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CRPF: सीआरपीएफ में राष्ट्रपति ने घटाया पांच सहायक कमांडेंट का रैंक, ये है वापस 'इंस्पेक्टर' बनाने की वजह

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 10 Jun 2023 02:33 PM IST
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सार
राष्ट्रपति के आदेशों में कहा गया है कि सहायक कमांडेंट 'मिनिस्ट्रियल' के राजपत्रित पद पर काम कर रहे, इन अधिकारियों को दोबारा से 'सूबेदार मेजर' बनाया गया है। ये अलग बात है कि मौजूदा समय में कई बलों से यह रैंक हट चुका है...
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President of india reduced the rank of five assistant commandant in CRPF
CRPF - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में पांच सहायक कमांडेंट को दोबारा से इंस्पेक्टर बना दिया गया है। करीब सवा तीन लाख की संख्या वाले अर्धसैनिक बल में रैंक घटाने की यह खबर चर्चा में है। हालांकि राष्ट्रपति के आदेशों में कहा गया है कि सहायक कमांडेंट 'मिनिस्ट्रियल' के राजपत्रित पद पर काम कर रहे, इन अधिकारियों को दोबारा से 'सूबेदार मेजर' बनाया गया है। ये अलग बात है कि मौजूदा समय में कई बलों से यह रैंक हट चुका है। इसे इंस्पेक्टर के समकक्ष ही माना जाता है। राष्ट्रपति का आदेश 17 अप्रैल को जारी हुआ था, लेकिन बल मुख्यालय ने पांच जून को ये आदेश जारी किए हैं।

सूत्रों के मुताबिक जब से ये आदेश जारी हुए हैं, सीआरपीएफ में हर कोई इसका कारण जानना चाहता है। अमूमन से इस तरह के आदेश कम ही देखने को मिलते हैं। प्रेसिडेंशियल ऑर्डर से रिवर्सन, इससे हर कोई हैरान है। जिन अफसरों को रिवर्ट किया गया है, उनमें सहायक कमांडेंट (मिनिस्ट्रियल) डी.सदाशिवुदू, पबन मेश, चंद्र प्रकाश, गौतम खाखेलरी और मुकेश कुमार शामिल हैं। सहायक कमांडेंट डी.सदाशिवुदू को प्रेसिडेंशियल ऑर्डर 21 अप्रैल को दिया गया तो उन्हें इसी तिथि से सूबेदार मेजर के पद पर रिवर्ट कर दिया गया है। इसी तरह पबन मेश को 15 मई से, चंद्र प्रकाश को 26 अप्रैल से, गौतम खाखेलरी को 27 अप्रैल से और मुकेश कुमार को भी 27 अप्रैल से वापस सूबेदार रैंक पर रिवर्ट किया गया है। बल मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि इसकी कई वजह हो सकती हैं। इनमें से एक जो पुख्ता कारण हो सकता है, वह कामकाज ठीक न होना है।

जब सूबेदार मेजर रैंक से इन अधिकारियों को सहायक कमांडेंट (मिनिस्ट्रियल) में पदोन्नत किया गया, तो उसके बाद इनकी छह माह की परिवीक्षा अवधि रहती है। इस अवधि में इनका कामकाज देखा जाता है। ये जिस किसी दफ्तर यानी ग्रुप सेंटर, सेक्टर हेडक्वार्टर या बल मुख्यालय में काम करते हैं तो वहां के हेड द्वारा इनके कामकाज की प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाती है। अगर वह रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है तो उन्हें दोबारा से पहले वाले पद पर भेज दिया जाता है। यानी राजपत्रित अधिकारी से ये दोबारा अधीनस्थ अधिकारी बन गए।

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