल्प संबंधी कुछ जायज चिंताएं हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्यों और सर्वदलीय बैठक में कई दलों ने इस संबंध में चिंता जाहिर की थी। अब इस मामले में राजनीति हो रही है।

राज्य बोर्ड के छात्रों को नुकसान की दी जा रही दलील
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक आदि राज्यों ने एनईईटी का विरोध किया है। तमिलनाडु का कहना था वह दाखिले के लिए टेस्ट नहीं बल्कि मेरिट को आधार मानता है। ऐसे में यह लागू हुआ, तो 12वीं की परीक्षा देने वाले चार लाख छात्र इससे वंचित रह जाएंगे।

इसी तरह तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और यूपी ने भी अपनी दलील पेश की। राज्यों ने स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में अलग सिलेबस और भाषा समेत कई मुद्दों को लेकर नीट पर विरोध दर्ज कराया था। मंत्रियों ने कहा था कि राज्य बोर्ड के छात्रों के लिए एकल परीक्षा काफी मुश्किल होगी। केंद्रीय बोर्ड के छात्रों की तुलना में उनका नुकसान होगा।


24 जुलाई की परीक्षा पर अब भी असमंजस
नीट-2 की 24 जुलाई को निर्धारित परीक्षा पर अब भी असमंजस कायम है। राष्ट्रपति अगर इस अध्यादेश को मंजूरी नहीं देते हैं तो परीक्षा निर्धारित समय पर हो सकती है। लेकिन इससे पहले केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है, इस पर काफी कुछ निर्भर करेगा।


अध्यादेश को यदि राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तब केंद्र के और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए छात्रों को इस साल नीट परीक्षा देनी होगी। निजी कॉलेजों में घरेलू छात्रों के लिए रिजर्व सीटें नीट के तहत आएंगी।

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