पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ गए 'कर सहायक': केंद्र सरकार के विभाग सीबीआईसी में 28 मार्च से हो रही है हड़ताल की तैयारी
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केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) में कर सहायक के पद पर चयनित कार्मिक, पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ते जा रहे हैं। इसके चलते कर सहायकों में भारी रोष व्याप्त है। सीबीआईसी में टैक्स असिस्टेंट को पहले 3 साल में प्रमोशन मिलती थी, अब उसमें 10 साल लग रहे हैं। मौजूदा नियमों के अंतर्गत टैक्स असिस्टेंट को अगर इंस्पेक्टर के पद पर पहुंचना है तो उसे लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इस तरह की प्रक्रिया में कर सहायकों को पूरे सेवाकाल के दौरान मुश्किल से दो या तीन प्रमोशन ही मिलेंगे। कर सहायकों ने इस बाबत अपने विभाग और डीओपीटी को अवगत कराया है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कार्मिकों का कहना है कि वे अपने हकों की लड़ाई के लिए 28 मार्च से हड़ताल पर जाएंगे। कार्मिकों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए 28 सितम्बर 2015 से लेकर अब तक कार्यालय परिषद जेसीएम की बैठक नहीं हुई है।
सरकार उन्हें डरा धमका रही है...
बता दें कि केंद्र सरकार में सीएसएस यानी केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारी भी गत दिनों नॉर्थ ब्लॉक में पहुंच गए थे। सैंकड़ों अधिकारी कार्मिक, लोक शिकायत मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के कार्यालय के बाहर बैठ गए। उनके पीए ने अधिकारियों को आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों का समाधान बहुत जल्द कर दिया जाएगा। इसके बाद 41 आयुध कारखानों को 7 निगमों में परिवर्तित करने के खिलाफ अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ भी केंद्र सरकार के खिलाफ मैदान में कूद गया है। महासचिव सी.श्रीकुमार ने कहा, केंद्र की निजीकरण पॉलिसी के खिलाफ 28-29 मार्च को 41 आयुध कारखानों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होगा। इस बाबत रक्षा मंत्रालय को अवगत करा दिया गया है। कर सहायकों का कहना है कि सरकार उन्हें ओएम जारी कर डरा धमका रही है। इस बात का जवाब देने के लिए कोई भी तैयार नहीं है कि आज तक एक भी जेसीएम क्यों नहीं हो सकी है।
'वन टाइम रिलेक्सेशन' मिल जाए तो बन सकती है बात...
प्रमोशन का मुद्दा कुछ हल हो सकता है, बशर्ते वन टाइम रिलेक्सेशन मिल जाए। इससे प्रमोशन के लिए लगने वाला समय आधा रह जाएगा। सीबीआईसी भी इस मामले में अपने कार्मिकों के साथ हैं, लेकिन डीओपीटी टालमटोल की मुद्रा में दिखाई पड़ रहा है। ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन ने मेरिट बेस्ड प्रमोशन का प्रपोजल तैयार कर डीओपीटी को भेजा है। राजस्व सचिव ने भी इस प्रपोजल को अपनी मंजूरी दी है।अगर डीओपीटी, इसे अपनी स्वीकृति दे देती है तो प्रमोशन लेने के लिए दस साल का लम्बा इंतज़ार कम होकर पांच वर्ष का रह जाएगा। कई माह से यह फाइल डीओपीटी के पास है, मगर अभी तक वहाँ से कोई जवाब नहीं आया है। कर्मचारी चयन आयोग 'एसएससी' की सीजीएल की परीक्षा पास करने के बाद वित्त विभाग के अंतर्गत केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क 'सीबीआईसी' और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड 'सीबीडीटी' में टैक्स असिसेंट के पद पर नियुक्ति होती है। सीबीआईसी और सीबीडीटी में इस पद के लिए एक समान योग्यता रखी गई है। भर्ती एजेंसी और परीक्षा का स्वरुप भी एक ही है, लेकिन बात जब प्रमोशन की आती है तो 'सीबीआईसी' के टैक्स असिसेंट, 'सीबीडीटी' के मुकाबले पिछड़ जाते हैं।
कामकाज एक जैसा, मगर प्रमोशन के नियम अलग हैं...
टैक्स असिस्टेंट के पद पर नियुक्त हुआ व्यक्ति तीन साल में सीनियर टैक्स असिस्टेंट बनता है। उसके बाद इंस्पेक्टर बनने का नंबर आता है। दोनों ही विभागों में टैक्स असिस्टेंट के पदों पर चयन एक ही परीक्षा और मानकों के जरिए होता है। खास बात तो ये है कि दोनों नियुक्तियों में काम भी एक ही जैसा होता है, लेकिन प्रमोशन के नियम अलग-अलग हैं। इसके चलते कार्मिकों के बीच भेदभाव की भावना उत्पन्न हो गई है। सीबीआईसी में तो अब दस साल में पहली प्रमोशन मिलती है। ऐसे में टैक्स असिटेंट के लिए सहायक आयुक्त, अधीक्षक या उपायुक्त के पद तक पहुंचने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। इस तरह की परेशानी साल 2015 से शुरु हुई है। सीबीआईसी ने सीनियर टैक्स असिस्टेंट का पद नाम बदलकर उसे 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' कर दिया था। इस पद तक पहुंचने के लिए कर्मचारी को 10 साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। दूसरी तरफ, सीबीडीटी' में टैक्स असिस्टेंट को 3 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही सीनियर टैक्स असिस्टेंट की प्रमोशन मिल जाती है। इतना ही नहीं, सीबीडीटी में सीनियर टैक्स असिस्टेंट बनने वाले कार्मिक को दो साल बाद इंस्पेक्टर के पद पर तरक्की दे दी जाती है। सीबीआईसी में कार्यरत टैक्स असिटेंट को 10 साल में केवल एक प्रमोशन मिल रहा है।
'प्रोटेक्शन क्लॉज' का प्रावधान नहीं किया गया...
इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन के संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी का कहना है, डीओपीटी नियमों में यह बात कही गई है कि कोई टैक्स असिस्टेंट पहले से सर्विस में है तो उस पर प्रोटेक्शन क्लॉज के तहत पुराने विभागीय नियम ही लागू होंगे। साल 2015 में जब सीबीआईसी के लिए नए नियम बनाए जा रहे थे तो उनमें 'प्रोटेक्शन क्लॉज' का प्रावधान ही नहीं किया गया। भर्ती नियमों में यह संशोधन कराने की मांग को लेकर डीओपीटी को पांच बार फाइल भेजी गई है। डीओपीटी ने हर बार बिना किसी लॉजिक के फाइल को रिजेक्ट कर दिया। एसोसिएशन के मुताबिक, सक्सेसिव लेबल्स पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट नहीं होना चाहिए। डीओपीटी एवं सीबीआईसी ने इस नियम का भी पालन नहीं किया। कार्मिकों को कम से कम आधे समय में पदोन्नति मिल जाए यानी वे दस की बजाए पांच साल में पहली प्रमोशन तक पहुंच सकें, इसके लिए 'एक बार 'छूट अर्थात वन टाइम रिलेक्सेशन मिल सकता है। गत नवंबर में राजस्व सचिव ने इसे अपनी मंजूरी दे दी थी। उसके बाद फाइल डीओपीटी के पास भेजी गई। वहां से कोई जवाब नहीं मिला। अगर वन टाइम रिलेक्सेशन मिलता है तो प्रमोशन के लिए लगने वाला समय आधा हो सकता है। सरकार को अपनी मांगों के प्रति चेताने के लिए 28 मार्च को कर सहायक, हड़ताल पर जाएंगे।