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AIJS: राष्ट्रपति बोलीं- अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के माध्यम से हो जजों की नियुक्ति, पिछड़ा वर्ग भी होगा मजबूत
Mon, 27 Nov 2023 05:19 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Mon, 27 Nov 2023 05:19 AM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संविधान दिवस के अवसर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची थी, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ भी उपस्थित थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) की स्थापना की जा सकती है, जो न्यायाधीश के पद के लिए प्रतिभाशाली युवाओं का चयन करे।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।
- फोटो : Twitter
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विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति योग्यता आधारित होनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है। बता दें, भारत में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर होती है, जिस पर कई बार सवालिया निशाना लगाए जा चुके हैं। ऐसे में राष्ट्रपति का यह सुझाव चर्चा का विषय बन चुका है।
कम प्रतिनिधित्व वाले समाज को भी आगे बढ़ने का अवसर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संविधान दिवस के अवसर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची थी, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ भी उपस्थित थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) की स्थापना की जा सकती है, जो न्यायाधीश के पद के लिए प्रतिभाशाली युवाओं का चयन करे। देश भर में जिस भी व्यक्ति को न्यायाधीश बन कर देश की सेवा करने की इच्छा है, उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार, एआईजेएस चुन सकता है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। इससे कम प्रतिनिधित्व वाले समाज को भी आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा।
एआईजेएस प्रतिभाशाली युवाओं का चयन करे
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि जिस तरह आईएएस-आईपीएस सहित तमाम अधिकारी पदों के लिए अखिल भारतीय परीक्षा होती है, वैसे ही एआईजेएस प्रतिभाशाली युवाओं का चयन करे। इससे देश के प्रति वफादार, ऊर्जावान, प्रतिभाशाली उम्मीदवार का चयन हो सकेगा। इसके अलावा, मुर्मू ने अदालती कार्यवाही के लाइव वेबकास्ट के पहल की सराहना की। विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में निर्णय प्रदान करने के पहल को भी सराहा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का ये पहल समाज को मजबूत करता है।
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न्यायपालिका में प्रतिभाओं को लाने के और प्रयास हों
राष्ट्रपति ने कहा, उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रतिभाशाली बच्चों को न्यायपालिका में आसानी से प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें केंद्रीय और राज्य के विश्वविद्यालयों, आईआईटी, आईआईएम में जाने और बच्चों के साथ बातचीत करने का मौका मिला है। इन संस्थानों में बहुत प्रतिभाशाली युवा हैं। इनमें से कई न्यायपालिका में भी आना चाहते हैं।
डॉ. आंबेडकर की 7 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय परिसर में डॉ. बीआर आंबेडकर की 7 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा एक वकील के गाउन से सजी हुई है और उसके हाथ में संविधान की एक प्रति है।
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कम प्रतिनिधित्व वाले समाज को भी आगे बढ़ने का अवसर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संविधान दिवस के अवसर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची थी, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ भी उपस्थित थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) की स्थापना की जा सकती है, जो न्यायाधीश के पद के लिए प्रतिभाशाली युवाओं का चयन करे। देश भर में जिस भी व्यक्ति को न्यायाधीश बन कर देश की सेवा करने की इच्छा है, उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार, एआईजेएस चुन सकता है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। इससे कम प्रतिनिधित्व वाले समाज को भी आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा।
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एआईजेएस प्रतिभाशाली युवाओं का चयन करे
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि जिस तरह आईएएस-आईपीएस सहित तमाम अधिकारी पदों के लिए अखिल भारतीय परीक्षा होती है, वैसे ही एआईजेएस प्रतिभाशाली युवाओं का चयन करे। इससे देश के प्रति वफादार, ऊर्जावान, प्रतिभाशाली उम्मीदवार का चयन हो सकेगा। इसके अलावा, मुर्मू ने अदालती कार्यवाही के लाइव वेबकास्ट के पहल की सराहना की। विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में निर्णय प्रदान करने के पहल को भी सराहा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का ये पहल समाज को मजबूत करता है।
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न्यायपालिका में प्रतिभाओं को लाने के और प्रयास हों
राष्ट्रपति ने कहा, उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रतिभाशाली बच्चों को न्यायपालिका में आसानी से प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें केंद्रीय और राज्य के विश्वविद्यालयों, आईआईटी, आईआईएम में जाने और बच्चों के साथ बातचीत करने का मौका मिला है। इन संस्थानों में बहुत प्रतिभाशाली युवा हैं। इनमें से कई न्यायपालिका में भी आना चाहते हैं।
डॉ. आंबेडकर की 7 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय परिसर में डॉ. बीआर आंबेडकर की 7 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा एक वकील के गाउन से सजी हुई है और उसके हाथ में संविधान की एक प्रति है।