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दूर होगी नौकरशाही की दिक्कतें: एमका की कमान निजी हाथों में देने की तैयारी, वायुसेना को समय पर मिल सकेंगे विमान

Thu, 05 Feb 2026 05:21 AM IST
शुभम कुमार आशुतोष भाटिया
आशुतोष भाटिया Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 05 Feb 2026 05:21 AM IST
सार

भारत के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एमका की जिम्मेदारी HAL की बजाय निजी कंपनियों को देने की तैयारी है। लक्ष्य है देरी घटाना और 2035 तक उत्पादन शुरू करना। टाटा, L&T और भारत फोर्ज शॉर्टलिस्ट हैं। 

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Preparations are underway to hand over the command of AMCA to private hands News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एमका) की परियोजना की कमान सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की बजाय निजी क्षेत्र के हाथों में सौंपे जाने की तैयारी है। इस रणनीतिक फैसले का एक कारण यह भी है कि एचएएल अपने तेजस मार्क 1ए जैसे भारी भरकम ऑर्डर समय पर पूरा कर सके। एमका को निजी हाथों में सौंपने से आपूर्ति में लगने वाला वाला समय कम हो सकता है।

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जल्द मिल सकता है एमका
एमका विमान के लिए सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक पहला प्रोटोटाइप और 2035 तक उत्पादन शुरू करने का रहा है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से इसमें तेजी आने की उम्मीद है। निजी कंपनियों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला तक सीधी पहुंच सरकारी लेटलतीफी कम करेगी। इससे विमान के थोड़ा पहले मिलने की संभावना बन रही है। परियोजना के तेजस की तरह सालों-साल लटकने का जोखिम जरूर कम हो गया है। निजी कंपनियां विदेशी इंजन निर्माताओं के साथ संयुक्त उपक्रम लगाने में ज्यादा लचीली होती हैं। हालांकि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की स्टील्थ तकनीक और इंजन का विकास एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
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निजी कंपनियों की क्षमताएं
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) के पास लॉकहीड मार्टिन जैसे वैश्विक विमानन दिग्गजों के साथ काम करने का अनुभव है। यह कंपनी फिलहाल बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के लिए लड़ाकू विमानों के ढांचे बना रही है। कंपनी के पास सी-295 एयरक्राफ्ट की पूरी असेंबली लाइन बनाने की क्षमता भी है। इधर एल एंड टी  के पास परमाणु पनडुब्बियों व मिसाइल प्रणालियों की जटिल संरचना और इंजीनियरिंग का अनुभव है। कल्याणी समूह की भारत फोर्ज वैश्विक स्तर पर फोर्जिंग और उच्च-ग्रेड धातुओं की विशेषज्ञ है। यह विशेषता इंजन और एयरफ्रेम के अन्य हिस्सों के लिए जरूरी है।
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विशेषज्ञ राय
पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक रवि कुमार गुप्ता ने अमर उजाला से कहा कि निजी क्षेत्र के पास नौकरशाही संबंधी दिक्कतें कम होती हैं। एचएएल का भले निगमीकरण कर दिया गया हो, पर वह नौकरशाही से आजाद नहीं है। निजी कंपनियां सामान खरीदने में स्वतंत्र होंगी। इसलिए समयसीमा का पालन कर पाएंगी। हालांकि उन्होंने कहा कि तीन में से किसी एक कंपनी को चुनने की बजाय कम से कम दो कंपनियों को चुनना चाहिए। इससे प्रतिस्पर्धा के कारण दोनों का प्रदर्शन बेहतर होगा। रक्षा मंत्रालय में भी समय सीमा बांधी जानी चाहिए कि निश्चित समय में आपूर्ति के ऑर्डर देने होंगे।

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