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केंद्रीय महकमों में बड़े कैडर रिव्यू की तैयारी, अर्धसैनिक बलों के इस प्रपोजल को लेकर गृह मंत्रालय में हो रहा विचार

Tue, 13 Oct 2020 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 13 Oct 2020 05:52 PM IST
सार

मौजूदा समय में आर्मी, कॉस्ट अकाउंट्स सर्विस, भारतीय आयुद्ध कारखाना, रेलवे स्वास्थ्य सेवा, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और कई दूसरे महकमे कैडर रिव्यू की प्रक्रिया में शामिल हैं...

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Preparations for a large cadre review in the central ोffices, the proposal of the paramilitary forces is being discussed in the Ministry of Home Affairs
गृह मंत्रालय - फोटो : ANI (File)

विस्तार

केंद्र सरकार अपने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में बड़े स्तर पर कैडर रिव्यू करने जा रही है। अभी तक 'कैडर रिव्यू कमेटी' 29 सेवाओं के कैडर रिव्यू प्रपोजल को मंजूरी दे चुकी है। उसके बाद कैबिनेट सचिवालय ने भी इस फाइल पर अपनी मुहर लगा दी है। मौजूदा समय में आर्मी, कॉस्ट अकाउंट्स सर्विस, भारतीय आयुद्ध कारखाना, रेलवे स्वास्थ्य सेवा, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और कई दूसरे महकमे कैडर रिव्यू की प्रक्रिया में शामिल हैं।

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केंद्रीय अर्धसैनिक बल, एनएसजी और असम राइफल में मेडिकल कैडर को लेकर अहम बदलाव किए जा रहे हैं। इनके अलावा बीएसएफ, सीआरपीएफ और दूसरे अर्धसैनिक बलों ने भी अपने प्रपोजल गृह मंत्रालय को भेजे हैं। खास बात है कि इस बार इन बलों के तकनीकी स्टाफ ने अलग से अपना प्रपोजल मंत्रालय को सौंपा है। इसमें यह मांग की गई है कि तकनीकी कैडर में सामान्य ड्यूटी वाले अफसरों को तैनात न किया जाए। वजह, सामान्य ड्यूटी वाले अफसर के पास पर्याप्त अनुभव न होने के कारण संबंधित शाखा की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
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केंद्र सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे कैडर रिव्यू प्रपोजल को लेकर किसी तरह की ढिलाई न बरतें। कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के जरिए फाइल को आगे बढ़ाया जाए। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पास मौजूदा समय में इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री हेल्थ सर्विस (आईओएफएचएस), सेंट्रल हेल्थ सर्विस, सेंट्रल जियोलॉजिकल सर्विस ग्रुप ए, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया केमिकल सर्विस ग्रुप ए, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जियो फिजिकल ग्रुप ए, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया इंजीनियरिंग सर्विस ग्रुप ए, इंडियन कॉपोरेट लॉ सर्विस और इंडियन रेलवे हेल्थ सर्विस का प्रपोजल विचाराधीन है।
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कैडर रिव्यू कमेटी ने इंडियन रेडियो रेग्यूलेटरी सर्विस का प्रपोजल मंजूर कर लिया है। अब इसे कैबिनेट सचिवालय की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इंडियन डिफेंस एस्टेट सर्विस, इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस, सर्वे ऑफ इंडिया ग्रुप 'ए' और इंडियन कोस्ट अकाउंट सर्विस का प्रपोजल कैडर रिव्यू कमेटी के पास विचाराधीन है। हालांकि इस कमेटी की बैठक हो चुकी है। जल्द ही यहां से इसे आगे भेज दिया जाएगा। मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस आईडीएसई, सर्वेयर आर्किटेक्ट और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स की कैडर रिव्यू रिपोर्ट डीओपीटी में जमा कराई गई है। इस प्रपोजल पर विचार किया जा रहा है।

मेडिकल कैडर ऑफ सीएपीएफ, एनएसजी और असम राइफल का प्रपोजल कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के पास स्पष्टीकरण के लिए भेजा गया है। इसके बाद वह दोबारा से डीओपीटी में जमा होगा। इंडियन इकोनॉमिक सर्विस और इंडियन स्किल डेवलपमेंट सर्विस का केस भी कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के पास विचाराधीन है। इससे पहले 29 विभागों के कैडर रिव्यू को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी दी गई है।

इनमें इंडियन सिविल अकाउंट सर्विस, सेंट्रल पावर इंजीनियरिंग सर्विस, इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री सर्विस, इंडियन सिविल अकाउंट्स सर्विस, बॉर्डर रोड इंजीनियरिंग सर्विस, डिफेंस एयरोनॉटिकल क्वॉलिटी एश्योरेंस सर्विस, इंडियन ट्रेड सर्विस, भारतीय सांख्यिकी सेवा, इंडियन स्किल डेवलपमेंट सर्विस, इंडियन पोस्टल सर्विस, सेंटल रिजर्व पुलिस फोर्स, इंडियन इंर्फोमेशन सर्विस, बीएसएफ, पीएंडटी अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस, एमएसएमई आईईडीएस, इंडियन टेलीकॉम सर्विस और सेंट्रल इंजीनियरिंग सर्विस आदि केंद्रीय सर्विस शामिल हैं।

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तरफ से गृह मंत्रालय को प्रपोजल दिया गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशों पर इन बलों में नए सिरे से 21 जून 2021 तक कैडर रिव्यू होना है। इस संदर्भ में बीएसएफ और सीआरपीएफ सहित दूसरे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधियों ने अपना प्रपोजल जमा कराया है। बीएसएफ के एक अधिकारी का कहना है कि बल में कैडर पॉलिसी को तोड़ मरोड़ दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला था कि एक समान काम की प्रकृति वाले पदों पर दूसरे कैडर के कर्मियों को लगाया जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपे गए प्रपोजल में लिखा है कि बीएसएफ में आईटी, कम्युनिकेशन, मोटर ट्रांसपोर्ट, एयरविंग, लॉ, आर्मर और इंजीनियरिंग सेवा के पदों पर सामान्य ड्यूटी वाले अधिकारियों को लगाया गया है। प्रपोजल में कई तरह के उदाहरण भी दिए गए हैं। आरोप है कि अफसरों की मनमर्जी से कैडर पॉलिसी का उल्लंघन किया जा रहा है।


प्रपोजल में आईटीबीपी का जिक्र किया गया है, जहां पर बेहतरीन तरीके से इस कैडर पॉलिसी का पालन होता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि कैडर अफसरों के कई प्रपोजल आ चुके हैं। ओजीएएस के लिए नए सर्विस रूल्स बनाने पर विचार हो रहा है। चूंकि अदालत ने रिक्रूटमेंट रुल्स की भी समीक्षा करने के लिए कहा है, इसलिए अफसरों की एक कमेटी इस पर काम कर रही है।कैडर रिव्यू रिपोर्ट को तय समय से पहले ही तैयार कर लिया जाएगा।

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