जीएसटी विधेयक को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी, रफ्तार पकड़ेगा बिल
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वस्तु एवं सेवा कर -जीएसटी- विधेयक को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिल गई है। प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसी के साथ अगले साल एक अप्रैल से देश भर में वस्तु एवं सेवा कर -जीएसटी- प्रणाली को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
जीएसटी के लिए संसद से संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद इसे राज्य की विधानसभाओं के समर्थन के लिए भेजा गया था। इसे 16 राज्यों की विधानसभाओं में मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के पास इसको हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था। कुछ दिन पहले ही ओडिशा विधानसभा ने जीएसटी विधेयक को पास कर दिया था, जिसके बाद ऐसा करने वाला वह देश का 16वां राज्य बन गया था। अब अरुणाचल और आंध्र ने भी इसका समर्थन कर दिया है।
विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने के लिए 50 फीसदी राज्यों की विधानसभा में इसका पास होना जरूरी था। हालांकि एक दिन पहले ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि इसे लागू करने की राह में कुछ चुनौतियां हैं लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इससे पार पा लिया जाएगा।
2017 तक लागू हो सकता है बिल
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी को एक अप्रैल 2017 से लागू करने के लिए मंत्रालय की तैयारी चल रही है। इसके लिए आईटी ढांचा -जीएसटी नेटवर्क- बनाने का काम चल रहा है। इस नेटवर्क पर काम कैसे होगा, इस बारे में केंद्र और राज्य के अप्रत्यक्ष विभाग के अधिकारियों का प्रशिक्षण चल रहा है। उनकी मानें तो जीएसटी को लागू करने की दिशा में मंत्रालय पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से पहले चल रहा है।
मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि अब राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद जीएसटी काउंसिल की अधिसूचना जारी की जाएगी। गौरतलब है कि जीएसटी के बारे में सभी चीजें तय करने का अधिकार इसी को है। जीएसटी काउंसिल ही टैक्स रेट और सेस तय करेगी। उसे ही यह अधिकार है कि किस चीज को इसके दायरे में रखा जाए, किसे छूट दी जाए।
संसद ने जीएसटी विधेयक को बीते 8 अगस्त को ही पारित कर दिया था। उसके बाद से सबसे पहले असम ने इसका समर्थन किया था।
आंध्र और अरुणाचल ने भी किया समर्थन
आंध्र और अरुणाचल विधानसभाओं ने बृहस्पतिवार को जीएसटी बिल का समर्थन कर दिया। आंध्र में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसके समर्थन में प्रस्ताव पेश किया तो अरुणाचल में यह कदम उप मुख्यमंत्री चोउना मीन ने उठाया।
18 राज्यों में जीएसटी को समर्थन
असम, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, नगालैंड, गुजरात, मिजोरम, तेलंगाना, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।
क्या है जीएसटी?
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं। इस बिल के लागू हो जाने पर हर वस्तु और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा।
टाइमलाइन
3 अगस्त, 2016 को राज्यसभा में पास।
8 अगस्त, 2016 को लोकसभा में पास।
01 अप्रैल 2017 से पूरे देश में एकसमान मूल्य वर्धित कर लगाने का प्रस्ताव है।